Tamil Nadu तमिलनाडु: पिछले दो हफ्तों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है, जिससे वाहन चालकों और आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ गया है। इस अवधि में कीमतों में पांचवीं बार वृद्धि दर्ज की गई है, जिसके चलते कई शहरों में दैनिक ईंधन खर्च तेजी से बढ़ गया है। तेल कीमतों में यह उतार-चढ़ाव वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की आपूर्ति और मांग पर पड़े दबाव से जुड़ा बताया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और संघर्ष, जिसे व्यापक रूप से Middle East war के रूप में देखा जा रहा है, ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है। इसमें United States, Israel और Iran के बीच बढ़े तनाव का असर भी क्रूड ऑयल मार्केट पर साफ दिखाई दे रहा है। इस स्थिति ने ग्लोबल गैस सप्लाई और तेल व्यापार को अस्थिर कर दिया है।

बताया जा रहा है कि हालात कुछ समय के लिए शांत हुए हैं, लेकिन इसका प्रभाव अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। विशेष रूप से होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz), जो वैश्विक ऊर्जा व्यापार का एक महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है, वहां कार्गो ट्रैफिक में रुकावट की स्थिति बनी हुई है। इस वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।

इस बढ़ती कीमतों का असर केवल बड़े तेल निर्यातक और आयातक देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका प्रभाव बड़े जनसंख्या वाले देशों पर भी पड़ा है। इनमें India, Sri Lanka, Pakistan और China जैसे देश शामिल हैं, जहां ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर परिवहन, वस्तुओं की कीमतों और दैनिक जीवन पर देखा जा रहा है।

भारत में तेल कंपनियों की मूल्य संशोधन प्रक्रिया पर नजर डालें तो अप्रैल 2022 के बाद लंबे अंतराल के बाद 15 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में पहली बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। इसके बाद सरकारी क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने 15, 19, 23 मई और फिर 25 मई को लगातार चार बार कीमतें बढ़ाई थीं। इसके चलते बाजार में ईंधन की दरें लगातार ऊपर की ओर बढ़ती रहीं।

इसी क्रम में आज सुबह 26 मई को Chennai में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर से वृद्धि दर्ज की गई, जो पिछले दो हफ्तों में पांचवीं बढ़ोतरी है। इस लगातार बढ़ोतरी से स्थानीय स्तर पर वाहन चालकों में चिंता और असंतोष का माहौल देखा जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति और भू-राजनीतिक तनाव में स्थिरता नहीं आती, तब तक ईंधन कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

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