चेन्नई। तमिलनाडु में मेडिकल शिक्षा सत्र 2026-27 के लिए एमबीबीएस (MBBS) और बीडीएस (BDS) पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। राज्य के मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च निदेशालय (डीएमई) द्वारा सरकारी और निजी मेडिकल तथा डेंटल कॉलेजों की कुल 13,999 सीटों के लिए काउंसलिंग आयोजित की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, इस वर्ष की काउंसलिंग 13 अगस्त से शुरू होने की संभावना है। हालांकि, आधिकारिक कार्यक्रम जारी होना अभी बाकी है।
राज्य के हजारों मेडिकल अभ्यर्थी काउंसलिंग कार्यक्रम का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) के परिणाम घोषित होने के बाद अब छात्रों की निगाहें सीट आवंटन प्रक्रिया पर टिकी हैं। काउंसलिंग के माध्यम से सरकारी मेडिकल कॉलेजों, सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों तथा निजी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में विभिन्न श्रेणियों की सीटों पर प्रवेश दिया जाएगा।
मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च निदेशालय (DME) इस पूरी प्रक्रिया का संचालन करेगा। राज्यभर के सरकारी और निजी संस्थानों में उपलब्ध कुल 13,999 मेडिकल सीटों के लिए ऑनलाइन काउंसलिंग आयोजित की जाएगी। इसमें सरकारी कोटा, प्रबंधन (मैनेजमेंट) कोटा तथा अन्य निर्धारित श्रेणियों की सीटों का आवंटन नियमानुसार किया जाएगा।
वर्तमान शैक्षणिक सत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 29 जून से शुरू हुई थी, जो 27 जुलाई तक चली। इस दौरान अभ्यर्थियों ने ऑनलाइन आवेदन, दस्तावेज अपलोड और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कीं। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब निदेशालय मेरिट सूची तैयार करने और काउंसलिंग कार्यक्रम को अंतिम रूप देने में जुटा हुआ है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष 72 हजार से अधिक छात्रों ने मेडिकल और डेंटल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आवेदन किया है। इनमें 41 हजार से अधिक अभ्यर्थियों ने सरकारी कोटा की सीटों के लिए आवेदन किया, जबकि 31 हजार से अधिक उम्मीदवारों ने प्रबंधन (मैनेजमेंट) कोटा की सीटों के लिए पंजीकरण कराया है। बड़ी संख्या में प्राप्त आवेदनों से स्पष्ट है कि तमिलनाडु में मेडिकल शिक्षा के प्रति छात्रों की रुचि लगातार बढ़ रही है।
काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी। इसमें अभ्यर्थियों को अपनी रैंक, आरक्षण श्रेणी और उपलब्ध सीटों के आधार पर कॉलेज एवं पाठ्यक्रम का चयन करने का अवसर मिलेगा। प्रत्येक चरण में सीट आवंटन के बाद चयनित छात्रों को निर्धारित समय के भीतर अपने आवंटित संस्थान में रिपोर्ट करना होगा। यदि कोई छात्र निर्धारित समय सीमा में प्रवेश प्रक्रिया पूरी नहीं करता है, तो उसकी सीट अगले चरण की काउंसलिंग के लिए उपलब्ध करा दी जाएगी।
राज्य स्तरीय काउंसलिंग के अलावा देशभर में सरकारी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों की 15 प्रतिशत सीटें ऑल इंडिया कोटा (AIQ) के अंतर्गत आरक्षित रहती हैं। इन सीटों के लिए प्रवेश प्रक्रिया का संचालन डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) के अधीन कार्यरत मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) करती है। ऑल इंडिया कोटा के तहत अभ्यर्थियों को देश के विभिन्न राज्यों के सरकारी मेडिकल एवं डेंटल कॉलेजों में प्रवेश का अवसर मिलता है।
एमसीसी केवल ऑल इंडिया कोटा की सीटों के लिए ही नहीं, बल्कि देश के प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे एम्स (AIIMS), जिपमर (JIPMER), केंद्रीय विश्वविद्यालयों तथा वैधानिक विश्वविद्यालयों में एमबीबीएस और बीडीएस पाठ्यक्रमों की सीटों के लिए भी ऑनलाइन काउंसलिंग आयोजित करती है। इन संस्थानों में प्रवेश भी नीट-यूजी की मेरिट के आधार पर ही दिया जाता है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस वर्ष भी मेडिकल सीटों के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिलेगी। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कम फीस और बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं के कारण अधिकांश छात्रों की पहली पसंद सरकारी संस्थान होते हैं। वहीं निजी मेडिकल कॉलेजों में भी योग्य अभ्यर्थियों को विभिन्न श्रेणियों के तहत प्रवेश का अवसर मिलेगा।
मेडिकल शिक्षा विभाग ने अभ्यर्थियों को सलाह दी है कि वे काउंसलिंग से संबंधित सभी आधिकारिक सूचनाओं पर नियमित नजर रखें। मेरिट सूची, काउंसलिंग की तारीख, विकल्प भरने (चॉइस फिलिंग), दस्तावेज सत्यापन और सीट आवंटन से जुड़ी सभी जानकारी निदेशालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी की जाएगी। छात्रों को किसी भी भ्रामक सूचना या अफवाह पर भरोसा न करने और केवल आधिकारिक सूचना के आधार पर ही आगे की प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी गई है।
सूत्रों के अनुसार, काउंसलिंग कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा जल्द की जा सकती है। यदि प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार प्रक्रिया शुरू होती है, तो 13 अगस्त से पहले चरण की ऑनलाइन काउंसलिंग प्रारंभ होने की संभावना है। इसके बाद विभिन्न चरणों में सीट आवंटन, रिपोर्टिंग और रिक्त सीटों के लिए मॉप-अप राउंड आयोजित किए जाएंगे।
तमिलनाडु में मेडिकल और डेंटल शिक्षा में प्रवेश की यह प्रक्रिया हर वर्ष लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी होती है। ऐसे में अभ्यर्थी और उनके अभिभावक अब आधिकारिक काउंसलिंग शेड्यूल जारी होने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि वे समय पर सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर सकें और अपने पसंदीदा मेडिकल या डेंटल कॉलेज में प्रवेश सुनिश्चित कर सकें।