Tamil Nadu में तीसरे बच्चे को बढ़ावा देने के लिए इंसेंटिव की मांग

Update: 2026-06-02 04:01 GMT

Tamil Nadu तमिलनाडु: विल्लुपुरम लोकसभा क्षेत्र के सांसद टी. रवि कुमार ने तमिलनाडु सरकार से अपील की है कि राज्य में लोगों को तीसरा बच्चा पैदा करने के लिए प्रोत्साहन देने हेतु इंसेंटिव की घोषणा की जाए। उन्होंने इस संबंध में तमिलनाडु के पब्लिक हेल्थ मिनिस्टर डॉ. के.जी. अरुणराज को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर ध्यान देने का आग्रह किया है।

अपने पत्र में सांसद ने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) 2023-2024 के हालिया आंकड़ों का हवाला दिया और कहा कि तमिलनाडु की जनसंख्या वृद्धि दर में तेज गिरावट चिंता का विषय है। उन्होंने बताया कि देश में जहां कुल प्रजनन दर (Total Fertility Rate) लगभग 2.0 के आसपास है, वहीं तमिलनाडु में यह घटकर 1.7 तक पहुंच गई है। उनके अनुसार यह स्थिति भविष्य में राज्य की जनसंख्या संरचना पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है।

टी. रवि कुमार ने अपने पत्र में यह भी कहा कि यदि यह गिरावट जारी रहती है, तो आने वाले वर्षों में तमिलनाडु में कामकाजी आबादी और कुल जनसंख्या संतुलन पर असर पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि परिवारों को तीसरे बच्चे के लिए प्रोत्साहित करने हेतु आर्थिक और सामाजिक इंसेंटिव पर विचार किया जाए, ताकि जनसंख्या संतुलन बनाए रखा जा सके।

सांसद ने यह भी दावा किया कि राज्य में प्रजनन दर में गिरावट केवल प्राकृतिक कारणों से नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी नीतियों की भी भूमिका है। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं की नसबंदी सर्जरी के उच्च स्तर को इस प्रवृत्ति का एक प्रमुख कारण बताया। उनके अनुसार भारत में तमिलनाडु का नसबंदी दर 56.6 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत की तुलना में अधिक माना जाता है।

NFHS रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, तमिलनाडु लंबे समय से परिवार नियोजन और स्वास्थ्य सेवाओं में आगे रहा है, जिसके कारण यहां जन्म दर में लगातार कमी देखी जा रही है। हालांकि, सांसद ने चिंता जताई कि यदि यह प्रवृत्ति जारी रहती है तो आने वाले दशकों में राज्य की जनसंख्या वृद्धि धीमी हो सकती है, जिसका असर आर्थिक और सामाजिक ढांचे पर भी पड़ सकता है।

इस बीच, स्वास्थ्य विभाग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि प्रजनन दर में गिरावट कई कारणों से होती है, जिनमें शिक्षा, शहरीकरण, रोजगार के अवसर, और महिलाओं की स्वास्थ्य जागरूकता शामिल हैं। विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि परिवार नियोजन नीतियों ने लंबे समय में जनसंख्या नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

हालांकि, सांसद के इस सुझाव को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ सामने आ सकती हैं, क्योंकि जनसंख्या नीति और परिवार नियोजन भारत में संवेदनशील विषय माने जाते हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इंसेंटिव आधारित नीतियाँ जनसंख्या संतुलन पर बहस को और आगे बढ़ा सकती हैं।

सरकार की ओर से फिलहाल इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि स्वास्थ्य विभाग इस विषय से जुड़े आंकड़ों और नीतियों की समीक्षा कर सकता है।

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