परिसीमन विवाद के बीच विजय थलपति के रुख पर उठे सवाल, कांग्रेस के रुख से बदली सियासी तस्वीर
तमिलनाडु : परिसीमन के मुद्दे को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री विजय थलपति के हालिया बयान और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हुई मुलाकात के बाद उनके रुख को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि विजय ने परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर अपना स्पष्ट रुख नहीं रखा और अपने पुराने रुख से पीछे हटते नजर आ रहे हैं।
दरअसल, मुख्यमंत्री विजय थलपति ने हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। इस बैठक के बाद उन्होंने परिसीमन को लेकर बयान दिया था कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण के क्षेत्र में बेहतर काम किया है, उन्हें संसद में प्रतिनिधित्व के मामले में नुकसान नहीं होना चाहिए। विजय के इस बयान के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई।
तमिलनाडु सहित दक्षिण भारत के कई राज्यों में लंबे समय से यह चिंता जताई जाती रही है कि अगर जनसंख्या के आधार पर परिसीमन किया गया तो जिन राज्यों ने जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित किया है, उनकी लोकसभा सीटों की संख्या कम हो सकती है। दक्षिणी राज्यों का तर्क है कि उन्होंने परिवार नियोजन और जनसंख्या नियंत्रण की नीतियों को सफलतापूर्वक लागू किया है, इसलिए उन्हें इसका राजनीतिक नुकसान नहीं उठाना चाहिए।
विजय थलपति के बयान को लेकर विपक्षी दलों ने उन पर निशाना साधा। विपक्ष का आरोप था कि मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के साथ बैठक के बाद अपने रुख में नरमी दिखाई है। कुछ नेताओं ने कहा कि परिसीमन जैसे संवेदनशील मुद्दे पर राज्य के हितों की मजबूती से पैरवी करने की जरूरत है।
हालांकि, अब कांग्रेस ने लोकसभा सीटों के मौजूदा आवंटन को अगले 25 वर्षों तक बनाए रखने की मांग का समर्थन किया है। कांग्रेस के इस रुख के बाद परिसीमन के मुद्दे पर विपक्षी दलों के बीच एक समान राय बनाने की कोशिश तेज होती दिख रही है।
कांग्रेस का कहना है कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है, उन्हें प्रतिनिधित्व के स्तर पर किसी भी तरह का नुकसान नहीं होना चाहिए। पार्टी ने मौजूदा लोकसभा सीटों की संख्या को लंबे समय तक स्थिर रखने की मांग का समर्थन किया है।
परिसीमन भारत में लोकसभा और विधानसभा सीटों की सीमाओं तथा संख्या के पुनर्निर्धारण की प्रक्रिया है। यह प्रक्रिया आमतौर पर जनगणना के आंकड़ों के आधार पर की जाती है। संविधान के प्रावधानों के तहत समय-समय पर परिसीमन आयोग का गठन किया जाता है। हालांकि, जनसंख्या नियंत्रण को लेकर दक्षिणी राज्यों की चिंताओं के कारण यह मुद्दा राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बना हुआ है।
तमिलनाडु में यह मुद्दा खास महत्व रखता है क्योंकि राज्य लंबे समय से जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रमों में आगे रहा है। राज्य के राजनीतिक दलों का मानना है कि यदि केवल आबादी के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण किया गया तो तमिलनाडु जैसे राज्यों का संसद में प्रभाव कम हो सकता है।
विजय थलपति की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के लिए भी यह मुद्दा राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी राज्य के अधिकारों और तमिल हितों को लेकर अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में विजय का परिसीमन पर दिया गया बयान राजनीतिक विश्लेषकों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि विजय ने अपने बयान में संतुलन बनाने की कोशिश की है। उन्होंने एक तरफ जनसंख्या नियंत्रण करने वाले राज्यों के हितों की बात की, वहीं केंद्र के साथ संवाद बनाए रखने का संकेत भी दिया। हालांकि, विपक्ष इसे राजनीतिक रणनीति के तौर पर देख रहा है।
फिलहाल परिसीमन का मुद्दा आने वाले दिनों में और गरमा सकता है। दक्षिणी राज्यों की चिंताओं, केंद्र सरकार के रुख और विपक्षी दलों की रणनीति के बीच विजय थलपति की भूमिका पर सभी की नजर बनी हुई है। कांग्रेस के समर्थन के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि तमिलनाडु की राजनीति में यह मुद्दा किस दिशा में आगे बढ़ता है।