तमिलनाडु एक्सप्रेस में मिले मानव अंग की जांच तेज, चेन्नई पहुंची GRP कैंट की टीम
चेन्नई। तमिलनाडु एक्सप्रेस के साधारण कोच में बुधवार सुबह लाल रंग के बैग में मानव अंग मिलने के मामले की जांच तेज हो गई है। घटना की तह तक पहुंचने के लिए जीआरपी कैंट की टीम शुक्रवार दोपहर चेन्नई पहुंची। यहां टीम ने चेन्नई आरपीएफ के अधिकारियों के साथ करीब एक घंटे तक बैठक की और घटना से जुड़े तमाम पहलुओं पर जानकारी जुटाई।
जांच टीम ने चेन्नई रेलवे स्टेशन पर लगे 45 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को भी खंगाला। फुटेज की शुरुआती पड़ताल में पुलिस को एक संदिग्ध व्यक्ति की गतिविधि दिखाई दी है। बताया गया कि यह व्यक्ति लोकल ट्रेन से चेन्नई रेलवे स्टेशन पहुंचा था। अब पुलिस इस संदिग्ध की पहचान करने के साथ यह पता लगाने में जुटी है कि उसका लाल बैग और मानव अंग मिलने की घटना से कोई संबंध है या नहीं।
साधारण कोच में मिला था लाल बैग
बुधवार सुबह तमिलनाडु एक्सप्रेस के साधारण कोच में लाल रंग का बैग मिलने के बाद यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों में हड़कंप मच गया था। बैग की जांच के दौरान उसमें मानव अंग मिलने की जानकारी सामने आई। इसके बाद रेलवे पुलिस को सूचना दी गई और मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की गई।
मानव अंग मिलने की सूचना के बाद रेलवे स्टेशन और ट्रेन में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सतर्कता बढ़ाई गई। पुलिस ने बैग को कब्जे में लेकर उससे जुड़े साक्ष्यों को सुरक्षित किया। इसके साथ ही यह पता लगाने का प्रयास शुरू हुआ कि बैग ट्रेन में किस स्टेशन से आया और उसे किसने रखा था।
चेन्नई से जुड़ी कड़ी तलाश रही पुलिस
जांच के दौरान यह संभावना सामने आई कि मानव अंग वाला बैग चेन्नई से ट्रेन में रखा गया हो सकता है। इसी कड़ी में जीआरपी कैंट की टीम चेन्नई पहुंची। टीम ने आरपीएफ अधिकारियों से घटना से संबंधित उपलब्ध जानकारी साझा की और रेलवे स्टेशन पर हुई गतिविधियों की जानकारी ली।
शुक्रवार दोपहर हुई बैठक में स्टेशन पर ट्रेन की आवाजाही, यात्रियों की गतिविधियों और उपलब्ध सुरक्षा रिकॉर्ड पर चर्चा की गई। इसके बाद जांच टीम ने सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल शुरू की।
45 कैमरों की फुटेज की जांच
चेन्नई रेलवे स्टेशन पर अलग-अलग स्थानों पर लगे 45 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को जांच टीम ने देखा। पुलिस का उद्देश्य यह पता लगाना था कि संदिग्ध बैग स्टेशन परिसर में कहां से आया और उसे ट्रेन तक कौन लेकर पहुंचा।
फुटेज की जांच के दौरान एक संदिग्ध व्यक्ति के लोकल ट्रेन से चेन्नई रेलवे स्टेशन पहुंचने की जानकारी सामने आई। अब जांच एजेंसियां उस व्यक्ति की पहचान और उसकी गतिविधियों की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं।
पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि संदिग्ध व्यक्ति स्टेशन पहुंचने के बाद किस दिशा में गया और क्या वह किसी अन्य व्यक्ति के संपर्क में आया था।
संदिग्ध की पहचान बनी जांच का अहम बिंदु
सीसीटीवी फुटेज में संदिग्ध व्यक्ति की गतिविधि सामने आने के बाद अब उसकी पहचान जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है। पुलिस फुटेज में दिखाई दे रहे व्यक्ति की तस्वीर और हुलिये के आधार पर उसकी पहचान करने का प्रयास कर रही है।
साथ ही रेलवे स्टेशन के अन्य कैमरों की फुटेज से उसके आने-जाने के रास्ते को ट्रैक किया जा सकता है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि वह स्टेशन के किस हिस्से में गया और ट्रेन के प्लेटफॉर्म तक कैसे पहुंचा।
हालांकि, केवल सीसीटीवी में संदिग्ध दिखाई देने से उसके मामले में शामिल होने की पुष्टि नहीं होती। पुलिस अन्य साक्ष्यों के आधार पर उसकी भूमिका की जांच कर रही है।
बैग ट्रेन तक कैसे पहुंचा, सबसे बड़ा सवाल
जांच एजेंसियों के सामने सबसे अहम सवाल यह है कि लाल रंग का बैग तमिलनाडु एक्सप्रेस के साधारण कोच तक कैसे पहुंचा। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि बैग को किसी यात्री ने ट्रेन में रखा या कोई व्यक्ति विशेष रूप से उसे वहां छोड़कर गया।
इसके लिए ट्रेन के संबंधित कोच में मौजूद यात्रियों, रेलवे कर्मचारियों और अन्य प्रत्यक्षदर्शियों से जानकारी जुटाई जा सकती है। बैग मिलने से पहले और बाद की गतिविधियों की भी जांच की जा रही है।
आरपीएफ और जीआरपी के बीच समन्वय
मामले की जांच में जीआरपी और आरपीएफ के बीच समन्वय महत्वपूर्ण है। जीआरपी कैंट की टीम ने चेन्नई पहुंचकर आरपीएफ अधिकारियों के साथ बैठक इसी उद्देश्य से की। रेलवे परिसर में सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी रिकॉर्ड और संदिग्ध गतिविधियों से संबंधित जानकारी को साझा किया जा रहा है।
रेलवे स्टेशनों पर बड़ी संख्या में यात्री आते-जाते हैं। ऐसे में सीसीटीवी फुटेज मामले की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। पुलिस संदिग्ध व्यक्ति की गतिविधियों के साथ-साथ अन्य संभावित सुरागों को भी जोड़ने में जुटी है।
मानव अंग की पहचान भी अहम
मामले की जांच में मिले मानव अंग की पहचान करना भी महत्वपूर्ण कड़ी है। पुलिस और संबंधित विशेषज्ञों की ओर से मानव अंग से जुड़े आवश्यक परीक्षण कराए जा रहे हैं। पहचान और अन्य वैज्ञानिक जांच से आगे की कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि मानव अंग किस व्यक्ति का है और इसे ट्रेन में रखने के पीछे क्या वजह थी। इस संबंध में पुलिस अलग-अलग संभावनाओं को ध्यान में रखकर जांच आगे बढ़ा रही है।
जांच जारी, सुरागों को जोड़ रही टीम
फिलहाल जीआरपी कैंट की टीम चेन्नई में मिले सीसीटीवी फुटेज और अन्य जानकारी के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है। 45 कैमरों की फुटेज में सामने आए संदिग्ध व्यक्ति की पहचान होने के बाद मामले में आगे की तस्वीर स्पष्ट होने की उम्मीद है।
पुलिस अभी किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है। जांच टीम बैग के स्रोत, संदिग्ध की गतिविधियों और मानव अंग की पहचान समेत सभी पहलुओं को जोड़ने में लगी है। आने वाले दिनों में संदिग्ध की पहचान और अन्य साक्ष्यों के सामने आने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की दिशा तय हो सकती है।