चेन्नई: मद्रास हाई कोर्ट ने पूर्व विधायकों और आयोगों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) तथा गैर-सरकारी संगठनों (NGO) के सेवानिवृत्त अधिकारियों द्वारा निजी वाहनों पर सरकारी प्रतीकों और झंडों के अनधिकृत इस्तेमाल का मुद्दा उठाया है।

बुधवार को मिनी-बस संचालन के लिए रूट तय करने से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए, जस्टिस एन. सेंथिलकुमार ने कहा कि निजी वाहनों पर सरकारी प्रतीकों और झंडों का इस तरह का अनधिकृत इस्तेमाल तब हो रहा है, जबकि कोर्ट पहले ही ऐसी गतिविधियों को रोकने के आदेश दे चुका है।

'एस. मुकाचंद बोथरा' मामले में कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए, जज ने बताया कि 'प्रतीक और नाम (अनुचित उपयोग की रोकथाम) अधिनियम, 1950' और इसके नियमों के तहत ऐसा करना स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित है।

बुधवार को जारी एक अंतरिम आदेश में जज ने कहा, "इसलिए, किसी भी पूर्व सांसद/विधायक, आयोगों या समितियों, PSU, बैंकों, पंचायती राज संस्थानों, परिषदों, NGO या विश्वविद्यालयों के सेवानिवृत्त अधिकारियों को अपने वाहनों, लेटर पैड या इमारतों पर इन संस्थानों या सरकार के प्रतीकों, झंडों, स्टिकर या नामों का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है।"

उन्होंने बताया कि इस तरह के इस्तेमाल के लिए अधिनियम के तहत पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है, लेकिन दुर्भाग्य से विभिन्न आयोगों, संगठनों, PSU, बैंकों और नगर परिषदों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सचिव इन प्रतीकों, नामों और झंडों का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं और इन्हें अपने वाहनों पर लगा रहे हैं।

 

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