चेन्नई। अभिनेता से राजनेता बने और अब तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय यानी थलपति विजय को लेकर मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने बड़ी टिप्पणी की है। विजय की सरकार के शुरुआती कामकाज पर बात करते हुए अनवर इब्राहिम ने उन्हें तर्क, सिद्धांत, मूल्यों और सुशासन की एक 'नई आवाज' के रूप में देखा। हालांकि तारीफ के साथ उन्होंने यह भी कहा कि सरकार चलाना आसान काम नहीं है और मुख्यमंत्री के तौर पर विजय को आगे कई तरह के दबावों और चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
मलेशियाई प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि विजय ने फिल्मी दुनिया में लंबा सफर तय करने के बाद राजनीति में कदम रखा और अब तमिलनाडु की सत्ता संभाल रहे हैं। अनवर इब्राहिम ने उनके शुरुआती शासन को सकारात्मक संकेत के रूप में देखा, लेकिन साथ ही सत्ता और प्रशासन की वास्तविक चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया।
विजय को बताया 'नई आवाज'
मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने चेन्नई के थांथी टीवी को दिए इंटरव्यू में विजय के कामकाज को लेकर अपनी राय रखी। उनसे पूछा गया था कि वह मुख्यमंत्री विजय के अब तक के शासन को किस तरह देखते हैं।
इस पर अनवर इब्राहिम ने विजय की प्रशंसा करते हुए कहा कि वह उन्हें तर्क, सिद्धांत, मूल्यों और सुशासन की नई आवाज के रूप में देखते हैं। हालांकि उन्होंने यह संकेत भी दिया कि किसी सरकार का मूल्यांकन केवल शुरुआती दौर के आधार पर नहीं किया जा सकता। शासन में समय के साथ अलग-अलग तरह की जटिल परिस्थितियां सामने आती हैं।
यानी अनवर इब्राहिम की टिप्पणी को केवल विजय की तारीफ के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी। उन्होंने विजय के शुरुआती कदमों को सकारात्मक बताया, लेकिन अपने अनुभव का हवाला देते हुए आगे की चुनौतियों को भी महत्वपूर्ण माना।
'सरकार चलाना आसान नहीं'
अनवर इब्राहिम लंबे समय से मलेशियाई राजनीति का हिस्सा रहे हैं। अपने राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार चलाने के दौरान कई तरह के दबाव सामने आते हैं।
उनके मुताबिक शासन के मुद्दे कई बार सुरक्षा, नस्ल और धर्म जैसे संवेदनशील विषयों से जुड़ जाते हैं। सरकार को अलग-अलग समुदायों और समूहों की चिंताओं को भी ध्यान में रखना पड़ता है। यही वजह है कि किसी नेता के लिए सिद्धांतों और मूल्यों को कायम रखते हुए सभी पक्षों के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
विजय के संदर्भ में भी मलेशियाई प्रधानमंत्री ने इसी अनुभव की ओर इशारा किया। उनका मानना है कि शुरुआत महत्वपूर्ण है, लेकिन असली परीक्षा लंबे समय तक शासन चलाने और अलग-अलग तरह के दबावों का सामना करने में होती है।
फिल्मी पर्दे से तमिलनाडु की सत्ता तक विजय
विजय दक्षिण भारतीय सिनेमा के सबसे लोकप्रिय अभिनेताओं में शामिल रहे हैं। राजनीति में आने के लिए उन्होंने तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) का गठन किया था। पार्टी की आधिकारिक वेबसाइट खुद को जनकेंद्रित राजनीति और कल्याण आधारित शासन की दिशा में काम करने वाला राजनीतिक आंदोलन बताती है।
2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद विजय मुख्यमंत्री बने। ऐसे में उनकी सरकार का शुरुआती दौर राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींच रहा है।
अनवर इब्राहिम की टिप्पणी भी इसी संदर्भ में सामने आई है। एक स्थापित विदेशी नेता द्वारा विजय को सुशासन की 'नई आवाज' बताना उनके लिए सकारात्मक टिप्पणी मानी जा रही है, लेकिन इसके साथ दी गई शासन की चुनौतियों वाली सलाह भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
तिरुक्कुरल से मलेशियाई पीएम का खास जुड़ाव
इंटरव्यू के दौरान अनवर इब्राहिम ने तमिल साहित्य के प्रसिद्ध ग्रंथ **तिरुक्कुरल** से अपने पुराने जुड़ाव का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कई दशक पहले उन्होंने अपने बजट भाषण में तिरुक्कुरल का इस्तेमाल किया था।
उन्होंने तिरुक्कुरल का बहासा मलेशिया में अनुवाद कराने की पहल का भी जिक्र किया। अनवर के मुताबिक, तिरुक्कुरल में बेहद मजबूत नैतिक संदेश मौजूद हैं।
मलेशिया में बड़ी संख्या में तमिल मूल के लोग रहते हैं और तमिल भाषा तथा संस्कृति का वहां पुराना प्रभाव रहा है। ऐसे में अनवर इब्राहिम की विजय और तमिल संस्कृति को लेकर की गई टिप्पणियां राजनीतिक के साथ सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
विजय से क्यों नहीं हो पाई मुलाकात?
मलेशियाई प्रधानमंत्री और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय के बीच मुलाकात की भी चर्चा थी। अनवर इब्राहिम के BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद चेन्नई जाने की संभावना थी, लेकिन दोनों नेताओं के कार्यक्रमों का तालमेल नहीं बैठ सका।
अनवर इब्राहिम ने बताया कि विजय के कार्यालय की ओर से कार्यक्रम में बदलाव की कोशिश भी की गई थी। हालांकि मुख्यमंत्री की पहले से तय कुछ व्यस्तताओं और मलेशियाई प्रधानमंत्री के सीमित समय के कारण मुलाकात संभव नहीं हो पाई।
इसके बावजूद दोनों नेताओं की मुलाकात की संभावना खत्म नहीं हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, भविष्य में यह बैठक मलेशिया के प्रशासनिक केंद्र पुत्रजया या चेन्नई में हो सकती है।
दिल्ली में राहुल और प्रियंका से मुलाकात
भारत यात्रा के दौरान अनवर इब्राहिम ने नई दिल्ली में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा से भी मुलाकात की।
यह मुलाकात नाश्ते पर हुई, जिसमें भारत-मलेशिया संबंधों के अलावा वैश्विक और क्षेत्रीय घटनाक्रम पर भी चर्चा हुई। अनवर इब्राहिम ने बाद में राहुल गांधी को अपना 'अच्छा दोस्त' बताया।
मलेशियाई प्रधानमंत्री भारत की मेजबानी में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली आए थे। इसी यात्रा के दौरान उनकी भारतीय राजनीति से जुड़े कई प्रमुख नेताओं के साथ बातचीत हुई।
विजय के लिए तारीफ के साथ संदेश भी
अनवर इब्राहिम के पूरे बयान को देखें तो इसमें विजय के लिए तारीफ और सलाह दोनों नजर आती हैं। एक तरफ उन्होंने विजय को तर्क, सिद्धांत, मूल्यों और सुशासन की नई आवाज बताया, वहीं दूसरी तरफ यह भी याद दिलाया कि सत्ता में आने और सफलतापूर्वक सरकार चलाने में बड़ा अंतर होता है।
शासन के दौरान आर्थिक फैसलों से लेकर सामाजिक संतुलन, कानून-व्यवस्था, सुरक्षा, धर्म और विभिन्न समुदायों की अपेक्षाओं तक कई मोर्चों पर सरकार की परीक्षा होती है।
इसी वजह से अनवर का संदेश साफ है कि विजय की शुरुआत सकारात्मक दिखाई दे सकती है, लेकिन उनकी सरकार की वास्तविक सफलता आने वाले समय में लिए जाने वाले फैसलों और उनके नतीजों से तय होगी।
फिलहाल मलेशियाई प्रधानमंत्री की टिप्पणी ने विजय के राजनीतिक सफर को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। फिल्मी पर्दे पर वर्षों तक 'थलपति' के नाम से पहचान बनाने वाले विजय अब प्रशासन और राजनीति की परीक्षा से गुजर रहे हैं। आने वाले समय में उनकी सरकार इन चुनौतियों से किस तरह निपटती है, इस पर तमिलनाडु के साथ-साथ देश की राजनीति की भी नजर रहेगी।