मेकेदातु विवाद: अंबुमणि रामदास ने सीएम विजय को दी चेतावनी

Update: 2026-07-31 09:47 GMT

चेन्नई। तमिलनाडु में मेकेदातु बांध परियोजना को लेकर राजनीतिक विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। पट्टाली मक्कल काची (PMK) के अध्यक्ष अंबुमणि रामदास ने गुरुवार को उन खबरों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी, जिनमें दावा किया गया था कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय मेकेदातु बांध परियोजना पर बातचीत के लिए कर्नाटक जा सकते हैं।

अंबुमणि रामदास ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री इस मुद्दे पर चर्चा के लिए कर्नाटक जाते हैं, तो यह तमिलनाडु के हितों के लिए बेहद नुकसानदायक होगा। उन्होंने राज्य सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि कावेरी नदी से जुड़े मुद्दे पर किसी भी तरह का ऐसा कदम नहीं उठाया जाना चाहिए, जिससे तमिलनाडु के किसानों और आम लोगों के हित प्रभावित हों।

चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर दिल्ली रवाना होने से पहले पत्रकारों से बातचीत करते हुए रामदास ने मेकेदातु बांध परियोजना को लेकर अपनी पार्टी का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि कावेरी जल विवाद तमिलनाडु के लिए लंबे समय से संवेदनशील मुद्दा रहा है और राज्य के जल अधिकारों की रक्षा करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि मेकेदातु बांध परियोजना को लेकर तमिलनाडु की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। PMK अध्यक्ष ने दावा किया कि इस परियोजना से राज्य के किसानों और जल उपलब्धता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से इस मामले में सतर्कता बरतने की अपील की।

इस दौरान अंबुमणि रामदास ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को भी चुनौती दी। उन्होंने कहा कि यदि राहुल गांधी मेकेदातु बांध परियोजना के खिलाफ सार्वजनिक रूप से अपना रुख स्पष्ट करते हैं, तो PMK राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) से बाहर निकलने के लिए तैयार है।

रामदास ने कहा कि कावेरी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर राजनीतिक दलों को अपने रुख को स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी से अपील की कि वे तमिलनाडु के हितों को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना पर अपनी स्थिति बताएं।

मेकेदातु बांध परियोजना कर्नाटक सरकार की प्रस्तावित योजना है, जिसका उद्देश्य कावेरी नदी पर बांध बनाकर पानी का भंडारण और पेयजल आपूर्ति को मजबूत करना है। हालांकि, तमिलनाडु इस परियोजना का लंबे समय से विरोध करता रहा है। राज्य का कहना है कि इससे कावेरी नदी के जल प्रवाह और उसके हिस्से के पानी पर असर पड़ सकता है।

कावेरी जल विवाद कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच दशकों पुराना मुद्दा है। दोनों राज्यों के बीच नदी के पानी के बंटवारे को लेकर कई बार राजनीतिक तनाव और विरोध प्रदर्शन देखने को मिले हैं। इस विवाद के समाधान के लिए केंद्र सरकार और संबंधित प्राधिकरणों की ओर से कई प्रयास किए गए हैं।

अंबुमणि रामदास ने कहा कि तमिलनाडु सरकार को राज्य के जल संसाधनों और किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि किसी भी तरह की बातचीत या समझौते से पहले राज्य के हितों का मूल्यांकन जरूरी है।

वहीं, मुख्यमंत्री विजय की संभावित कर्नाटक यात्रा को लेकर अभी तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों राज्यों के बीच मेकेदातु परियोजना को लेकर किसी स्तर पर बातचीत प्रस्तावित है या नहीं।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि कावेरी जल से जुड़े मुद्दे तमिलनाडु में हमेशा भावनात्मक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहे हैं। ऐसे में किसी भी सरकार के लिए इस विषय पर संतुलित रुख अपनाना चुनौतीपूर्ण होता है।

PMK के इस बयान के बाद मेकेदातु बांध परियोजना को लेकर राज्य की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर अन्य राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने की संभावना है।

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