Tamilnadu तमिलनाडु : मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन द्वारा बुलाए गए सर्वदलीय बैठक में SIR (Special Summary Revision) को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। इस मुद्दे पर अब विपक्षी दलों ने राज्य सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। पूर्व AIADMK सांसद डॉ. जे. जयवर्धन ने कहा कि DMK सरकार का SIR का विरोध करना यह दर्शाता है कि वह निष्पक्ष चुनाव नहीं चाहती और राज्य की जनता का ध्यान मौजूदा आर्थिक और सामाजिक समस्याओं से भटकाने में लगी है। जयवर्धन ने कहा, “हम चाहते हैं कि एक निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव हो। कोई भी योग्य मतदाता मतदाता सूची से बाहर न रहे। चुनाव आयोग ने जब यह ड्राइव शुरू करने का निर्णय लिया है, तो यह उसका हिस्सा है और इसे प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। देश के करीब 12 राज्यों में SIR प्रक्रिया चल रही है, फिर तमिलनाडु में इसका विरोध क्यों?”
उन्होंने कहा कि SIR (स्पेशल समरी रिवीजन) प्रक्रिया चुनाव आयोग की एक स्वतंत्र पहल है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन और सटीक बनाना है। “यह प्रक्रिया नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) से जुड़ी नहीं है। DMK इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने में लगी है,” उन्होंने कहा। पूर्व सांसद ने आगे कहा कि जब DMK खुद सत्ता में थी, तब भी इसी प्रक्रिया को अंजाम दिया गया था और तब किसी ने विरोध नहीं किया था। लेकिन अब विपक्ष में आने के बाद वही सरकार इस प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है। “यह सिर्फ राजनीति है, जनता का ध्यान भटकाने की एक चाल,” जयवर्धन ने कहा।
उन्होंने राज्य की मौजूदा स्थिति पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, तमिलनाडु में गरीबी, महंगाई और बेरोजगारी की स्थिति चिंताजनक है। “लोगों की आय घटी है, लेकिन बिजली और पानी के बिलों में लगातार वृद्धि की जा रही है। कानून-व्यवस्था की हालत भी बिगड़ चुकी है। ऐसे में सरकार असली मुद्दों से बचने के लिए SIR का विरोध कर रही है,” उन्होंने जोड़ा। जयवर्धन ने यह भी कहा कि जनता अब इस तरह के राजनीतिक हथकंडों को समझ चुकी है। उन्होंने चुनाव आयोग से अपील की कि तमिलनाडु में भी मतदाता सूची संशोधन कार्य को बिना किसी राजनीतिक दबाव के पूरा किया जाए ताकि 2026 विधानसभा चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी हों।
इस बीच, DMK की ओर से कहा गया है कि SIR प्रक्रिया नागरिकों के अधिकारों के उल्लंघन का कारण बन सकती है और इसमें पारदर्शिता की कमी है। हालांकि, विपक्ष का दावा है कि यह सिर्फ “राजनीतिक नाटक” है और जनता के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश है।