हनूर मुठभेड़ मामला: तमिलनाडु सरकार ने मृतकों के परिवारों को 10-10 लाख मुआवजे का ऐलान
चेन्नई। कर्नाटक के चामराजनगर जिले के हनूर वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में वन विभाग के कर्मचारियों के साथ हुई मुठभेड़ में मारे गए तीन संदिग्ध शिकारियों के परिवारों को तमिलनाडु सरकार ने आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। तमिलनाडु सरकार ने मंगलवार को विधानसभा में ऐलान किया कि मृतकों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा।
तमिलनाडु के वन मंत्री आर.वी. रंजीत कुमार ने विधानसभा में जानकारी देते हुए कहा कि कर्नाटक के जंगलों में मारे गए तीनों तमिल नागरिकों के परिवारों को राज्य सरकार की ओर से सहायता राशि दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है और उन्हें आर्थिक मदद उपलब्ध कराई जाएगी।
हनूर वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में हुई गोलीबारी की घटना को लेकर तमिलनाडु विधानसभा में भी चर्चा हुई। सत्तारूढ़ डीएमके और विपक्षी एआईएडीएमके के नेताओं ने इस मामले को सदन में उठाया और घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की।
विधानसभा में नेताओं ने मांग की कि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए जांच को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। कुछ नेताओं ने कर्नाटक सरकार से मामले को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने की भी मांग की, ताकि घटना की निष्पक्ष जांच हो सके।
गौरतलब है कि हनूर तालुक के कावेरी वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र में 15 अगस्त को वन विभाग की टीम और कथित शिकारियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। इस घटना में तीन लोगों की मौत हो गई थी। मृतकों की पहचान तमिलनाडु से जुड़े लोगों के रूप में बताई गई थी।
घटना के बाद से ही दोनों राज्यों में राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज हो गई थी। तमिलनाडु के नेताओं ने इस मामले को उठाते हुए मृतकों के परिवारों के लिए न्याय और जांच की मांग की थी।
कर्नाटक सरकार की ओर से पहले ही कहा जा चुका है कि वन विभाग के कर्मचारियों ने कथित तौर पर आत्मरक्षा में कार्रवाई की थी। वहीं, विपक्षी दलों ने इस दावे पर सवाल उठाते हुए न्यायिक जांच की मांग की है।
मुठभेड़ के बाद घटनास्थल से हथियार, टॉर्च, शिकार से जुड़े सामान और कथित तौर पर जंगली जानवरों का मांस बरामद होने की बात सामने आई थी। वन विभाग का कहना था कि टीम अवैध शिकार की गतिविधियों को रोकने के लिए अभियान चला रही थी।
हालांकि, मृतकों के परिवारों और कुछ राजनीतिक दलों ने घटना को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पूरे मामले की पारदर्शी जांच होनी चाहिए, जिससे वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
तमिलनाडु विधानसभा में वन मंत्री आर.वी. रंजीत कुमार ने कहा कि राज्य सरकार मानवीय आधार पर मृतकों के परिवारों को सहायता उपलब्ध करा रही है। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवारों को मुश्किल समय में सहयोग देना सरकार की जिम्मेदारी है।
मुआवजे की घोषणा के बाद अब इस मामले को लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया और जांच पर नजर बनी हुई है। दोनों राज्यों के बीच यह मामला राजनीतिक रूप से भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वन्यजीव संरक्षण और मानव अधिकारों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। अवैध शिकार रोकने के लिए वन विभाग की कार्रवाई आवश्यक है, लेकिन ऐसी घटनाओं में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।
हनूर मुठभेड़ मामले में अब मृतकों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने का फैसला लिया गया है। वहीं, राजनीतिक दल लगातार मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल तमिलनाडु सरकार की ओर से घोषित 10-10 लाख रुपये की सहायता राशि मृतकों के परिवारों तक पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। आने वाले दिनों में जांच और सरकारों के रुख से इस मामले की दिशा स्पष्ट होगी।