चेन्नई: मद्रास हाई कोर्ट ने अन्ना यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर एफिलिएशन ऑफ़ इंस्टीट्यूशन्स (CAI) के प्रमुख के खिलाफ 'घोस्ट फैकल्टी' (फर्जी फैकल्टी) मामलों में दर्ज FIR को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने पाया कि उनके खिलाफ कोई मामला नहीं बनता है।

जस्टिस एम. निर्मल कुमार ने हाल ही में डॉ. वी.आर. गिरिदेव की याचिका पर यह आदेश दिया। गिरिदेव को CAI का डायरेक्टर तब नियुक्त किया गया था, जब एफिलिएशन (मान्यता) देने में हुई गड़बड़ियों को हुए एक साल बीत चुका था।

डायरेक्टरेट ऑफ़ विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन (DVAC) ने IPC और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक साजिश, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक कदाचार के आरोप में 17 फैकल्टी सदस्यों, यूनिवर्सिटी के अन्य कर्मचारियों और उससे जुड़े निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों के खिलाफ FIR दर्ज की थी।

गिरिदेव, जिन्हें 9 मई 2024 को CAI का डायरेक्टर नियुक्त किया गया था, उन्हें उस FIR में छठे आरोपी के तौर पर नामजद किया गया था। यह FIR उन 353 लोगों के बारे में थी जो एक से ज़्यादा संस्थानों में पूर्णकालिक (full-time) फैकल्टी के तौर पर काम कर रहे थे।

उन्होंने FIR रद्द करवाने की गुहार लगाते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनके वकील ने दलील दी कि एफिलिएशन के आदेश 31 जुलाई 2023 तक जारी कर दिए गए थे, जो उनके पदभार संभालने से काफी पहले की बात है। इसलिए, शैक्षणिक सत्र 2023-24 के लिए एफिलिएशन की किसी भी प्रक्रिया में न तो वे शामिल थे और न ही उन्होंने उसमें कोई भूमिका निभाई थी।

 

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