विधानसभा चुनाव में हार के बाद DMK का बयान, ‘हार-जीत लोकतंत्र का हिस्सा, वापसी करेंगे’
Tamil Nadu तमिलनाडु: तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में मिली अप्रत्याशित हार के बाद द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बताते हुए स्वीकार किया है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि हार और जीत लोकतंत्र में सामान्य बात है और इससे संगठन के कार्यों या उसके उद्देश्य पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
DMK ने बुधवार को जारी अपने बयान में कहा कि पार्टी ने अपने लंबे राजनीतिक इतिहास में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं और हर स्थिति में कार्यकर्ताओं ने जनता की भलाई के लिए काम जारी रखा है। पार्टी नेतृत्व ने यह भी दोहराया कि संगठन पूरी तरह से मजबूत है और आगे भी जनता के मुद्दों पर सक्रिय रूप से काम करता रहेगा।
DMK के ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी आर.एस. भारती ने पार्टी के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1991 के विधानसभा चुनाव में भी पार्टी को बड़ी हार का सामना करना पड़ा था। उस समय 234 सीटों में से केवल दो सीटों पर ही पार्टी जीत हासिल कर पाई थी, जिनमें प्रमुख नेता एम. करुणानिधि और परिथी इलमवझुती की जीत शामिल थी।
उन्होंने बताया कि 1991 की हार के बावजूद पार्टी ने खुद को मजबूत किया और 1996 में सत्ता में वापसी की। भारती ने कहा कि यह DMK के इतिहास की खासियत रही है कि हार के बाद भी संगठन ने अपनी विचारधारा और जनता के प्रति प्रतिबद्धता को बनाए रखा।
उन्होंने यह भी कहा कि इस बार के चुनाव परिणामों में DMK और विजेता पार्टी के बीच वोट शेयर का अंतर बहुत अधिक नहीं है। DMK को 24.19 प्रतिशत वोट मिले हैं, जबकि विजेता पार्टी को 34.92 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए हैं। उनके अनुसार यह अंतर इतना बड़ा नहीं है कि इसे स्थायी राजनीतिक बदलाव माना जाए।
भारती ने भरोसा जताया कि आने वाले समय में पार्टी फिर से मजबूत होकर वापसी करेगी और चुनाव जीतने में सफल होगी। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता लगातार सक्रिय हैं और जनता के बीच संगठन की पकड़ बनी हुई है।
इस बीच DMK अध्यक्ष और मुख्यमंत्री M. K. Stalin ने भी चुनाव परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राजनीति में जीत और हार से अधिक महत्वपूर्ण विचारधारा होती है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और जनता का आभार व्यक्त किया और कहा कि संगठन अपनी नीतियों और सिद्धांतों पर अडिग रहेगा।
DMK नेतृत्व का कहना है कि यह समय आत्ममंथन और संगठन को मजबूत करने का है, ताकि भविष्य में और बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकें। पार्टी ने संकेत दिया है कि वह जमीनी स्तर पर अपनी गतिविधियों को और तेज करेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि DMK का यह रुख यह दिखाता है कि पार्टी हार के बावजूद अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रही है और आने वाले चुनावों के लिए तैयारी शुरू कर चुकी है।