हैदराबाद: तेलंगाना भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) के अधिकारियों ने NIMS के अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक (एडिशनल मेडिकल सुपरिंटेंडेंट) नोरी लक्ष्मी भास्कर को तीन दिन की पुलिस हिरासत पूरी होने के बाद चंचलगुडा जेल भेज दिया है।
पुलिस हिरासत के दौरान, शुरुआत में तो भास्कर ने अपने बेनामीदारों और अन्य लोगों के नाम पर बनाई गई संपत्ति के बारे में कुछ नहीं बताया, लेकिन लगातार पूछताछ किए जाने पर उन्होंने सब कुछ उगल दिया।
56 वर्षीय भास्कर को 6.13 करोड़ रुपये की आय से अधिक संपत्ति जमा करने के मामले में 22 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। ACB के अनुसार, एर्रागड्डा के कल्पतरु अपार्टमेंट में रहने वाले भास्कर ने अपनी नौकरी के दौरान भ्रष्टाचार और गलत तरीकों का इस्तेमाल करके अपनी ज्ञात आय के स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति जुटाई थी।
चूंकि यह 'भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम-1988' (Prevention of Corruption Act-1988) के तहत एक दंडनीय अपराध है, इसलिए उनके घर और उनके रिश्तेदारों, दोस्तों, बेनामीदारों तथा अन्य सहयोगियों से जुड़ी सात अन्य जगहों पर तलाशी ली गई।
तलाशी के दौरान, अधिकारियों को फ्लैट, खाली प्लॉट, वित्तीय संस्थानों में निवेश, सोने के आभूषण और वाहनों से जुड़े कई दस्तावेज मिले, जिनकी कुल कीमत 6.13 करोड़ रुपये है। इन चल और अचल संपत्तियों की बाजार कीमत, दस्तावेजों में दर्ज कीमत से कई गुना अधिक हो सकती है।
इसके अलावा, यह भी पता चला है कि उन्होंने एक फ्लैट खरीदने के लिए 1.30 करोड़ रुपये का निवेश किया था, जो DRT (डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल) में विवादित था। साथ ही, उन्होंने अलग-अलग लोगों को 1.33 करोड़ रुपये की रकम उधार (हैंड लोन) के तौर पर दी थी।