तेलंगाना: प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि आंध्र प्रदेश लोक सेवा आयोग (APPSC) की ग्रुप-I मुख्य परीक्षा के मूल्यांकन में हुए घोटाले से जुड़े मामले में, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में सात जगहों पर तलाशी अभियान चलाया गया। इस दौरान ED ने घोटाले से जुड़े अहम दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और अन्य रिकॉर्ड जब्त किए हैं।
ED के हैदराबाद जोनल ऑफिस ने बुधवार को 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (PMLA), 2002 की धारा 17 के तहत यह तलाशी अभियान चलाया। केंद्रीय जांच एजेंसी ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि तलाशी के दौरान घोटाले से जुड़े कई अहम दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और अन्य रिकॉर्ड मिले, जिन्हें जब्त कर लिया गया है।
ये तलाशी अभियान कई जगहों पर चलाए गए, जिनमें शामिल हैं: सेवानिवृत्त IPS अधिकारी और APPSC के तत्कालीन सचिव पी. सीतारामंजनेयुलु; 'कैमसाइन मीडिया प्राइवेट लिमिटेड' (जिसे मैनुअल मूल्यांकन का काम सौंपा गया था) और इसके प्रबंध निदेशक पी. मधुसूदन राव; और आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के चिनाकाकानी गांव में स्थित 'आवासा रिसॉर्ट हाईलैंड' (जहां उत्तर पुस्तिकाएं रखी गई थीं और मूल्यांकन का काम किया गया था)।
इसके अलावा, 'ट्रू-ग्रेडर सर्विसेज' (जो 'स्टोन मीडिया एडवाइजरी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड' का एक हिस्सा है और जिसने पहले APPSC के लिए डिजिटल मूल्यांकन किया था) के परिसरों में भी तलाशी ली गई। साथ ही, इसके प्रबंध निदेशक अकेल्ला पेरी श्रीनिवास राव और मूल्यांकन कार्य से जुड़े महामकाली रघुराम के ठिकानों पर भी जांच की गई।
ED ने बताया कि उसने सीतारामंजनेयुलु सहित अन्य आरोपियों के बयान दर्ज किए हैं। एजेंसी ने कहा कि तलाशी के दौरान मिली संपत्ति के दस्तावेजों की जांच की जा रही है। ED ने यह जांच आंध्र प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज की गई FIR के आधार पर शुरू की है। यह FIR भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 320 और 120-B के तहत दर्ज की गई है, जो PMLA के अंतर्गत 'शेड्यूल्ड ऑफेंस' (अनुसूचित अपराध) माने जाते हैं।
FIR में आरोप लगाया गया है कि APPSC ग्रुप-I मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मैनुअल मूल्यांकन में गड़बड़ियां की गईं। इस प्रक्रिया के दौरान, एक निजी कंपनी को 1,14,32,312 रुपये का भुगतान किए जाने का आरोप है। आरोप है कि 2021 में आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश के बाद - जिसमें उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन को रद्द कर मैन्युअल (हाथ से) मूल्यांकन करने का निर्देश दिया गया था - 27 नवंबर 2021 से 19 फरवरी 2022 के बीच मैन्युअल मूल्यांकन का काम 'कैमसाइन मीडिया प्राइवेट लिमिटेड' को सौंप दिया गया था। उस समय APPSC में कोई नियमित अध्यक्ष नहीं था।
इसके बाद, उत्तर पुस्तिकाओं को आधिकारिक परिसर से बाहर गुंटूर जिले के चिनाकाकानी गांव स्थित 'हाइलैंड रिसॉर्ट्स' में ले जाया गया और दिसंबर 2021 से फरवरी 2022 के बीच 84 दिनों तक वहीं रखा गया। आरोप है कि उत्तर पुस्तिकाओं का वास्तव में कोई सही मैन्युअल मूल्यांकन नहीं किया गया, बल्कि पहले हुए डिजिटल मूल्यांकन के अंकों को ही मैन्युअल मूल्यांकन के अंक के रूप में दर्ज कर दिया गया। 1 जनवरी 2022 को सार्वजनिक रूप से यह बताया गया कि यह प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है, और एक निजी कंपनी को चेक के जरिए 1,14,32,312 रुपये का भुगतान कर दिया गया।
बाद में, इस पूरी प्रक्रिया को ही खारिज कर दिया गया। 19 फरवरी 2022 के बाद, उत्तर पुस्तिकाओं को वापस लाया गया और आधिकारिक परिसर में CCTV निगरानी के तहत उनका दोबारा मूल्यांकन किया गया। इसी नए मूल्यांकन के आधार पर अंतिम परिणाम और चयन सूची जारी की गई। ED ने आगे कहा कि 1,14,32,312 रुपये का भुगतान एक ऐसी सेवा के लिए किया गया जो कभी दी ही नहीं गई थी; इसलिए, प्रथम दृष्टया यह PMLA की धारा 2 (1) (u) के तहत 'अपराध से प्राप्त आय' (proceeds of crime) के दायरे में आता है।