मेकेदातु बांध विवाद: स्टालिन ने विजय की आलोचना करते हुए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की

Update: 2026-08-01 08:42 GMT

चेन्नई। कावेरी नदी पर प्रस्तावित मेकेदातु बांध परियोजना को लेकर तमिलनाडु की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के अध्यक्ष एवं तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) के प्रमुख सी. विजय (जोसेफ विजय) की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि कावेरी जैसे राज्य के जीवन-रेखा से जुड़े संवेदनशील मुद्दे पर व्यक्तिगत राजनीतिक पहल के बजाय सभी दलों को साथ लेकर आगे बढ़ना आवश्यक है। उन्होंने इस मामले में तत्काल सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग करते हुए राज्य के सभी राजनीतिक दलों और किसान संगठनों से एकजुट होने की अपील की।

स्टालिन ने अपने बयान में कहा कि मेकेदातु बांध का मुद्दा केवल एक राजनीतिक विषय नहीं, बल्कि तमिलनाडु के किसानों, पेयजल आपूर्ति और लाखों लोगों के भविष्य से जुड़ा हुआ है। ऐसे महत्वपूर्ण विषय पर किसी भी प्रकार की एकतरफा पहल राज्य के हितों को कमजोर कर सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि विजय ने इस संवेदनशील मामले में अकेले राजनीतिक कदम उठाने का प्रयास किया, जिसका परिणाम उन्हें अलगाव और व्यापक अस्वीकृति के रूप में भुगतना पड़ा।

उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के विभिन्न राजनीतिक दलों और किसान संगठनों ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि कर्नाटक सरकार के साथ सीधे राजनीतिक स्तर पर बातचीत करने के बजाय कानूनी और संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए। इसके बावजूद विजय ने इन सुझावों और चेतावनियों की अनदेखी करते हुए अपनी अलग पहल जारी रखी। स्टालिन ने कहा कि इस प्रकार का रवैया राज्य के साझा हितों के अनुरूप नहीं है।

डीएमके अध्यक्ष ने कहा कि कावेरी नदी तमिलनाडु की जीवन-रेखा है और इससे जुड़े हर निर्णय का प्रभाव राज्य के लाखों किसानों की आजीविका पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि कावेरी डेल्टा क्षेत्र के किसान वर्षों से जल संकट का सामना कर रहे हैं और ऐसे समय में मेकेदातु परियोजना को लेकर राज्य के भीतर राजनीतिक मतभेद पैदा करना उचित नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी दलों, किसान संगठनों और विशेषज्ञों को साथ बैठाकर एक साझा रणनीति तैयार की जानी चाहिए ताकि तमिलनाडु के हितों की प्रभावी ढंग से रक्षा की जा सके।

स्टालिन ने कहा कि सर्वदलीय बैठक के माध्यम से राज्य की एक स्पष्ट और मजबूत नीति तैयार की जा सकती है, जिसे केंद्र सरकार तथा संबंधित न्यायिक और वैधानिक संस्थाओं के समक्ष प्रभावी ढंग से रखा जा सके। उन्होंने कहा कि यदि तमिलनाडु एकजुट होकर अपनी बात रखेगा तो उसकी स्थिति अधिक मजबूत होगी और राज्य के अधिकारों की रक्षा बेहतर ढंग से की जा सकेगी।

उन्होंने विजय पर निशाना साधते हुए कहा कि राजनीतिक लोकप्रियता हासिल करने के उद्देश्य से उठाए गए कदम राज्य के हितों की रक्षा नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि जनता भावनात्मक मुद्दों पर राजनीति नहीं, बल्कि ठोस और व्यावहारिक समाधान चाहती है। इसलिए सभी राजनीतिक दलों को आपसी मतभेद भुलाकर राज्य के हित में एक मंच पर आना चाहिए।

स्टालिन ने यह भी कहा कि तमिलनाडु सरकार पहले से ही मेकेदातु परियोजना के खिलाफ अपने कानूनी और संवैधानिक अधिकारों का उपयोग कर रही है तथा राज्य के जल अधिकारों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास जारी रखेगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार किसानों और आम जनता के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगी।

उधर, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मेकेदातु बांध परियोजना लंबे समय से तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच विवाद का विषय रही है। कर्नाटक इस परियोजना को पेयजल और बिजली उत्पादन की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताता है, जबकि तमिलनाडु का कहना है कि इससे राज्य को मिलने वाले कावेरी जल प्रवाह पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। यही कारण है कि यह मुद्दा समय-समय पर दोनों राज्यों के बीच राजनीतिक और कानूनी बहस का केंद्र बनता रहा है।

किसान संगठनों ने भी मांग की है कि राज्य सरकार इस मामले में सभी पक्षों को विश्वास में लेकर आगे बढ़े और कावेरी जल विवाद से जुड़े हर कदम पर व्यापक राजनीतिक सहमति सुनिश्चित करे। उनका कहना है कि किसानों के हित सर्वोपरि होने चाहिए और किसी भी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा से ऊपर उठकर राज्य के जल अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए।

मेकेदातु बांध विवाद के बीच स्टालिन द्वारा सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग ने तमिलनाडु की राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य के अन्य राजनीतिक दल इस प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाते हैं और कावेरी नदी के इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर व्यापक राजनीतिक सहमति बन पाती है या नहीं।

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