मदुरै: मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै खंडपीठ ने माना है कि विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) पंजीकरण स्थिति एक विशेषाधिकार है और अधिकार नहीं है, और धर्मांतरण में लगे धार्मिक संगठनों को उस पंजीकरण से वंचित किया जाना चाहिए।

जस्टिस जीआर स्वामीनाथन और एमडी सुमति की पीठ ने कहा, केवल वे संगठन जिनकी गतिविधियां देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने और सामाजिक सौहार्द को प्रभावित नहीं करेंगी, एफसीआरए पंजीकरण के हकदार हैं।

एचसी ने एक धार्मिक संगठन के रूप में अपनी प्रकृति की सही पहचान नहीं करने के कारण पिछले साल एफसीआरए पंजीकरण से इनकार करने के खिलाफ कंजियन पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा दायर अपील को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। हालाँकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि वह ट्रस्ट पर कोई धर्मांतरण एजेंडा चलाने का आरोप नहीं लगा रही है।

न्यायाधीशों ने बताया कि यदि एक धार्मिक समूह का प्रभुत्व बढ़ जाता है तो विदेशी योगदान सामाजिक व्यवस्था को कैसे अस्थिर कर सकता है। उन्होंने केरल में ईसाइयों और मुसलमानों के बीच हालिया टकराव का जिक्र किया और कहा, “अगर धर्मांतरण गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए विदेशी धन को अनुमति दी गई, तो देश की संप्रभुता खतरे में पड़ जाएगी।

 

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