कंगारू कोर्ट ने तमिलनाडु के बहिष्कृत परिवार को हर्जाना देने पर मजबूर किया
तेनकासी: संबावरवडाकराई कस्बे में नादर समुदाय की एक 'कंगारू कोर्ट' (अनधिकृत पंचायत) ने कथित तौर पर समाज से बहिष्कृत एक परिवार को एक बुजुर्ग के शव का अंतिम संस्कार सार्वजनिक श्मशान घाट पर करने से रोक दिया। उन्होंने परिवार को अंतिम संस्कार की अनुमति देने से पहले 2.1 लाख रुपये का जुर्माना भरने के लिए मजबूर किया। आरोप है कि पुलिस ने भी पीड़ित परिवार को जुर्माना चुकाने की सलाह दी।
मृतक की पहचान 85 वर्षीय के.वी. रामराज के रूप में हुई है, जो आर. सेंथिल वेल के पिता थे। सेंथिल का परिवार उन आठ परिवारों में से एक है, जिन्हें समुदाय ने केवल इसलिए बहिष्कृत कर दिया था क्योंकि उन्होंने विग्नेश नाम के एक अन्य ग्रामीण के परिवार से बात की थी।
सीपीएम के क्षेत्रीय सचिव आर. पट्टाभिरामन् के अनुसार, विग्नेश के परिवार को सबसे पहले 'नाट्टामई' (समुदाय प्रमुख) पी. वेंकटेश ने बहिष्कृत किया था। ऐसा तब हुआ जब विग्नेश ने कुछ साल पहले जमीन विवाद से जुड़े मामले में 'कंगारू कोर्ट' के फैसले को मानने से इनकार कर दिया था।