चेन्नई। तमिलनाडु में 40 लाख से अधिक छोटे और बड़े व्यापारी राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। किराना दुकानों से लेकर थोक बाजारों, कपड़ा प्रतिष्ठानों, इलेक्ट्रॉनिक्स, हार्डवेयर, दवा दुकानों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तक फैला यह विशाल व्यापारिक वर्ग न केवल लाखों लोगों को रोजगार उपलब्ध कराता है, बल्कि आम नागरिकों की दैनिक जरूरतों को भी पूरा करता है। ऐसे में आगामी बजट को लेकर व्यापारियों की अपेक्षाएं काफी बढ़ गई हैं। व्यापारिक संगठनों का मानना है कि यदि सरकार उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेती है तो इससे व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी और तमिलनाडु को ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को हासिल करने में भी मदद मिलेगी।
तमिलनाडु फेडरेशन ऑफ ट्रेड यूनियंस के अध्यक्ष विक्रमाराजा ने बजट से पहले व्यापारियों की ओर से कई महत्वपूर्ण मांगें सरकार के सामने रखी हैं। उनका कहना है कि महंगाई पर प्रभावी नियंत्रण और व्यापारिक लागत कम करने के लिए पेट्रोल और डीजल को वस्तु एवं सेवा कर (GST) के दायरे में लाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। उनका तर्क है कि ईंधन की कीमतों का सीधा असर परिवहन लागत पर पड़ता है, जिससे आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़ जाते हैं। यदि पेट्रोल और डीजल जीएसटी के तहत लाए जाते हैं तो कीमतों में स्थिरता आने की संभावना होगी और इसका लाभ व्यापारियों के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं को भी मिलेगा।
व्यापारिक संगठनों का कहना है कि वर्तमान समय में परिवहन खर्च लगातार बढ़ रहा है। माल की ढुलाई पर अधिक लागत आने से खाद्यान्न, फल-सब्जियां, निर्माण सामग्री और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतें भी प्रभावित होती हैं। ऐसे में ईंधन की कीमतों में राहत मिलने से संपूर्ण आपूर्ति श्रृंखला की लागत कम हो सकती है, जिससे महंगाई पर नियंत्रण पाने में सहायता मिलेगी।
विक्रमाराजा ने राज्य के दीर्घकालिक विकास के लिए परंदूर में प्रस्तावित ग्रीन एयरपोर्ट परियोजना को भी प्राथमिकता देने की मांग की है। उनका कहना है कि भविष्य की आर्थिक जरूरतों और बढ़ते औद्योगिक एवं व्यावसायिक विस्तार को देखते हुए आधुनिक सुविधाओं से लैस एक ग्रीन एयरपोर्ट तमिलनाडु के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उनका मानना है कि इससे निवेश आकर्षित होगा, निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
उन्होंने कहा कि राज्य को वैश्विक निवेश और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए मजबूत आधारभूत ढांचे की आवश्यकता है। आधुनिक हवाई अड्डा बनने से उद्योगों, आईटी कंपनियों, निर्यातकों और व्यापारिक समुदाय को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, जिससे राज्य की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी मजबूत होगी।
व्यापारियों ने बिजली दरों में हाल के वर्षों में हुई बढ़ोतरी पर भी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि छोटे और मध्यम व्यापारियों के लिए बिजली बिल एक महत्वपूर्ण परिचालन खर्च है। लगातार बढ़ती बिजली दरों के कारण दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का संचालन महंगा होता जा रहा है। इसलिए सरकार को बिजली दरों की समीक्षा कर व्यापारियों को राहत देने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
इसी तरह संपत्ति कर (प्रॉपर्टी टैक्स) में हुई वृद्धि को लेकर भी व्यापारिक संगठनों ने अपनी चिंता जाहिर की है। उनका कहना है कि बढ़े हुए कर का अतिरिक्त वित्तीय बोझ छोटे कारोबारियों पर पड़ रहा है। यदि सरकार संपत्ति कर की दरों की समीक्षा कर उसमें कमी करती है तो इससे व्यापारियों को आर्थिक राहत मिलेगी और वे अपने कारोबार के विस्तार पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।
व्यापारिक संगठनों का कहना है कि तमिलनाडु का व्यापारिक समुदाय राज्य के आर्थिक विकास में लगातार योगदान देता आ रहा है। कर राजस्व, रोजगार सृजन और उपभोक्ताओं तक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने में व्यापारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसलिए बजट में व्यापार समर्थक नीतियों को शामिल करना समय की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार व्यापारिक संगठनों की प्रमुख मांगों पर गंभीरता से विचार करती है तो इससे कारोबारी माहौल में सुधार हो सकता है। परिवहन लागत कम होने, ऊर्जा खर्च में राहत मिलने और आधारभूत ढांचे के विकास से राज्य में निवेश का वातावरण और मजबूत हो सकता है। इससे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को भी लाभ मिलेगा तथा आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है।
वर्तमान में तमिलनाडु सरकार राज्य को ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य की दिशा में विभिन्न क्षेत्रों में निवेश, औद्योगिक विकास और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रही है। व्यापारिक संगठनों का मानना है कि यदि बजट में उनकी मांगों को स्थान मिलता है तो यह लक्ष्य हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
अब व्यापारिक समुदाय की निगाहें आगामी बजट पर टिकी हैं। उन्हें उम्मीद है कि सरकार उनकी व्यावहारिक मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेकर व्यापार को प्रोत्साहन देगी, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी और आम लोगों को भी महंगाई से राहत मिल सकेगी।