हैदराबाद: तेलंगाना उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ, जिसमें न्यायमूर्ति बी. विजयसेन रेड्डी और न्यायमूर्ति गादी प्रवीण कुमार शामिल हैं, ने तेलंगाना राज्य आवास बोर्ड (TSHB) को निर्देश दिया है कि वह फ्लैट खरीदारों के पक्ष में 10 दिनों के भीतर बिक्री विलेख (सेल डीड) निष्पादित करे। इसके लिए बोर्ड किसी तरह के समायोजन (एडजस्टमेंट) पर जोर नहीं देगा और न ही कोई दंडात्मक ब्याज (पेनल इंटरेस्ट) मांगेगा। यह अंतरिम निर्देश 28 अक्टूबर को तब जारी किया गया, जब अदालत तेलंगाना आवास बोर्ड द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) के 19 जून, 2025 के एक आदेश को चुनौती दी गई थी।
सुनवाई के दौरान, विशेष सरकारी वकील पोट्टिगारी श्रीधर रेड्डी ने कहा कि आवास बोर्ड बिक्री विलेख निष्पादित करने के लिए तैयार है, बशर्ते खरीदार प्रत्येक फ्लैट के लिए 47.85 लाख रुपये की पूरी बिक्री राशि का भुगतान कर दें। हालांकि, फ्लैट खरीदारों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अविनाश देसाई ने इस मांग का विरोध किया। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 8 मई, 2023 के अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि समझौते की धारा 13 के तहत खरीदारों को देय 6 प्रतिशत ब्याज (जो कि 16,66,946 रुपये बनता है) को अंतिम बिक्री राशि में से समायोजित (एडजस्ट) किया जाना चाहिए।
उन्होंने तर्क दिया कि इस समायोजन के बाद, खरीदारों को आवास बोर्ड से लगभग 4,61,946 रुपये मिलने चाहिए। पीठ ने गौर किया कि आवास बोर्ड ने NCDRC के समक्ष बार-बार कहा था कि वह 19 जून, 2025 के आदेश का पालन करेगा। आयोग ने 24 मई, 2026 के अपने आदेश में आवास बोर्ड के स्थायी वकील द्वारा दिए गए इस आश्वासन को भी दर्ज किया था। इस आश्वासन और विशेष सरकारी वकील की दलीलों पर ध्यान देते हुए, पीठ ने आवास बोर्ड को निर्देश दिया कि वह 10 दिनों के भीतर खरीदारों के पक्ष में बिक्री विलेख निष्पादित करे, और इस दौरान किसी तरह के समायोजन पर जोर न दे या दंडात्मक ब्याज की मांग न करे।
पीठ ने आगे आदेश दिया कि बिक्री विलेख निष्पादित होने के बाद, NCDRC के 19 जून, 2025 के आदेश का क्रियान्वयन निलंबित रहेगा। समझौते की धारा 3 के तहत हाउसिंग बोर्ड द्वारा 14 प्रतिशत वार्षिक की दर से दंडात्मक ब्याज (penal interest) मांगने और दूसरी ओर खरीदारों द्वारा सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार समायोजन (adjustment) की मांग करने से जुड़ा विवाद, बाद के चरण में तय किया जाएगा। इस मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर, 2026 के लिए तय की गई है।
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