चेन्नई: इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मद्रास (IIT-M) द्वारा विकसित एक इंजेक्टेबल हाइड्रोजेल, फाइब्रोसिस और अन्य पुरानी डीजेनेरेटिव बीमारियों के इलाज में काफी बदलाव ला सकता है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह हाइड्रोजेल लंबे समय तक दवा लेने की ज़रूरत को कम कर देगा।
संस्थान के बायोटेक्नोलॉजी विभाग के शोधकर्ताओं द्वारा बनाया गया यह बायोडिग्रेडेबल हाइड्रोजेल, एंटीफाइब्रोटिक और एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाओं को सीधे प्रभावित जगह पर, लक्षित और लगातार तरीके से पहुँचाने में मदद करता है।
शरीर के तापमान पर तरल से जेल में बदलने के लिए डिज़ाइन किया गया यह फ़ॉर्मूला, दवा की एक ही स्थानीय खुराक को कई दिनों तक सक्रिय रहने देता है। इस तरह, यह हफ़्तों तक बार-बार दवा लेने की ज़रूरत को खत्म कर सकता है।
बयान में आगे कहा गया है कि इस नई खोज में रेशम के कोकून और समुद्री शैवाल से मिलने वाले प्राकृतिक बायोमटीरियल का इस्तेमाल किया गया है। इससे यह न केवल शरीर के अनुकूल (biocompatible) है, बल्कि भारत के जैव-संसाधन की ताक़त के भी अनुरूप है।