हैदराबाद। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने नोहेरा शेख और हीरा ग्रुप ऑफ कंपनीज से जुड़े कथित निवेश घोटाले में बड़ी कार्रवाई की है। ईडी के हैदराबाद जोनल कार्यालय ने नीलाम की गई नौ अचल संपत्तियों के पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी कर ली है। इन संपत्तियों की कुल बिक्री कीमत 103.26 करोड़ रुपये है। शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को हैदराबाद के बंजारा हिल्स इलाके में स्थित दो प्रमुख संपत्तियों का पंजीकरण पूरा किया गया, जिनकी कुल कीमत लगभग 88.23 करोड़ रुपये है। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत की गई है, जिसका उद्देश्य कथित धोखाधड़ी से प्रभावित निवेशकों और वास्तविक दावेदारों को उनकी रकम वापस दिलाना है।ईडी के अनुसार, नोहेरा शेख और हीरा ग्रुप से जुड़े मामले में निवेशकों की रकम की वसूली के लिए कुर्क संपत्तियों की नीलामी की जा रही है। इसी प्रक्रिया के तहत नौ संपत्तियों की बिक्री और पंजीकरण का कार्य पूरा हुआ है।
बंजारा हिल्स की दो बड़ी संपत्तियों का पंजीकरण
ईडी की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को हैदराबाद के प्रतिष्ठित बंजारा हिल्स इलाके में स्थित कार्वी सेंटर और नैना टावर्स नामक दो अचल संपत्तियों का पंजीकरण किया गया।इन दोनों संपत्तियों की संयुक्त बिक्री कीमत लगभग 88.23 करोड़ रुपये बताई गई है।इससे पहले अक्टूबर के पहले सप्ताह में सात अन्य संपत्तियों का पंजीकरण पूरा किया गया था। इनकी कुल कीमत करीब 15.03 करोड़ रुपये थी।इस तरह नौ संपत्तियों की कुल बिक्री राशि 103.26 करोड़ रुपये हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हुई नीलामी
प्रवर्तन निदेशालय ने बताया कि संपत्तियों की नीलामी सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुरूप की गई है।यह मामला नोहेरा शेख, हीरा ग्रुप ऑफ कंपनीज और अन्य संबंधित व्यक्तियों से जुड़ा है।सुप्रीम कोर्ट ने 5 मार्च 2025 को ईडी को मामले में कुर्क की गई अचल संपत्तियों की नीलामी की अनुमति दी थी।अदालत का उद्देश्य इन संपत्तियों की बिक्री से अधिकतम संभव राशि जुटाना था, ताकि वास्तविक पीड़ितों और दावेदारों को राहत प्रदान की जा सके।
5,978 करोड़ रुपये से अधिक जुटाने का आरोप
ईडी की धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई जांच में सामने आया था कि हीरा ग्रुप से जुड़ी आरोपी संस्थाओं ने निवेशकों से 5,978 करोड़ रुपये से अधिक की रकम जुटाई थी।जांच एजेंसी के अनुसार, निवेशकों को सालाना 36 प्रतिशत से अधिक रिटर्न देने का वादा किया गया था।हालांकि, बाद में निवेशकों को तय समय पर भुगतान नहीं किया गया। कई निवेशकों की मूल राशि भी वापस नहीं मिलने के आरोप सामने आए।ईडी ने इन गतिविधियों को लेकर धनशोधन की जांच शुरू की थी। हालांकि, आरोपों का अंतिम न्यायिक निर्धारण संबंधित अदालती कार्यवाही के तहत होगा।
करोड़ों रुपये की संपत्तियां पहले ही कुर्क
हीरा ग्रुप मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने जांच के दौरान कई संपत्तियों की पहचान की थी।ईडी ने पांच अस्थायी कुर्की आदेशों के माध्यम से लगभग 428.83 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों को कुर्क किया है।इन संपत्तियों को कथित अपराध से अर्जित आय से संबंधित मानते हुए कार्रवाई की गई थी।अब न्यायालय के निर्देशों के अनुसार पात्र संपत्तियों की नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
निवेशकों को रकम वापस दिलाने की प्रक्रिया
ईडी के अनुसार, नीलामी से प्राप्त राशि वास्तविक पीड़ितों और दावेदारों को लौटाने के उद्देश्य से इस्तेमाल की जाएगी।इस प्रक्रिया में गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) की भूमिका महत्वपूर्ण है। नीलामी से प्राप्त रकम को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत SFIO के माध्यम से पात्र दावेदारों में वितरित किए जाने की व्यवस्था है।हालांकि, संपत्तियों का पंजीकरण पूरा होने का अर्थ यह नहीं है कि सभी निवेशकों को उनकी रकम वापस मिल चुकी है। भुगतान पात्रता की जांच और आवश्यक प्रक्रियाओं के बाद किया जाएगा।
निवेशकों को राहत मिलने की उम्मीद
हीरा ग्रुप से जुड़े कथित निवेश घोटाले में बड़ी संख्या में लोगों की रकम फंसी होने के आरोप हैं।ऐसे में 103.26 करोड़ रुपये की नौ संपत्तियों का पंजीकरण पूरा होना निवेशकों की रकम वापस दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति है।ईडी की कार्रवाई से संपत्तियों की बिक्री से प्राप्त राशि को कानूनी प्रक्रिया के तहत पीड़ितों तक पहुंचाने का रास्ता आगे बढ़ा है।फिलहाल मामले में अन्य कुर्क संपत्तियों और निवेशकों के दावों से संबंधित प्रक्रिया जारी है। आगे की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और संबंधित कानूनी प्रावधानों के अनुसार की जाएगी।
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