हैदराबाद। तेलंगाना के खैरताबाद से अयोग्य घोषित विधायक दानम नागेंद्र ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि वह आगामी उपचुनाव का सामना करने के लिए तैयार हैं। सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाई कोर्ट के उस फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें नागेंद्र को संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्य घोषित किया गया था। शीर्ष अदालत के फैसले के बाद नागेंद्र ने कहा कि चुनाव लड़ना उनके लिए कोई नई बात नहीं है और वह एक बार फिर जनता के बीच जाएंगे।सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को नागेंद्र की वह याचिका खारिज कर दी जिसमें उन्होंने तेलंगाना हाई कोर्ट के अयोग्यता संबंधी आदेश को चुनौती दी थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा कि हाई कोर्ट ने कानून की सही व्याख्या की है और उसके फैसले में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है। इसके साथ ही खैरताबाद विधानसभा सीट खाली घोषित करने वाला हाई कोर्ट का आदेश प्रभावी बना हुआ है।फैसले के बाद पत्रकारों से बातचीत में नागेंद्र ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान और स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा कि चुनावी मुकाबले का सामना करना उनके राजनीतिक जीवन में नया नहीं है और उपचुनाव होने पर वह मैदान में उतरेंगे।नागेंद्र ने अपनी संभावित जीत को लेकर भी भरोसा जताया। हालांकि चुनाव में परिणाम मतदाताओं के फैसले से तय होगा और अभी उपचुनाव की पूरी चुनावी प्रक्रिया बाकी है। नागेंद्र ने कहा कि चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद वह अपने अगले राजनीतिक कदमों की विस्तृत जानकारी देंगे।
किस पार्टी से लड़ेंगे चुनाव, नहीं किया खुलासा
नागेंद्र ने उपचुनाव लड़ने का इरादा साफ कर दिया, लेकिन वह किस राजनीतिक दल के टिकट पर मैदान में उतरेंगे, इसे लेकर उन्होंने स्थिति स्पष्ट नहीं की। पत्रकारों के सवाल पर उन्होंने कहा कि फिलहाल वह इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे और चुनाव कार्यक्रम तथा टिकट से जुड़ी घोषणा के बाद सभी पहलुओं पर जानकारी देंगे।नागेंद्र ने दावा किया कि खैरताबाद की जनता का समर्थन उनके साथ बना रहेगा। उन्होंने कहा कि वह लंबे समय से क्षेत्र के लोगों के बीच काम करते आए हैं और आगे भी जनता के बीच रहेंगे। यह नागेंद्र का राजनीतिक दावा है और आगामी उपचुनाव में मतदाता किसे समर्थन देते हैं, यह चुनाव परिणाम से ही तय होगा।
2023 में BRS के टिकट पर जीते थे चुनाव
दानम नागेंद्र ने 2023 के तेलंगाना विधानसभा चुनाव में भारत राष्ट्र समिति (BRS) के उम्मीदवार के रूप में खैरताबाद विधानसभा सीट पर जीत हासिल की थी। इसके बाद 2024 में वह कांग्रेस के साथ चले गए और सिकंदराबाद लोकसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा। वह उस लोकसभा चुनाव में जीत हासिल नहीं कर सके।BRS के टिकट पर विधायक रहते हुए कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में लोकसभा चुनाव लड़ने के कारण उनके खिलाफ दलबदल कानून के तहत अयोग्यता की मांग की गई। मामला पहले तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष के पास गया था। बाद में हाई कोर्ट में इसे चुनौती दी गई।तेलंगाना हाई कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को पलटते हुए नागेंद्र को अयोग्य घोषित कर दिया था। हाई कोर्ट ने उनकी अयोग्यता को 23 अप्रैल 2024 से प्रभावी माना और खैरताबाद विधानसभा सीट को खाली घोषित किया।
सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे नागेंद्र
हाई कोर्ट के फैसले के बाद नागेंद्र ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। दिलचस्प बात यह है कि हाई कोर्ट का फैसला आने के तुरंत बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट जाने पर विचार नहीं किया है और वह दोबारा चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं। बाद में उन्होंने हाई कोर्ट के फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती दी।सुप्रीम कोर्ट में नागेंद्र की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने दलीलें रखीं। मामला इस सवाल पर केंद्रित था कि BRS विधायक के रूप में निर्वाचित होने के बाद कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर लोकसभा चुनाव लड़ने और फिर मूल पार्टी में वापस आने के प्रयास का दलबदल कानून के तहत क्या प्रभाव होगा। शीर्ष अदालत ने अंततः हाई कोर्ट के निष्कर्ष में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
दसवीं अनुसूची से राहत की थी उम्मीद
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नागेंद्र ने कहा कि उन्हें पहले ही अंदेशा था कि ऐसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। उन्होंने बताया कि 2024 में लोकसभा चुनाव लड़ते समय उन्हें इसका अंदाजा था, लेकिन उन्हें उम्मीद थी कि संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत कुछ कानूनी राहत मिल सकती है।दसवीं अनुसूची को आमतौर पर दलबदल विरोधी कानून कहा जाता है। यह निर्वाचित सांसदों और विधायकों की अयोग्यता से जुड़े प्रावधान निर्धारित करती है। नागेंद्र के मामले में अदालतों के सामने प्रमुख तथ्य यह था कि उन्होंने BRS विधायक रहते हुए कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में लोकसभा चुनाव लड़ा था।
अब खैरताबाद उपचुनाव पर नजर
सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद खैरताबाद विधानसभा सीट खाली घोषित करने वाला हाई कोर्ट का फैसला बरकरार है। अब राजनीतिक निगाहें इस सीट पर होने वाले उपचुनाव पर टिक गई हैं।नागेंद्र ने यह साफ कर दिया है कि वह उपचुनाव में उतरना चाहते हैं, लेकिन किस पार्टी से चुनाव लड़ेंगे, इसका खुलासा उन्होंने नहीं किया है। उन्होंने कहा कि चुनाव कार्यक्रम सामने आने के बाद वह अपनी राजनीतिक रणनीति और टिकट से जुड़े सवालों पर स्थिति स्पष्ट करेंगे।इस तरह कानूनी लड़ाई में राहत नहीं मिलने के बाद दानम नागेंद्र अब दोबारा चुनावी मैदान में जाने की तैयारी की बात कर रहे हैं। उनकी ओर से जीत का भरोसा जताया गया है, जबकि खैरताबाद सीट पर अंतिम फैसला मतदाता उपचुनाव में करेंगे।
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