चेन्नई। तमिलनाडु सरकार ने राज्य की सभी डिस्टिलरीज में तैयार होने वाली शराब की गुणवत्ता की सख्त जांच के आदेश दिए हैं। यह फैसला शराब के कुछ उत्पादों पर अस्थायी रोक लगाए जाने और बाद में उनके जल्द क्लियरेंस को लेकर लोगों की ओर से उठाई गई चिंताओं के बीच लिया गया है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाजार में बिकने वाली शराब में अल्कोहल की मात्रा निर्धारित मानकों के अनुरूप हो और उपभोक्ताओं की सुरक्षा से किसी तरह का समझौता न हो।

राज्य में शराब की खुदरा बिक्री का संचालन तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन (TASMAC) के माध्यम से किया जाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार TASMAC सात कंपनियों से बीयर और 11 निर्माताओं से स्पिरिट खरीदता है। ऐसे में शराब की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए उत्पादन से लेकर आपूर्ति और बिक्री तक पूरी प्रक्रिया की निगरानी महत्वपूर्ण हो जाती है।

सरकार के नए निर्देशों के बाद राज्य में शराब निर्माण करने वाली डिस्टिलरीज और संबंधित उत्पादन इकाइयों में गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया को और कड़ा किया जाएगा। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि तैयार उत्पाद निर्धारित मानकों के अनुरूप हों। खास तौर पर शराब में मौजूद अल्कोहल की मात्रा की जांच पर जोर दिया जा रहा है।

अस्थायी रोक के बाद उठे सवाल

यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब कुछ शराब उत्पादों पर अस्थायी रोक लगाए जाने और उसके बाद उनके जल्द क्लियरेंस को लेकर सवाल उठे थे। जनता के बीच यह चिंता सामने आई कि क्या बाजार में भेजे जाने से पहले शराब की पर्याप्त जांच की गई थी या नहीं।

इसी पृष्ठभूमि में सरकार ने गुणवत्ता जांच व्यवस्था को मजबूत करने का फैसला किया है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी उत्पाद को बाजार में भेजने से पहले उसकी आवश्यक जांच पूरी हो। यदि किसी उत्पाद की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाई जाती है तो उसके वितरण पर कार्रवाई की जा सकती है।

अल्कोहल की मात्रा की होगी जांच

सरकार की ओर से विशेष रूप से इस बात की पुष्टि करने पर जोर दिया जा रहा है कि शराब में अल्कोहल की मात्रा निर्धारित सीमा के भीतर है। शराब के उत्पादन में अल्कोहल की मात्रा का सही होना गुणवत्ता और उपभोक्ता सुरक्षा दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।

जांच के दौरान उत्पादों के नमूने लिए जा सकते हैं और उन्हें निर्धारित प्रयोगशालाओं में परीक्षण के लिए भेजा जा सकता है। परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाएगा कि संबंधित उत्पाद बाजार में बिक्री के लिए उपयुक्त हैं या नहीं।

TASMAC की भूमिका अहम

तमिलनाडु में शराब की खुदरा बिक्री के लिए TASMAC की भूमिका केंद्रीय है। राज्य में शराब बेचने वाली प्रमुख सरकारी एजेंसी होने के कारण उसके सामने यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी है कि बिक्री के लिए उपलब्ध कराए जाने वाले उत्पाद गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हों।

TASMAC अलग-अलग निर्माताओं से बीयर और स्पिरिट खरीदता है। बीयर की आपूर्ति सात कंपनियों से और स्पिरिट की खरीद 11 निर्माताओं से होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में अलग-अलग कंपनियों से आने वाले उत्पादों की गुणवत्ता की नियमित निगरानी करना जरूरी है।

सरकार के नए निर्देशों से आपूर्तिकर्ता कंपनियों और डिस्टिलरीज पर भी गुणवत्ता मानकों का पालन करने की जिम्मेदारी बढ़ेगी। उत्पादन के दौरान निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन और तैयार उत्पाद की जांच दोनों पर ध्यान दिया जाएगा।

खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण के निर्देशों के बाद कदम

यह कार्रवाई फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) के निर्देशों के बाद की जा रही है। सरकार की कोशिश है कि शराब से जुड़े उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर किसी तरह की लापरवाही न हो और उपभोक्ताओं को निर्धारित मानकों के अनुरूप उत्पाद उपलब्ध कराए जाएं।

गुणवत्ता जांच के दौरान केवल अल्कोहल की मात्रा ही नहीं, बल्कि संबंधित उत्पादों के निर्धारित मानकों के अनुरूप होने की भी पुष्टि की जा सकती है। अधिकारियों को उत्पादन इकाइयों में जांच व्यवस्था को प्रभावी बनाने और नियमों के पालन पर निगरानी रखने की जिम्मेदारी दी गई है।

उपभोक्ताओं की सुरक्षा पर जोर

शराब की गुणवत्ता को लेकर उठने वाली किसी भी आशंका का सीधा असर उपभोक्ताओं के भरोसे पर पड़ता है। ऐसे में सरकार के लिए जरूरी है कि उत्पादों की जांच प्रक्रिया पारदर्शी और प्रभावी हो। नए निर्देशों के जरिए सरकार ने संकेत दिया है कि शराब की गुणवत्ता को लेकर किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

अस्थायी रोक और उसके बाद उत्पादों के क्लियरेंस को लेकर उठे सवालों के बीच गुणवत्ता जांच को सख्त करने से उपभोक्ताओं की चिंताओं को दूर करने में मदद मिल सकती है। सरकार की ओर से यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि बाजार में भेजे जाने वाले उत्पाद निर्धारित गुणवत्ता मानकों को पूरा करें।

आगे भी जारी रह सकती है निगरानी

सभी डिस्टिलरीज में गुणवत्ता जांच के आदेश के बाद अब संबंधित विभागों और अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। जांच के दौरान यदि किसी कंपनी या उत्पाद में मानकों से जुड़ी कमी सामने आती है तो उसके आधार पर कार्रवाई की जा सकती है।

राज्य में शराब की आपूर्ति करने वाली कंपनियों को भी गुणवत्ता मानकों का कड़ाई से पालन करना होगा। सरकार की इस पहल का उद्देश्य शराब के उत्पादन और वितरण की पूरी प्रक्रिया में निगरानी मजबूत करना है।

कुल मिलाकर तमिलनाडु सरकार ने शराब की गुणवत्ता को लेकर उठी चिंताओं के बीच राज्य की सभी डिस्टिलरीज में सख्त जांच के आदेश देकर गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था को मजबूत करने की पहल की है। TASMAC द्वारा सात कंपनियों से बीयर और 11 निर्माताओं से स्पिरिट खरीदे जाने के कारण इस पूरी आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी महत्वपूर्ण है। अब उत्पादों की गुणवत्ता और निर्धारित अल्कोहल मात्रा की जांच के जरिए यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा कि उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाली शराब तय मानकों के अनुरूप हो।

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