चेन्नई में इन्फ्लुएंसर वी. हरीश की मौत, ऑनलाइन उत्पीड़न की जांच की मांग
जेसन सैमुअल ने आरोप नकारे
चेन्नई: सोशल मीडिया पर वित्तीय जानकारी साझा करने वाले 27 वर्षीय इन्फ्लुएंसर वी. हरीश की मौत का मामला सामने आया है। शुरुआती रिपोर्टों में उनकी मृत्यु को आत्महत्या बताया गया है। इंस्टाग्राम पर उनके 13 लाख से अधिक फॉलोअर्स थे और वह ‘फाइनेंस विद हरीश’ नाम से सामग्री बनाते थे। उनके पिता ने ऑनलाइन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है। हालांकि, मृत्यु की परिस्थितियों और कथित साइबरबुलिंग के बीच संबंध की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
हरीश मंगलवार को चेन्नई के मुत्तुकाडु इलाके में अपने किराए के आवास पर मृत पाए गए। वह पिछले करीब पांच वर्षों से वित्त और निवेश से संबंधित विषयों पर वीडियो साझा कर रहे थे। उनके पिता जे. विनायगम ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर उनके बेटे को लगातार निशाना बनाया जा रहा था। उन्होंने ऑनलाइन पोस्ट, वीडियो और खातों के बंद होने से जुड़े घटनाक्रम की जांच कराने की मांग की है।
परिवार का कहना है कि हरीश के सोशल मीडिया अकाउंट बंद होने से उनकी परेशानियां बढ़ी थीं। रिपोर्टों के अनुसार, सितंबर में उनका एक प्रमुख अकाउंट बंद हुआ था। इसके बाद उन्होंने नए खाते के जरिए सामग्री साझा करने की कोशिश की। पिता ने आरोप लगाया कि बार-बार शिकायतों और ऑनलाइन टिप्पणियों के कारण हरीश तनाव में थे। यह परिवार का पक्ष है; किसी एक विवाद को उनकी मृत्यु का निश्चित कारण बताने वाला जांच निष्कर्ष सामने नहीं आया है। विनायगम ने अपनी शिकायत में जेसन सैमुअल पर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि सैमुअल ने हरीश की वित्तीय सलाह और उनकी विश्वसनीयता को लेकर ऑनलाइन सामग्री प्रकाशित की थी। परिवार ने संबंधित डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और अकाउंट बंद किए जाने की परिस्थितियों का पता लगाने का आग्रह किया है। शिकायत में उठाए गए आरोपों की सत्यता, पोस्ट का संदर्भ और विभिन्न लोगों की भूमिका जांच से स्पष्ट होनी बाकी है।
दूसरी ओर, वेंचर स्टूडियो जेमुरिया इंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेसन सैमुअल ने साइबरबुलिंग के आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर हरीश की मृत्यु पर दुख जताते हुए कहा कि उनका उद्देश्य उत्पीड़न करना नहीं था। सैमुअल के अनुसार, उन्होंने केवल वित्तीय सलाह देने की पात्रता और पंजीकरण संबंधी दावों पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा कि वह इस घटना से स्तब्ध हैं और ऐसा परिणाम न तो चाहते थे, न इसकी अपेक्षा की थी।
सैमुअल ने दावा किया कि हरीश के पास सेबी के पंजीकृत निवेश सलाहकार की मान्यता नहीं थी और एएमएफआई पंजीकरण को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए थे। उनके मुताबिक, उन्होंने हरीश से उचित अनुमति के साथ काम करने को कहा था। ये सैमुअल के दावे हैं और इन्हें नियामक संस्था का अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। वित्तीय पात्रता पर विवाद तथा किसी व्यक्ति के साथ कथित ऑनलाइन उत्पीड़न, दोनों अलग प्रश्न हैं, जिनका आकलन संबंधित साक्ष्यों के आधार पर होना चाहिए।
मामले में कानाथुर पुलिस द्वारा अस्वाभाविक मृत्यु का प्रकरण दर्ज कर परिस्थितियों की जांच किए जाने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस दोनों पक्षों के बयानों को देख रही है। परिवार की शिकायत और सैमुअल की सफाई के बीच अभी किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी तय करने वाला आधिकारिक निष्कर्ष उपलब्ध नहीं है। इसलिए आरोपों को आरोप के रूप में प्रस्तुत करना और जांच पूरी होने से पहले किसी को दोषी न ठहराना आवश्यक है।
इस घटना की रिपोर्टिंग में परिवार की निजता और संवेदनशीलता का ध्यान रखना भी जरूरी है। सोशल मीडिया पर लोकप्रियता किसी व्यक्ति की निजी परिस्थितियों की पूरी तस्वीर नहीं बताती। इसी तरह किसी अकाउंट का बंद होना अपने आप में संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध लगाए गए सभी आरोपों का प्रमाण नहीं होता। फिलहाल मुख्य प्रश्न यह हैं कि शिकायतों और पोस्ट का घटनाक्रम क्या था तथा उपलब्ध साक्ष्य क्या बताते हैं। इनका उत्तर जांच से ही मिलेगा। मानसिक परेशानी महसूस होने पर किसी भरोसेमंद व्यक्ति या योग्य मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर से सहायता लेना उपयोगी हो सकता है।