Hayedrabad हैदराबाद। तेलंगाना की राजनीति में एक बार फिर दल-बदल (Defection) का मुद्दा सुर्खियों में है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई अयोग्यता (Disqualification) कार्यवाही पूरी करने की समयसीमा समाप्त होने में अब केवल दो दिन बचे हैं, लेकिन बीआरएस (Bharat Rashtra Samithi) के 10 दलबदलू विधायकों के खिलाफ कार्रवाई लगभग ठप पड़ी है। ऐसे में विधानसभा अध्यक्ष (Speaker) के कार्यालय ने अब शीर्ष अदालत से समयवृद्धि (Extension) मांगने की तैयारी शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, जिन 10 विधायकों ने बीआरएस छोड़कर सत्तारूढ़ कांग्रेस (Congress) में शामिल होने का फैसला किया था, उनमें से अब तक केवल चार के मामलों की सुनवाई पूरी हो सकी है। इनमें गुडेम महिपाल रेड्डी, बंडला कृष्णमोहन रेड्डी, काले यादैयाह और टी. प्रकाश गौड़ शामिल हैं। इन चार मामलों में भी फैसला सुरक्षित है।
वहीं, शेष छह विधायकों के मामलों में या तो सुनवाई शुरू नहीं हुई है या फिर उन्हें जवाब देने के लिए और समय चाहिए। इनमें पोचारम श्रीनिवास रेड्डी, के. संजय कुमार, आरेकापुडी गांधी और तेल्लम वेंकट राव के मामले अब तक प्रारंभिक चरण में हैं। जबकि वरिष्ठ विधायक दानम नागेंद्र और कडियम श्रीहरि ने औपचारिक रूप से उत्तर दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की है, जिससे प्रक्रिया और अधिक विलंबित हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने बीते महीने स्पष्ट निर्देश दिया था कि “दल-बदल विरोधी कानून के तहत चल रही अयोग्यता याचिकाएं निर्धारित समय में निपटाई जानी चाहिए”, और विधानसभा अध्यक्ष को 30 अक्टूबर तक रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया था। लेकिन अब स्थिति यह है कि आधे से अधिक मामलों में सुनवाई की प्रक्रिया भी शुरू नहीं हो पाई है।
राजनीतिक हलकों में इस देरी को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस सरकार राजनीतिक लाभ के लिए अयोग्यता की कार्यवाही को जानबूझकर टाल रही है। बीआरएस नेताओं का कहना है कि यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है और “स्पीकर की निष्पक्षता” पर सवाल खड़े करता है।
स्पीकर कार्यालय का बचाव
विधानसभा सचिवालय के सूत्रों के अनुसार, कार्यवाही में देरी का कारण ‘तकनीकी और कानूनी जटिलताएं’ हैं। कुछ विधायकों ने दस्तावेजी सबूतों और गवाहों को पेश करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा है। इन परिस्थितियों में, स्पीकर कार्यालय ने सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट भेजने से पहले समयवृद्धि की अर्जी दाखिल करने की तैयारी की है।
राजनीतिक प्रभाव और भविष्य की दिशा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर सुप्रीम कोर्ट समयवृद्धि देने से इनकार करता है, तो स्पीकर को जल्द निर्णय देना पड़ेगा, जिससे तेलंगाना विधानसभा में कांग्रेस की संख्या शक्ति पर असर पड़ सकता है। वहीं, बीआरएस इस मुद्दे को “लोकतांत्रिक शुचिता” का मामला बताकर जनता के बीच जोरदार अभियान चलाने की तैयारी में है।