मेट्टूर (सलेम): तमिलनाडु के सलेम जिले के मेट्टूर में बुधवार, 12 अगस्त को आदि अमावस्या के अवसर पर कावेरी नदी के तटों पर आस्था और श्रद्धा का सैलाब देखने को मिला। बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि देने और धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए कावेरी नदी के किनारे पहुंचे। लोगों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर अपने पितरों को भेंट अर्पित की और परिवार की सुख-समृद्धि तथा खुशहाली के लिए प्रार्थना की।

हिंदू धार्मिक परंपराओं में आदि अमावस्या का विशेष महत्व माना जाता है। तमिल कैलेंडर के ‘आदि’ महीने में पड़ने वाली अमावस्या के दिन लोग अपने दिवंगत पूर्वजों का स्मरण करते हैं और उनके लिए तर्पण, पूजा तथा अन्य धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस दिन पवित्र नदी के तट पर पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक भेंट अर्पित करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख-शांति एवं समृद्धि बनी रहती है।

आदि अमावस्या को लेकर सुबह से ही मेट्टूर और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई थी। कावेरी नदी के प्रमुख घाटों और तटवर्ती इलाकों में बड़ी संख्या में लोग अपने परिवारों के साथ पहुंचे। कई परिवार समूहों में और टेम्पो सहित अन्य वाहनों से मेट्टूर पहुंचे। नदी किनारे पहुंचने के बाद परिवारों ने पुजारियों की सहायता से अपने पूर्वजों के लिए निर्धारित धार्मिक अनुष्ठान पूरे किए।

मेट्टूर के कावेरी ब्रिज, मट्टम, पुडुपालम और अनिकुट्टू मुनियाप्पन मंदिर के आसपास के इलाकों में विशेष रूप से भीड़ दिखाई दी। सुबह से ही इन क्षेत्रों में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती गई। परिवारों ने नदी के किनारे पूजा की और अपने पूर्वजों के नाम पर विभिन्न प्रकार की धार्मिक भेंट अर्पित की। कई लोगों ने नदी में स्नान करने के बाद पूजा-अर्चना शुरू की और अपने परिवार के दिवंगत सदस्यों को याद करते हुए उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

मेट्टूर के अलावा कूनंदियूर और थिप्पमपट्टी क्षेत्रों में भी आदि अमावस्या के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु कावेरी नदी के किनारे पहुंचे। यहां भी परिवारों ने अपने पूर्वजों के लिए तर्पण और पूजा की। स्थानीय पुजारियों ने श्रद्धालुओं को धार्मिक अनुष्ठान कराने में सहायता की। कई परिवारों ने सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना कर अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की।

श्रद्धालुओं का कहना है कि आदि अमावस्या केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि परिवार की पिछली पीढ़ियों को याद करने और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी है। इस दिन परिवार के सदस्य एक साथ एकत्र होकर अपने पूर्वजों का स्मरण करते हैं। उनका विश्वास है कि पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद करने और उन्हें भेंट अर्पित करने से परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है।

कावेरी नदी के किनारे धार्मिक गतिविधियों के कारण बुधवार को मेट्टूर के विभिन्न हिस्सों में काफी चहल-पहल रही। दूर-दराज के गांवों और आसपास के क्षेत्रों से भी लोग यहां पहुंचे। कई परिवार सुबह जल्दी घर से निकलकर नदी तट पर पहुंचे, ताकि धार्मिक अनुष्ठान समय पर पूरे किए जा सकें। परिवारों के साथ बुजुर्गों और बच्चों की मौजूदगी भी देखी गई।

आदि अमावस्या के मौके पर नदी किनारे उमड़ी भीड़ ने मेट्टूर की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा की झलक भी दिखाई। पीढ़ियों से चली आ रही मान्यताओं के अनुसार, लोग इस दिन अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हैं और उनके आशीर्वाद की कामना करते हैं। इसी आस्था के चलते हर साल आदि अमावस्या पर कावेरी नदी के विभिन्न तटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है।

बुधवार को भी मेट्टूर में यही परंपरा देखने को मिली। कावेरी के तट पर पूजा-अर्चना, तर्पण और भेंट अर्पित करने के लिए जुटे परिवारों ने अपने पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद किया। लोगों ने परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

इस तरह आदि अमावस्या के अवसर पर मेट्टूर में कावेरी नदी का तट दिनभर धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र बना रहा। कावेरी ब्रिज से लेकर मट्टम, पुडुपालम, अनिकुट्टू मुनियाप्पन मंदिर, कूनंदियूर और थिप्पमपट्टी तक श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने पर्व के महत्व को दर्शाया। अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और आस्था के साथ लोगों ने धार्मिक अनुष्ठान पूरे किए और परिवार की खुशहाली के लिए आशीर्वाद मांगा।

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