चेन्नई: मद्रास उच्च न्यायालय ने निजी अस्पतालों को चिकित्सा उपकरणों के आयात पर शुल्क में छूट देने से इनकार करने के केंद्र सरकार के फैसले को बरकरार रखा है, जो गरीबों को मुफ्त इन-पेशेंट उपचार प्रदान नहीं करते हैं.
कर छूट रद्द करने पर आपत्ति जताते हुए निजी अस्पतालों द्वारा दायर याचिकाओं की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एसएम सुब्रमण्यम ने कहा कि जनता के लाभ के लिए निर्धारित नियमों का पालन किया जाना चाहिए।
अपोलो अस्पताल, चेन्नई और गोकुलम अस्पताल, सलेम ने शुल्क छूट के नियमों का पालन न करने के कारण विदेशों से चिकित्सा उपकरणों के आयात पर सीमा शुल्क का भुगतान करने से छूट दिए जाने के बाद उच्च न्यायालय का रुख किया।
सुनवाई के दौरान, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एआरएल सुंदरेसन ने प्रस्तुत किया कि ऐसे नियम हैं कि शुल्क मुक्त अस्पतालों को आयातित उपकरणों की मदद से गरीबों के 40 प्रतिशत आंतरिक रोगों का मुफ्त इलाज करना चाहिए और 10 प्रतिशत बेड मुफ्त में आरक्षित करना चाहिए। जांच के बाद पता चला कि दोनों अस्पताल इन नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं।
इसके जवाब में, निजी अस्पतालों का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील ने कहा कि अस्पतालों द्वारा आयोजित चिकित्सा शिविरों में मुफ्त इलाज प्रदान किया जाता है और सवाल किया कि जब मरीज अस्पतालों में नहीं आते हैं तो अस्पताल मुफ्त इलाज कैसे कर सकते हैं।
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