यूपी चुनाव से पहले SP-कांग्रेस में सीटों पर खींचतान, अखिलेश के बयान का DMK ने किया समर्थन
चेन्नई : उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन की तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं हुई है। दोनों दलों के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर चर्चाओं के बीच समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सीटों की संख्या से ज्यादा गठबंधन की जीत को प्राथमिकता देने की बात कही है। उनके इस रुख का द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के प्रवक्ता टी.के.एस. एलंगोवन ने समर्थन किया है।
अखिलेश यादव ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए गठबंधन की एकजुटता पर जोर दिया था। उन्होंने कहा कि गठबंधन में कितनी सीटें हैं या कौन-सी सीट किस दल के हिस्से में जाती है, इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि गठबंधन की जीत सुनिश्चित हो। यादव ने लोकतंत्र, संविधान और आरक्षण की रक्षा के लिए सभी दलों को एकजुट होकर काम करने की बात भी कही।
सीट बंटवारे के बीच अखिलेश का संदेश
अखिलेश यादव का यह बयान ऐसे समय आया है, जब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर SP और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर मतभेद की खबरें सामने आ रही हैं। रिपोर्टों के अनुसार, कांग्रेस उत्तर प्रदेश में ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने की इच्छा जता रही है, जबकि समाजवादी पार्टी अपने मजबूत संगठन और पिछले चुनावी प्रदर्शन को देखते हुए सीट बंटवारे में अपनी स्थिति बनाए रखना चाहती है।
इसी पृष्ठभूमि में अखिलेश यादव ने सार्वजनिक तौर पर सीटों की चर्चा से ऊपर गठबंधन की जीत को रखने का संदेश दिया। उनका कहना था कि जब लक्ष्य स्पष्ट हो तो सभी दल मिलकर आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि गठबंधन के घटकों की अलग-अलग जीत के बजाय सामूहिक जीत को लक्ष्य बनाया जाना चाहिए।
DMK प्रवक्ता ने किया समर्थन
DMK प्रवक्ता टी.के.एस. एलंगोवन ने सोमवार को अखिलेश यादव के रुख का समर्थन करते हुए गठबंधन की एकजुटता को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि सीटों का बंटवारा अंतिम लक्ष्य नहीं होना चाहिए। उनका जोर इस बात पर रहा कि BJP का मुकाबला करने के लिए विपक्षी दलों को एकजुट रहना जरूरी है।
एलंगोवन का बयान ऐसे समय में आया है, जब विपक्षी खेमे में अलग-अलग दलों के बीच समन्वय और भविष्य की चुनावी रणनीति को लेकर चर्चा चल रही है। इससे पहले भी वह विपक्षी दलों की वैचारिक एकजुटता और BJP के खिलाफ साझा रुख की बात कर चुके हैं।
SP-कांग्रेस के बीच सीटों को लेकर चर्चा
उत्तर प्रदेश में विधानसभा की कुल 403 सीटें हैं। आगामी 2027 के चुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर अभी अंतिम समझौता सामने नहीं आया है। रिपोर्टों में कांग्रेस की ओर से ज्यादा सीटों की मांग और SP की ओर से अपने हिस्से को लेकर अलग रुख की बात कही गई है।
कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने पार्टी की ओर से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है। वहीं समाजवादी पार्टी का रुख यह रहा है कि जिन सीटों पर कांग्रेस के पास मजबूत उम्मीदवार और संगठनात्मक आधार है, उन्हें बातचीत में ध्यान में रखा जाए। दोनों दलों के बीच यही मुद्दा सीट शेयरिंग की चर्चा का अहम हिस्सा बना हुआ है।
2024 में साथ लड़े थे लोकसभा चुनाव
SP और कांग्रेस ने 2024 का लोकसभा चुनाव उत्तर प्रदेश में गठबंधन के तहत लड़ा था। उस चुनाव में समाजवादी पार्टी ने राज्य की 37 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस ने छह सीटें जीती थीं। BJP को 33 सीटों पर जीत मिली थी।
इन नतीजों के बाद उत्तर प्रदेश में SP और कांग्रेस के बीच गठबंधन की भूमिका को लेकर चर्चा बनी रही। अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दलों के सामने सीट बंटवारे के साथ-साथ संयुक्त रणनीति तैयार करने की चुनौती है।
लोकतंत्र और संविधान का मुद्दा भी उठाया
अखिलेश यादव ने अपने बयान में केवल चुनावी जीत की बात नहीं की, बल्कि लोकतंत्र, संविधान और आरक्षण की रक्षा को भी गठबंधन के साझा उद्देश्य से जोड़ा। उन्होंने कहा कि सभी दलों को एक साथ मिलकर ऐसे मुद्दों पर काम करना चाहिए।
उनके मुताबिक, गठबंधन की सफलता केवल किसी एक राजनीतिक दल की सफलता नहीं होगी, बल्कि सभी सहयोगी दलों के सामूहिक प्रयास का परिणाम होगी। उन्होंने सामाजिक सौहार्द, विकास और खुशहाली को भी अपने संदेश का हिस्सा बनाया।
आगे की बातचीत पर नजर
फिलहाल उत्तर प्रदेश में SP और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है। दोनों दलों के बीच बातचीत और राजनीतिक गतिविधियों के आगे बढ़ने के साथ सीटों का फॉर्मूला सामने आने की उम्मीद है।
अखिलेश यादव के ताजा बयान को गठबंधन के भीतर सार्वजनिक मतभेदों को कम करने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है। उन्होंने सीटों की संख्या के बजाय साझा लक्ष्य पर ध्यान देने का संदेश दिया है। वहीं कांग्रेस की ओर से भी गठबंधन में सम्मानजनक हिस्सेदारी की मांग सामने आई है।
ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सबसे अहम सवाल यही रहेगा कि दोनों दल अपने-अपने राजनीतिक हितों और सीटों की मांग के बीच किस तरह संतुलन बनाते हैं। अखिलेश यादव का संदेश स्पष्ट रूप से गठबंधन की एकजुटता को प्राथमिकता देने का है, जबकि सीट बंटवारे पर अंतिम सहमति अभी बाकी है। आने वाले समय में दोनों दलों के बीच होने वाली बातचीत से यह साफ होगा कि उत्तर प्रदेश में गठबंधन किस स्वरूप में चुनाव मैदान में उतरता है।