78वीं बार दिल्ली जाएंगे CM रेवंत रेड्डी राज्य की मांगों पर करेंगे चर्चा
हैदराबाद। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी एक बार फिर नई दिल्ली का दौरा करने वाले हैं। मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद राष्ट्रीय राजधानी का यह उनका 78वां दौरा बताया जा रहा है। इस यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री तेलंगाना से जुड़ी विभिन्न मांगों, लंबित परियोजनाओं और केंद्र सरकार से जरूरी मंजूरी एवं सहायता हासिल करने की कोशिश करेंगे। हालांकि उनके लगातार दिल्ली दौरों को लेकर राज्य में राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है।
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के दिल्ली दौरे को राज्य सरकार विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की कोशिश के रूप में देख रही है। तेलंगाना से संबंधित कई प्रस्ताव और परियोजनाएं केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के स्तर पर मंजूरी या सहायता का इंतजार कर रही हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री की कोशिश संबंधित केंद्रीय मंत्रियों और अधिकारियों के सामने राज्य की मांगों को रखने की है।
रेवंत रेड्डी इससे पहले भी दिल्ली में केंद्र सरकार के कई मंत्रियों से मुलाकात कर चुके हैं। तेलंगाना सरकार के आधिकारिक पोर्टल के अनुसार, सितंबर की शुरुआत में उन्होंने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू से नई दिल्ली में मुलाकात की थी। इसी दौरान उन्होंने केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को Invest Telangana Global Summit-2026 और Defence Expo-2026 के लिए आमंत्रित किया था।
इसके अलावा जून 2026 में मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी नई दिल्ली में मुलाकात की थी। प्रधानमंत्री कार्यालय ने उस मुलाकात की आधिकारिक जानकारी जारी की थी। इससे पहले और बाद में भी मुख्यमंत्री ने अलग-अलग केंद्रीय मंत्रालयों के सामने तेलंगाना से जुड़े विषय उठाए हैं।
फरवरी 2026 में मुख्यमंत्री ने केंद्रीय खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात कर तेलंगाना में खरीदे गए अतिरिक्त खाद्यान्न को भारतीय खाद्य निगम द्वारा लेने सहित कई मांगें रखी थीं। राज्य सरकार ने केंद्र से विभिन्न मदों में लंबित राशि जारी करने और चावल की मिलिंग से जुड़ी अनुमति देने का भी अनुरोध किया था।
लगातार दिल्ली दौरों के कारण तेलंगाना की राजनीति में इसे लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। विपक्षी दल मुख्यमंत्री की यात्राओं और उनके नतीजों को लेकर सरकार से जवाब मांगते रहे हैं। उनका सवाल है कि इतनी बार दिल्ली जाने और केंद्र सरकार तथा कांग्रेस नेतृत्व से मुलाकातों के बाद तेलंगाना को कितना लाभ मिला और राज्य की कितनी लंबित मांगों को मंजूरी मिली।
वहीं मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी अपने दिल्ली दौरों का बचाव करते रहे हैं। उनका कहना है कि राष्ट्रीय राजधानी की यात्राओं का उद्देश्य राज्य के विकास से जुड़े मुद्दों को केंद्र के सामने रखना और परियोजनाओं के लिए जरूरी फंड, मंजूरी तथा क्लीयरेंस हासिल करना है। राज्य सरकार का रुख है कि केंद्र और राज्य के बीच समन्वय कई बड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी है।
तेलंगाना में बुनियादी ढांचे, सिंचाई, शहरी विकास, परिवहन और निवेश से जुड़ी कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। ऐसे कई मामलों में केंद्रीय मंत्रालयों से अनुमति, वित्तीय सहयोग या अन्य औपचारिक मंजूरियों की आवश्यकता पड़ती है। इसी वजह से राज्य सरकार मुख्यमंत्री की दिल्ली यात्राओं को प्रशासनिक और विकास संबंधी प्रक्रिया का हिस्सा बताती है।
रेवंत रेड्डी के लगातार दिल्ली जाने का एक राजनीतिक पहलू भी है। कांग्रेस शासित तेलंगाना के मुख्यमंत्री होने के कारण उनकी राष्ट्रीय राजधानी की यात्राओं के दौरान पार्टी नेतृत्व के साथ बैठकों पर भी राजनीतिक नजर रहती है। विपक्ष ऐसी मुलाकातों को लेकर सवाल उठाता रहा है, जबकि सत्तारूढ़ पक्ष का कहना है कि दिल्ली दौरे को केवल राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री के आगामी दिल्ली दौरे के दौरान किन केंद्रीय नेताओं या मंत्रियों से उनकी मुलाकात होगी और तेलंगाना की किन मांगों पर चर्चा आगे बढ़ेगी, इस पर भी नजर रहेगी। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि राज्य की लंबित परियोजनाओं और केंद्र से जरूरी सहायता का मुद्दा इस यात्रा के प्रमुख विषयों में शामिल है।
मुख्यमंत्री के लगातार दिल्ली दौरों को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। एक तरफ विपक्ष इन यात्राओं के ठोस नतीजों पर सवाल उठा रहा है, वहीं मुख्यमंत्री और उनकी सरकार इन्हें तेलंगाना के लिए फंड और मंजूरी हासिल करने की कोशिश बता रहे हैं। ऐसे में 78वां दिल्ली दौरा भी राज्य की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है।