केंद्रीय जल शक्ति मंत्री से मिले CM रेवंत रेड्डी कई मुद्दों पर हुई चर्चा
New दिल्ली : तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल से मुलाकात की। इस दौरान उनके साथ राज्य के मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी और विवेक वेंकटस्वामी के अलावा कुछ सांसद भी मौजूद रहे। मुलाकात में तेलंगाना से जुड़े जल संसाधन और सिंचाई से जुड़े विषयों पर चर्चा होने की बात सामने आई है। मुख्यमंत्री की यह बैठक ऐसे समय हुई है जब राज्य सरकार सिंचाई परियोजनाओं और जल उपलब्धता से जुड़े कई मुद्दों को केंद्र के सामने उठा रही है।
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी इससे एक दिन पहले सोमवार को दिल्ली में आयोजित ‘इंडियाज़ नेक्स्ट चैप्टर’ कार्यक्रम में भी शामिल हुए थे। इस कार्यक्रम का आयोजन असम के दैनिक समाचार पत्र ‘प्रतिदिन’ की ओर से किया गया था। वहां उन्होंने तेलंगाना की छात्र राजनीति, उत्तर और दक्षिण भारत की अलग राजनीतिक संस्कृति तथा अपने राजनीतिक सफर पर विस्तार से बात की।
रेवंत रेड्डी ने कहा कि तेलंगाना में छात्र संगठनों की संरचना उत्तर भारत से अलग है। उनके अनुसार राज्य की छात्र राजनीति में मुख्य रूप से वामपंथी और दक्षिणपंथी छात्र संगठनों की मौजूदगी अधिक दिखती है, जबकि कांग्रेस से जुड़े छात्र संगठन NSUI का प्रभाव अपेक्षाकृत कम है। यह रेवंत रेड्डी का राजनीतिक आकलन था, जिसे उन्होंने कार्यक्रम के दौरान साझा किया।
मुख्यमंत्री ने छात्र राजनीति और मुख्यधारा की राजनीति के बीच अंतर को समझाते हुए कहा कि तेलंगाना में कई बार किसी विश्वविद्यालय या कॉलेज में ABVP से चुनाव लड़ने वाला छात्र नेता बाद में मुख्यधारा की राजनीति में कांग्रेस से जुड़ सकता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि लॉ कॉलेज या आर्ट्स कॉलेज में ABVP के उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतने वाला कोई व्यक्ति बाद में कांग्रेस के टिकट पर विधायक पद का चुनाव लड़ सकता है।
रेवंत रेड्डी ने कहा कि किसी छात्र नेता की विश्वविद्यालय स्तर की राजनीतिक पहचान और उसके परिवार की पारंपरिक राजनीतिक पहचान अलग-अलग हो सकती है। उनके मुताबिक कई मामलों में छात्र विश्वविद्यालय में किसी विशेष संगठन के साथ सक्रिय रहता है, लेकिन उसके गांव या परिवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि कांग्रेस से जुड़ी होती है।
मुख्यमंत्री ने इसी संदर्भ में दावा किया कि तेलंगाना की मुख्यधारा की राजनीति में कांग्रेस का प्रभाव छात्र राजनीति से अलग तरीके से काम करता है। उन्होंने BJP के प्रभाव को लेकर भी टिप्पणी की और कहा कि छात्र राजनीति में ABVP की उपस्थिति दिखाई देती है, लेकिन मुख्यधारा की राज्य राजनीति में समीकरण अलग हैं। यह बयान मुख्यमंत्री का राजनीतिक दावा है और इसे राज्य के व्यापक चुनावी या संगठनात्मक आंकड़ों का स्वतंत्र निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।
रेवंत रेड्डी ने कार्यक्रम में अपने राजनीतिक सफर का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने 2006 में जिला परिषद प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र सदस्य के रूप में राजनीतिक यात्रा की शुरुआत की और 2007 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में विधान परिषद का चुनाव जीता। बाद में वह तेलुगु देशम पार्टी से जुड़े और 2009 तथा 2014 में विधायक चुने गए। इसके बाद 2017 में कांग्रेस में शामिल हुए और 2019 में सांसद निर्वाचित हुए।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि तेलंगाना गठन के बाद राज्य की राजनीति में कई बड़े बदलाव आए। TDP का प्रभाव धीरे-धीरे कम हुआ और कांग्रेस तथा BRS के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा प्रमुख बनती गई। अपने संबोधन में उन्होंने यह भी बताया कि अलग-अलग चरणों में उनका राजनीतिक विरोध राज्य की तत्कालीन सरकार और बाद में BRS नेतृत्व से रहा।
कार्यक्रम में रेवंत रेड्डी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ अपने राजनीतिक संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में शामिल होने से पहले उनकी राहुल गांधी से मुलाकात हुई थी और बातचीत के बाद उन्होंने पार्टी के साथ काम करने का फैसला किया। उन्होंने राहुल गांधी की राजनीतिक प्राथमिकताओं को लेकर भी अपनी राय रखी।
इस बीच मंगलवार को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल के साथ हुई बैठक को राज्य के प्रशासनिक एजेंडे के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तेलंगाना सरकार की ओर से सिंचाई और जल संसाधन से जुड़ी परियोजनाओं को लगातार प्राथमिकता दी जा रही है। हाल ही में मुख्यमंत्री ने कर्नाटक से नारायणपुर जलाशय से जुराला परियोजना के लिए अतिरिक्त पानी छोड़ने का अनुरोध भी किया था, जिसे तेलंगाना के कुछ इलाकों में सिंचाई जरूरतों से जोड़ा गया था।
रेवंत रेड्डी की दिल्ली यात्रा में एक ओर केंद्र सरकार के मंत्री के साथ प्रशासनिक और जल संसाधन से जुड़ी बैठक रही, वहीं दूसरी ओर उन्होंने राजनीतिक मंच पर तेलंगाना की छात्र राजनीति और राज्य के दलगत समीकरणों पर अपने विचार रखे।
इस दौरान उनके बयानों में छात्र संगठनों की भूमिका, कांग्रेस की जमीनी मौजूदगी, ABVP की छात्र राजनीति में सक्रियता और उत्तर-दक्षिण भारत के राजनीतिक व्यवहार में अंतर जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। हालांकि इन टिप्पणियों को रेवंत रेड्डी के राजनीतिक दृष्टिकोण और आकलन के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
कुल मिलाकर मुख्यमंत्री की दिल्ली यात्रा में प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों पहलू दिखाई दिए। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री से मुलाकात जहां राज्य के जल और सिंचाई हितों से जुड़ी रही, वहीं ‘इंडियाज़ नेक्स्ट चैप्टर’ कार्यक्रम में उन्होंने तेलंगाना की राजनीतिक संस्कृति और अपने अनुभवों को सामने रखा।