द्रविड़ कड़गम के अभियान को अनुमति देने की मांग, थिरुमावलवन ने सरकार से की अपील
चेन्नई। तमिलनाडु में 'नीट' परीक्षा और पिछड़े वर्गों के आरक्षण को लेकर राजनीतिक गतिविधियां एक बार फिर तेज हो गई हैं। विदुथलाई चिरुथैगल काची (वीसीके) के नेता थोल. थिरुमावलवन ने द्रविड़ कड़गम द्वारा प्रस्तावित राज्यव्यापी दोपहिया वाहन अभियान को पुलिस की अनुमति दिए जाने की मांग करते हुए सरकार से हस्तक्षेप करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण जनजागरूकता अभियानों को रोका नहीं जाना चाहिए और संगठनों को अपनी बात जनता तक पहुंचाने का पूरा अधिकार मिलना चाहिए।
थिरुमावलवन ने अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर जारी बयान में कहा कि द्रविड़ कड़गम के अभियान को अनुमति दी जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि द्रविड़ कड़गम की युवा शाखा, छात्र शाखा और महिला शाखा ने 30 जुलाई से 2 अगस्त तक पूरे तमिलनाडु में दोपहिया वाहन अभियान यात्रा आयोजित करने के लिए पुलिस से अनुमति मांगी थी।
उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य केंद्र सरकार से राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) को समाप्त करने तथा पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण व्यवस्था को पूरी तरह सुरक्षित बनाए रखने की मांग को जनता तक पहुंचाना है। उनके अनुसार, यह अभियान लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को सामने रखने का प्रयास है और इसे प्रशासनिक स्तर पर सहयोग मिलना चाहिए।
थिरुमावलवन ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण रैली, यात्रा और जनसंपर्क अभियान नागरिकों तथा सामाजिक संगठनों का संवैधानिक अधिकार है। यदि कोई संगठन कानून-व्यवस्था का पालन करते हुए अपनी बात जनता तक पहुंचाना चाहता है तो उसे आवश्यक अनुमति मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के अभियानों पर अनावश्यक प्रतिबंध लगाने से लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंच सकता है।
वीसीके नेता ने कहा कि 'नीट' परीक्षा का मुद्दा लंबे समय से तमिलनाडु की राजनीति और समाज में चर्चा का विषय रहा है। राज्य के विभिन्न राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन लगातार यह मांग करते रहे हैं कि तमिलनाडु को 'नीट' से छूट दी जाए। उनका कहना है कि यह परीक्षा ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों के लिए समान अवसर सुनिश्चित नहीं कर पाती।
उन्होंने यह भी कहा कि पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण सामाजिक न्याय का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में यदि इस विषय पर जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है तो उसे लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत समर्थन मिलना चाहिए। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि अभियान के आयोजन में किसी प्रकार की प्रशासनिक बाधा न उत्पन्न की जाए।
थिरुमावलवन ने कहा कि द्रविड़ कड़गम की युवा, छात्र और महिला इकाइयों द्वारा प्रस्तावित दोपहिया वाहन यात्रा का उद्देश्य शांतिपूर्ण ढंग से लोगों के बीच जाकर सामाजिक न्याय और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता फैलाना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशासन इस अभियान को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखेगा और आवश्यक अनुमति प्रदान करेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि तमिलनाडु में सामाजिक न्याय, शिक्षा और आरक्षण जैसे मुद्दे लंबे समय से जनता की भावनाओं से जुड़े रहे हैं। इसलिए इन विषयों पर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले संगठनों को सहयोग मिलना चाहिए। उनके अनुसार, विचारों की अभिव्यक्ति और शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक हैं।
फिलहाल पुलिस या राज्य सरकार की ओर से इस संबंध में कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि द्रविड़ कड़गम के प्रस्तावित अभियान को प्रशासन की ओर से अनुमति मिलती है या नहीं। यदि अनुमति दी जाती है, तो 30 जुलाई से 2 अगस्त के बीच राज्यभर में प्रस्तावित दोपहिया वाहन यात्रा के माध्यम से 'नीट' परीक्षा और आरक्षण से जुड़े मुद्दों को व्यापक स्तर पर उठाया जा सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिक्षा और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दे तमिलनाडु की राजनीति में हमेशा महत्वपूर्ण रहे हैं। ऐसे में द्रविड़ कड़गम के इस अभियान और उस पर सरकार के रुख पर राजनीतिक दलों के साथ-साथ आम जनता की भी नजर बनी रहेगी।