हैदराबाद: सिविल सप्लाईज़ मिनिस्टर एन उत्तम कुमार रेड्डी ने शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग की। उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के भीतर वोटर लिस्ट मैनेजमेंट को लेकर सामने आई अंदरूनी आपत्तियों की निष्पक्ष जांच की भी मांग की।

यहां मीडिया से बात करते हुए, उत्तम ने कहा कि वोटर रजिस्ट्रेशन, नाम हटाने और डेटा कंट्रोल से जुड़े आरोप लोकतांत्रिक शासन के बुनियादी सिद्धांतों के लिए खतरा हैं।

उन्होंने कहा, "जब रेफरी ही शक के घेरे में हो, तो लोकतंत्र खुद खतरे में पड़ जाता है।" उन्होंने आगे कहा कि आयोग के कामकाज को लेकर जनता की चिंताओं को "नारों, इनकार या 'अंधे भरोसे' की मांग" से हल नहीं किया जा सकता।

उत्तम कुमार रेड्डी ने एक मीडिया जांच का हवाला दिया जिसमें बताया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने दस महीने की अवधि में कम से कम 14 आपत्तियां उठाई थीं। रिपोर्ट के अनुसार, ये आपत्तियां वोटर रजिस्ट्रेशन, नाम हटाने और बहाल करने, अपील प्रक्रियाओं और कुल मिलाकर वोटर लिस्ट मैनेजमेंट से संबंधित थीं।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस राहुल गांधी के नेतृत्व में चुनाव आयोग की स्वतंत्रता के लिए लड़ेगी। जब तक हर भारतीय के वोट देने के अधिकार की रक्षा नहीं हो जाती, तब तक कांग्रेस पीछे नहीं हटेगी।

उत्तम ने कहा कि चुनाव आयोग बीजेपी का दफ्तर नहीं है और वोटर लिस्ट केंद्र सरकार की संपत्ति नहीं है। वोट सत्ताधारी पार्टी की संपत्ति नहीं, बल्कि देश के लोगों का संवैधानिक अधिकार है।

उत्तम ने कहा, "हम चुनाव आयोग को बीजेपी के लिए राजनीतिक हथियार बनाने की कोशिशों को बर्दाश्त नहीं करेंगे। चुनाव आयुक्तों की चयन समिति से भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को क्यों हटाया गया? बीजेपी ने प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय मंत्री को शामिल करके समिति में बहुमत सुनिश्चित किया।" मंत्री ने गोवा की एक खास घटना का ज़िक्र किया, जहां चुनावी रजिस्ट्रेशन अधिकारियों ने अंतिम वोटर लिस्ट में शामिल करने के लिए 97 योग्य लोगों को मंज़ूरी दी थी, लेकिन सॉफ्टवेयर की कमियों के कारण समय सीमा से पहले उनका रजिस्ट्रेशन नहीं हो सका, जिससे वे लिस्ट से बाहर रह गए।

उन्होंने कहा, "ये कोई मामूली प्रशासनिक विवाद नहीं हैं। ये इस बात से जुड़े हैं कि वोटर लिस्ट में कौन शामिल है, किसे उससे हटाया जा सकता है और क्या वोटर लिस्ट बनाए रखने के लिए ज़िम्मेदार अधिकारी अपने कर्तव्यों का पालन करने में सक्षम हैं।"

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