हैदराबाद: पुलिस ने 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस स्कैम में एक रिटायर्ड कर्मचारी को 29 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ था। साइबर क्राइम पुलिस ने इन दोनों आरोपियों को पकड़ा है, जो 'म्यूल' बैंक अकाउंट (धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल होने वाले खाते) तैयार करने, ठगी की रकम निकालने और पैसे के सुराग को छिपाने के लिए उसे अलग-अलग बैंक खातों में जमा करने का काम करते थे।
आरोप है कि उन्होंने साइबर ठगों के साथ मिलकर USDT (डिजिटल करेंसी) के जरिए लेनदेन करने में भी मदद की और इसके बदले कमीशन लिया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान हैदराबाद के रहने वाले मोहम्मद अशफाक हुसैन और अहमद नजीब उद्दीन के रूप में हुई है।
पुलिस ने रविवार को जारी एक बयान में बताया कि तीसरा आरोपी, बेंगलुरु का रहने वाला सचिन, अभी फरार है। हैदराबाद सिटी के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (क्राइम और SIT) एम. श्रीनिवासुलु ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि 3 मार्च 2025 को एक 63 वर्षीय रिटायर्ड कर्मचारी को कुछ अनजान लोगों के फोन आए। फोन करने वालों ने खुद को दिल्ली पुलिस, CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) का अधिकारी बताया। ठगों ने उन पर 68 मिलियन रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में शामिल होने का झूठा आरोप लगाया और गिरफ्तारी की धमकी दी।
अपनी बातों को सच साबित करने के लिए, ठगों ने फर्जी सरकारी दस्तावेज भेजे और दावा किया कि इस अपराध में पीड़ित के आधार कार्ड की जानकारी और फिंगरप्रिंट का गलत इस्तेमाल हुआ है। उन्होंने पीड़ित से उसकी निजी और बैंकिंग जानकारी हासिल कर ली। इसके बाद, उन्होंने पीड़ित और उसकी बेटी को 'वेरिफिकेशन' के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने के लिए राजी कर लिया और भरोसा दिलाया कि यह रकम उन्हें वापस मिल जाएगी।
ठगों ने उन्हें गिरफ्तारी की धमकी दी और 'राष्ट्रीय सुरक्षा' का हवाला देकर इस बारे में किसी को कुछ न बताने (गोपनीयता बनाए रखने) को कहा। उनकी बातों पर भरोसा करके, पीड़ित और उसकी बेटी ने कुल 29,17,668 रुपये ट्रांसफर कर दिए। जब ​​पैसे वापस नहीं मिले, तो पीड़ित को एहसास हुआ कि उसके साथ धोखाधड़ी हुई है। इसके बाद उसने पुलिस से संपर्क किया ताकि कानूनी कार्रवाई की जा सके। उनकी शिकायत के आधार पर, IT एक्ट की धारा 66(C) और 66(D) तथा BNS की धारा 111(2)(b), 318(4), 319(2), 336(3), 338 और 340(2) के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपी आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे और व्हाट्सएप के जरिए सचिन के संपर्क में आए थे। सचिन ने 'डिजिटल अरेस्ट' धोखाधड़ी के पीड़ितों से ठगे गए पैसों को कई बैंक खातों के जरिए घुमाने की योजना बनाई। इसके लिए उसने कैश डिपॉजिट मशीनों (CDM) का इस्तेमाल किया, ताकि पैसों के लेन-देन का सुराग छिपाया जा सके और जांच एजेंसियों के लिए इन ट्रांजैक्शन का पता लगाना मुश्किल हो जाए।
इस योजना के तहत, अशफाक ने नजीब से बैंक खाते की जानकारी ली और उसे सचिन के साथ साझा किया। इसके बाद, सचिन ने धोखाधड़ी से हासिल की गई रकम को नजीब द्वारा दिए गए बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिया। फिर, अशफाक और नजीब ने चेक के जरिए पैसे निकाले और CDM का इस्तेमाल करके उस नकदी को अलग-अलग बैंक खातों में जमा कर दिया। आरोप है कि सचिन ने जमा की गई रकम से USDT क्रिप्टोकरेंसी खरीदी और बाद में उसे ऑनलाइन बेचकर भारतीय रुपये प्राप्त कर लिए।
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