हैदराबाद: रविवार को ऐतिहासिक सेंट्रल गुरुद्वारा साहिब गौलीगुडा में आस्था, सेवा और आपसी भाईचारे के 100 साल पूरे होने का जश्न मनाया गया। इस मौके पर हज़ारों सिख श्रद्धालु गुरुद्वारे की शताब्दी (100वीं सालगिरह) के कार्यक्रमों के लिए नामपल्ली के एग्ज़िबिशन ग्राउंड्स में इकट्ठा हुए।
1926 में स्थापित, सेंट्रल गुरुद्वारा साहिब गौलीगुडा ने कई पीढ़ियों के दौरान हैदराबाद को बदलते देखा है और साथ ही समानता, भाईचारे, दया और सेवा (निस्वार्थ सेवा) के मूल्यों को बनाए रखा है।
सेंट्रल गुरुद्वारा साहिब गौलीगुडा की प्रबंधक समिति ने तेलंगाना के अन्य सिख गुरुद्वारों के साथ मिलकर एग्ज़िबिशन ग्राउंड्स में एक भव्य 'विशाल दीवान' (धार्मिक सभा) का आयोजन किया। इस सभा में हज़ारों सिख श्रद्धालुओं और अन्य समुदायों के लोगों ने हिस्सा लिया।
इस कार्यक्रम में सिख धर्म के प्रमुख आध्यात्मिक और सामुदायिक नेता शामिल हुए, जिनमें महाराष्ट्र के नांदेड़ स्थित तख्त सचखंड श्री हजूर अबचलनगर साहिब के जत्थेदार सिंह साहिब संत बाबा कुलवंत सिंह जी भी शामिल थे। तख्त सचखंड श्री हजूर साहिब सिख धर्म के पांच सर्वोच्च तख्तों (धार्मिक सत्ता के केंद्रों) में से एक है।
अन्य प्रमुख हस्तियों में नांदेड़ के गुरुद्वारा लंगर साहिब से जुड़े सम्मानित आध्यात्मिक गुरु और सामुदायिक नेता संत बाबा बलविंदर सिंह जी (हजूर साहिब वाले) और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति (DSGMC) के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका शामिल थे।