शिवकाशी। देशभर से पटाखों के बढ़ते ऑर्डर को पूरा करने के लिए तमिलनाडु के शिवकाशी और आसपास के इलाकों में पटाखा निर्माण इकाइयों ने अपना काम तेज कर दिया है। बड़ी संख्या में यूनिट्स में उत्पादन बढ़ाने की कोशिश की जा रही है, ताकि अलग-अलग राज्यों से मिल रहे ऑर्डर समय पर पूरे किए जा सकें। हालांकि पटाखा निर्माताओं और श्रमिकों का कहना है कि मजदूरों की कमी और सरकारी नियमों के कारण उत्पादन पर असर पड़ा है।
शिवकाशी लंबे समय से देश में पटाखा निर्माण के प्रमुख केंद्रों में शामिल रहा है। यहां तैयार होने वाले पटाखों की आपूर्ति देश के विभिन्न हिस्सों में की जाती है। मांग बढ़ने के साथ स्थानीय निर्माण इकाइयों में गतिविधियां तेज हो गई हैं। निर्माता उपलब्ध संसाधनों और कर्मचारियों के साथ उत्पादन बढ़ाकर ऑर्डर पूरा करने में जुटे हैं।
पटाखा कारोबार से जुड़े लोगों के मुताबिक मांग अच्छी होने के बावजूद उत्पादन को पहले की तरह बढ़ाना आसान नहीं है। उद्योग के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में मजदूरों की उपलब्धता शामिल है। कई इकाइयों को जरूरत के मुताबिक श्रमिक नहीं मिल पा रहे हैं। इसका सीधा असर पटाखों के उत्पादन और ऑर्डर पूरा करने की रफ्तार पर पड़ रहा है।
मैन्युफैक्चरर्स का कहना है कि पटाखा बनाने की प्रक्रिया में कई चरण होते हैं और इनमें प्रशिक्षित तथा अनुभवी श्रमिकों की जरूरत पड़ती है। सुरक्षा से जुड़े नियमों के कारण भी उत्पादन की प्रक्रिया में विशेष सावधानी बरतनी होती है। निर्धारित मानकों के तहत ही कर्मचारियों को अलग-अलग काम सौंपे जाते हैं। ऐसे में श्रमिकों की कमी होने पर उत्पादन क्षमता प्रभावित होती है।
उद्योग से जुड़े लोगों के अनुसार सरकारी नियमों और सुरक्षा संबंधी दिशानिर्देशों का भी उत्पादन व्यवस्था पर असर पड़ा है। पटाखा निर्माण संवेदनशील उद्योग होने के कारण लाइसेंस, सुरक्षा और निर्माण प्रक्रिया से संबंधित नियमों का पालन जरूरी है। निर्माता इन्हीं नियमों के तहत उत्पादन करते हुए बढ़ी हुई मांग को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं।
स्थानीय कारोबारियों का कहना है कि देश के अलग-अलग हिस्सों से ऑर्डर मिलने के कारण शिवकाशी में तैयार माल को समय पर भेजने का दबाव बढ़ जाता है। निर्माण के बाद पैकिंग और फिर विभिन्न राज्यों तक माल पहुंचाने की प्रक्रिया में भी समय लगता है। इसलिए मांग बढ़ने के साथ ही यूनिट्स में काम की रफ्तार भी बढ़ानी पड़ती है।
शिवकाशी और इसके आसपास के इलाकों की अर्थव्यवस्था में पटाखा उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका है। बड़ी संख्या में परिवार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस कारोबार पर निर्भर हैं। निर्माण इकाइयों में काम करने वाले श्रमिकों के अलावा पैकिंग, परिवहन और अन्य संबंधित गतिविधियों से जुड़े लोगों को भी इससे रोजगार मिलता है।
पटाखा फैक्ट्रियों में काम करने वाले कई श्रमिक आसपास के गांवों से आते हैं। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के दूसरे विकल्प सीमित हैं। ऐसे में पटाखा उद्योग उनके परिवारों की आमदनी का प्रमुख जरिया बना हुआ है। कई परिवार लंबे समय से इस कारोबार से जुड़े हैं और अलग-अलग पीढ़ियों के सदस्य पटाखा निर्माण से संबंधित काम करते आए हैं।
श्रमिकों के मुताबिक यह उद्योग केवल बड़े निर्माताओं के कारोबार तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे हजारों परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। फैक्ट्री में नियमित काम मिलने से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को अपने घर के आसपास ही रोजगार मिल जाता है। अगर उत्पादन कम होता है तो इसका असर श्रमिकों की आय पर भी पड़ता है।
यही कारण है कि पटाखा उद्योग में होने वाले बदलावों का प्रभाव शिवकाशी और आसपास के गांवों की स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देता है। उत्पादन बढ़ने पर मजदूरों के लिए काम के अवसर बढ़ते हैं, जबकि निर्माण गतिविधियां धीमी होने पर उनकी आमदनी प्रभावित हो सकती है।
निर्माताओं के सामने एक तरफ देशभर से बढ़ती मांग को पूरा करने की चुनौती है, वहीं दूसरी तरफ सुरक्षा नियमों का पालन करना भी जरूरी है। पटाखा निर्माण में ज्वलनशील सामग्री का इस्तेमाल होने के कारण किसी भी स्तर पर लापरवाही गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। इसलिए उत्पादन बढ़ाने के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखना उद्योग के लिए महत्वपूर्ण है।
फैक्ट्रियों में काम करने वाले श्रमिकों को भी सुरक्षा नियमों का पालन करने की जरूरत होती है। निर्माण के अलग-अलग चरणों में निर्धारित मात्रा में सामग्री का इस्तेमाल, कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन और तैयार उत्पादों के सुरक्षित भंडारण जैसी व्यवस्थाएं महत्वपूर्ण होती हैं।
शिवकाशी के पटाखा उद्योग के सामने श्रमिकों की कमी का मुद्दा लगातार महत्वपूर्ण बना हुआ है। निर्माताओं के मुताबिक ऑर्डर बढ़ने पर अतिरिक्त कर्मचारियों की जरूरत होती है, लेकिन पर्याप्त संख्या में अनुभवी श्रमिक उपलब्ध नहीं होने से उत्पादन बढ़ाने की क्षमता सीमित हो जाती है। इसका असर तैयार माल की मात्रा पर पड़ता है।
इसके बावजूद पटाखा निर्माण इकाइयां देशभर से मिल रहे ऑर्डर को पूरा करने के लिए लगातार काम कर रही हैं। उत्पादन, पैकिंग और माल की आपूर्ति से जुड़े काम तेज किए गए हैं। कारोबारियों को उम्मीद है कि मांग बनी रहने से स्थानीय उद्योग और इससे जुड़े लोगों को आर्थिक लाभ मिलेगा।
शिवकाशी की पहचान दशकों से पटाखा निर्माण केंद्र के रूप में रही है। यहां का कारोबार केवल शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की आजीविका से भी गहराई से जुड़ा है। इसलिए उद्योग में उत्पादन घटने या बढ़ने का असर बड़ी संख्या में परिवारों पर पड़ता है।
स्थानीय श्रमिकों का कहना है कि आसपास के गांवों में वैकल्पिक रोजगार के अवसर बढ़ने चाहिए, लेकिन मौजूदा समय में पटाखा उद्योग ही उनके लिए आय का महत्वपूर्ण साधन है। कई श्रमिक इसी काम से होने वाली कमाई से अपने परिवार का खर्च चलाते हैं।
फिलहाल देश के विभिन्न हिस्सों से बढ़े ऑर्डर के बीच शिवकाशी की पटाखा इकाइयों में गतिविधियां तेज हैं। निर्माता श्रमिकों की कमी और नियमों से जुड़ी चुनौतियों के बीच उत्पादन बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं हजारों स्थानीय परिवारों के लिए यह उद्योग आज भी रोजगार और आय का महत्वपूर्ण आधार बना हुआ है।