छात्र की मृत्यु के बाद कॉलेज की घटनाओं को विनियमित करने के लिए कानून पर विचार कर रहा
हैदराबाद: नादेरगुल स्थित MVSR इंजीनियरिंग कॉलेज में डांडिया कार्यक्रम के बाद छात्रा सोना दास की मौत की घटना के मद्देनजर, शैक्षणिक संस्थानों में बड़ी भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा उपायों को मजबूत करने के लिए एक नया कानून लाने पर विचार किया जा रहा है। तेलंगाना उच्च शिक्षा परिषद (TGCHE) के अध्यक्ष वी. बालकिस्ता रेड्डी ने कहा कि वे भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक कानूनी ढांचा तैयार करने की संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं।
रेड्डी ने 'डेक्कन क्रॉनिकल' को बताया कि प्रस्तावित 'तेलंगाना इवेंट्स फैसिलिटेशन एंड सेफ्टी बिल, 2026' के जरिए कॉलेज प्रबंधन, कार्यक्रम आयोजकों और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से तय की जा सकती हैं। यह प्रस्ताव अभी विचाराधीन है और इसे अभी तक कानून का रूप नहीं दिया गया है। इस मसौदे में कार्यक्रमों को उनके जोखिम के स्तर के अनुसार वर्गीकृत करने, आयोजन स्थल की सुरक्षा का प्रमाणन लेने, सुरक्षा योजनाएं तैयार करने और समय-समय पर निरीक्षण करने का प्रावधान है। इसमें पुलिस, अग्निशमन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, आपदा प्रबंधन और अन्य संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का भी प्रस्ताव है।
रेड्डी ने बताया, "इस प्रस्तावित ढांचे के तहत, संस्थानों को पहले से ही जोखिमों का आकलन करना होगा, आयोजन स्थल की क्षमता और उसकी संरचनात्मक मजबूती की जांच करनी होगी, अग्नि सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी और आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) को हमेशा खुला रखना होगा। कार्यक्रम की योजना बनाते समय भीड़ प्रबंधन, एंबुलेंस की पहुंच, चिकित्सा सुविधाएं, आपातकालीन संचार व्यवस्था और लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने (इवैक्यूएशन) की व्यवस्था करना भी अनिवार्य होगा।"
परिषद चाहती है कि संस्थान कार्यक्रम आयोजित करने से पहले जरूरी अनुमतियां लें और यदि सुरक्षा संबंधी आवश्यक शर्तें पूरी नहीं होती हैं, तो कार्यक्रम को आगे न बढ़ने दें। इसके अलावा, इसमें जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से तय करने, आपातकालीन अभ्यास (मॉक ड्रिल) कराने, समय-समय पर सुरक्षा समीक्षा करने और किसी भी गंभीर घटना की तुरंत रिपोर्ट करने की बात कही गई है।
MVSR कॉलेज में हुए डांडिया कार्यक्रम के बाद सोना दास की दुखद मौत और कई छात्रों के अस्पताल में भर्ती होने की खबरों के बाद रेड्डी ने यह प्रस्ताव रखा है। TGCHE ने संस्थानों की जवाबदेही तय करने और गंभीर घटनाओं की उचित जांच कराने की मांग की है।
कानूनी मामलों के विशेषज्ञ रेड्डी, जिन्होंने JNU से डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है, इससे पहले नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ में प्रोफेसर और रजिस्ट्रार के रूप में काम कर चुके हैं। 2000 में नालसार से जुड़ने से पहले, उन्होंने आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में वकील के तौर पर भी प्रैक्टिस की थी।