चेन्नई। तमिलनाडु के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के भोजन के मेन्यू में आने वाले समय में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की सरकार सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को सप्ताह में एक बार चिकन बिरयानी देने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। हालांकि सरकार ने अभी इसे पूरे राज्य में लागू करने का अंतिम फैसला नहीं किया है। पहले पायलट प्रोजेक्ट के जरिए स्वच्छता, खाद्य सुरक्षा और बड़े पैमाने पर भोजन तैयार करने एवं स्कूलों तक पहुंचाने की व्यवस्था को परखा जाएगा।स्कूल शिक्षा मंत्री ए. राजमोहन ने इस योजना को लेकर कहा है कि मुख्यमंत्री विजय चाहते हैं कि विद्यार्थियों को बेहतर और विविध भोजन मिले। मंत्री के मुताबिक मांसाहारी विकल्प उपलब्ध कराने के लिए पहले व्यावहारिक व्यवस्थाओं को समझना होगा। पायलट प्रोजेक्ट सफल होने के बाद ही इसे व्यापक स्तर पर लागू करने पर फैसला लिया जाएगा।
हफ्ते में एक दिन चिकन बिरयानी का प्रस्ताव
सरकार जिस प्रस्ताव पर विचार कर रही है, उसके मुताबिक सरकारी स्कूलों में दोपहर के भोजन के तहत सप्ताह में एक दिन चिकन बिरयानी उपलब्ध कराई जा सकती है। यह प्रस्ताव पहली बार जुलाई 2026 में प्रमुखता से सामने आया था।उस समय स्कूल शिक्षा मंत्री राजमोहन ने बताया था कि उन्होंने मुख्यमंत्री के सामने सप्ताह में एक बार चिकन बिरयानी उपलब्ध कराने का सुझाव रखा है। मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव पर विचार करने की बात कही थी। शिक्षक संगठनों के साथ हुई बैठक में भी स्कूलों में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता सुधारने और मेन्यू में बदलाव की मांग उठी थी।अब सरकार ने एक बार फिर इस दिशा में आगे बढ़ने के संकेत दिए हैं, लेकिन अधिकारियों का जोर इस बात पर है कि भोजन की गुणवत्ता और सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाए।
पहले पायलट प्रोजेक्ट से होगी जांच
तमिलनाडु सरकार पूरे राज्य में एक साथ चिकन बिरयानी उपलब्ध कराने के बजाय पहले पायलट प्रोजेक्ट चलाने की तैयारी कर रही है। इसके जरिए यह देखा जाएगा कि बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के लिए मांसाहारी भोजन सुरक्षित तरीके से कैसे तैयार किया जा सकता है।चिकन जैसे खाद्य पदार्थ के मामले में स्टोरेज, तापमान, साफ-सफाई, पकाने की प्रक्रिया और वितरण महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए सरकार इन सभी पहलुओं की जांच करना चाहती है।स्कूल शिक्षा मंत्री के मुताबिक योजना को तुरंत लागू नहीं किया जा सकता। पहले इसकी टेस्टिंग और स्वच्छता से संबंधित मानकों को सुनिश्चित करना होगा। उसके बाद ही बड़े स्तर पर इसे लागू करने पर निर्णय लिया जाएगा।
मंत्री बोले- जेल में बिरयानी मिल सकती है तो बच्चों को क्यों नहीं
स्कूल शिक्षा मंत्री राजमोहन ने प्रस्ताव का समर्थन करते हुए पुझल जेल का उदाहरण भी दिया। उन्होंने सवाल किया कि जब जेल में कैदियों को चिकन बिरयानी उपलब्ध कराई जा सकती है तो स्कूलों में बच्चों को क्यों नहीं दी जा सकती।हालांकि उन्होंने साथ ही स्पष्ट किया कि बच्चों को ऐसा भोजन उपलब्ध कराने से पहले स्वच्छता और सुरक्षा के सभी जरूरी मानकों को पूरा करना होगा।मंत्री का कहना है कि स्कूलों में भोजन केवल पेट भरने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसमें पोषण और स्वाद का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
शाकाहारी बच्चों के लिए रहेगा विकल्प
प्रस्ताव में यह भी महत्वपूर्ण है कि चिकन बिरयानी सभी विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य नहीं होगी। सरकार यदि योजना लागू करती है तो मांसाहारी भोजन नहीं खाने वाले विद्यार्थियों के लिए शाकाहारी विकल्प जारी रखने की बात सामने आई है।इस तरह सरकार विद्यार्थियों और उनके परिवारों की खान-पान संबंधी पसंद को ध्यान में रखते हुए मेन्यू तैयार करने पर विचार कर रही है।
जुलाई से चल रही है चर्चा
चिकन बिरयानी को स्कूल भोजन में शामिल करने का प्रस्ताव अचानक सामने नहीं आया है। जुलाई के आखिर में शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में स्कूल भोजन की गुणवत्ता सुधारने सहित कई मांगें रखी गई थीं।इस बैठक में 80 से अधिक शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। स्कूलों में उपलब्ध कराए जाने वाले चावल की गुणवत्ता सुधारने और सप्ताह में एक बार चिकन बिरयानी देने की मांग भी सामने आई थी।शिक्षा मंत्री ने तब बताया था कि प्रस्ताव मुख्यमंत्री के पास विचाराधीन है। चूंकि दोपहर के भोजन की योजना में सामाजिक कल्याण एवं महिला सशक्तिकरण विभाग की भी भूमिका है, इसलिए अंतिम निर्णय में संबंधित विभागों के बीच समन्वय जरूरी होगा।
स्कूल भोजन व्यवस्था का बड़ा दायरा
तमिलनाडु में सरकारी स्कूलों की भोजन योजना का दायरा काफी बड़ा है। जुलाई की रिपोर्ट के अनुसार राज्य की दोपहर भोजन योजना कक्षा 10 तक लागू थी और करीब 40 लाख विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलता था। शिक्षक संगठनों ने इसे कक्षा 11 और 12 तक बढ़ाने की मांग भी की थी।इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के लिए सप्ताह में एक दिन चिकन बिरयानी जैसी व्यवस्था लागू करना आसान नहीं होगा। इसके लिए खाद्य सामग्री की खरीद, गुणवत्ता नियंत्रण, परिवहन, रसोई व्यवस्था और भोजन वितरण का मजबूत सिस्टम जरूरी होगा।यही वजह है कि सरकार पहले सीमित स्तर पर योजना की व्यवहारिकता जांचना चाहती है।
नाश्ता योजना का भी हो रहा विस्तार
तमिलनाडु सरकार सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में नाश्ता योजना का विस्तार भी कर रही है। सितंबर में सामने आई जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री विजय 22 सितंबर को कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए विस्तारित नाश्ता योजना शुरू करने वाले हैं।इस विस्तार से करीब 15.30 लाख अतिरिक्त विद्यार्थियों को लाभ मिलने की बात कही गई है। चालू वित्त वर्ष में इसके लिए 217.63 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि आवंटित की गई है और कार्यक्रम का कुल बजट 724 करोड़ रुपये बताया गया है।नाश्ते के मौजूदा मेन्यू में उपमा, खिचड़ी और पोंगल जैसे व्यंजन शामिल हैं। सप्ताह में दो बार मिलेट आधारित भोजन को भी मेन्यू में जगह दी गई है।
पोषण के साथ उपस्थिति पर भी नजर
स्कूली भोजन योजनाओं का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को भोजन उपलब्ध कराना नहीं होता। इन्हें बच्चों के पोषण, स्कूल में उपस्थिति और पढ़ाई से जुड़े परिणामों को बेहतर करने के व्यापक प्रयासों से भी जोड़ा जाता है।तमिलनाडु सरकार की विस्तारित नाश्ता योजना के आधिकारिक उद्देश्य में स्वास्थ्य, पोषण, स्कूल उपस्थिति और सीखने की प्रक्रिया को मजबूत करने की बात कही गई है।इसी पृष्ठभूमि में दोपहर के भोजन में विविधता बढ़ाने के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है।
खाद्य सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती
चिकन बिरयानी उपलब्ध कराने की योजना में सबसे महत्वपूर्ण चुनौती खाद्य सुरक्षा की होगी। सामान्य भोजन की तुलना में मांसाहारी खाद्य पदार्थों के भंडारण और वितरण में अतिरिक्त सावधानी की आवश्यकता होती है।खासकर गर्म मौसम में कच्चे चिकन की खरीद से लेकर उसे सुरक्षित रखने, पकाने और निर्धारित समय के भीतर विद्यार्थियों तक पहुंचाने के लिए व्यवस्थित सप्लाई चेन की जरूरत होगी।यही वजह है कि मंत्री ने पायलट प्रोजेक्ट और कड़े स्वच्छता मानकों पर जोर दिया है।पायलट के दौरान यदि कोई कमी सामने आती है तो व्यापक स्तर पर योजना लागू करने से पहले उसे दूर किया जा सकेगा।
हर स्कूल तक कैसे पहुंचेगा खाना?
तमिलनाडु में शहरी क्षेत्रों के साथ दूरदराज और ग्रामीण इलाकों में भी सरकारी स्कूल हैं। ऐसे में पूरे राज्य में एक समान गुणवत्ता के साथ मांसाहारी भोजन उपलब्ध कराना प्रशासनिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।सरकार को यह तय करना होगा कि भोजन स्कूलों की मौजूदा रसोई में तैयार होगा या कुछ क्षेत्रों में केंद्रीय अथवा एकीकृत रसोई का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके साथ खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की जांच और नियमित निगरानी की व्यवस्था भी जरूरी होगी।फिलहाल इन सभी व्यवस्थाओं का विस्तृत अंतिम मॉडल सार्वजनिक नहीं किया गया है।
अभी प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी नहीं
इस खबर में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि सरकारी स्कूलों में चिकन बिरयानी देना अभी पूरे राज्य में लागू हो चुकी योजना नहीं है। सरकार प्रस्ताव पर आगे बढ़ रही है और पायलट प्रोजेक्ट की बात कही गई है, लेकिन व्यापक क्रियान्वयन खाद्य सुरक्षा और लॉजिस्टिक व्यवस्था के परीक्षण के बाद ही होगा।इसलिए यह कहना कि सभी सरकारी स्कूलों में बच्चों को अभी से हर सप्ताह चिकन बिरयानी मिलने लगी है, सही नहीं होगा।फिलहाल तमिलनाडु सरकार का फोकस स्कूल भोजन में विविधता बढ़ाने, बच्चों के पोषण में सुधार और व्यवस्था को सुरक्षित तरीके से लागू करने की संभावनाओं पर है। पायलट प्रोजेक्ट के नतीजे तय करेंगे कि सप्ताह में एक बार चिकन बिरयानी देने का प्रस्ताव पूरे राज्य के सरकारी स्कूलों तक किस रूप में पहुंचता है।
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