दार्जिलिंग: पश्चिम बंगाल के पहाड़ी क्षेत्र दार्जिलिंग में अलग गोरखालैंड राज्य की मांग को लेकर 'गोरखालैंड संकल्प रैली' आयोजित की गई। 9 अगस्त को हुई इस रैली के जरिए गोरखा समुदाय से जुड़े संगठनों और समर्थकों ने अलग राज्य की मांग को फिर मजबूती से उठाया।

रैली को लेकर दार्जिलिंग में राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियां तेज रहीं। आयोजकों ने इसे गोरखालैंड की मांग के लिए जनभावना और संकल्प को प्रदर्शित करने वाला कार्यक्रम बताया।
अलग गोरखालैंड राज्य की मांग
गोरखालैंड की मांग दार्जिलिंग और आसपास के पहाड़ी इलाकों की राजनीति का लंबे समय से अहम मुद्दा रही है। समर्थकों की मांग है कि गोरखा बहुल पहाड़ी क्षेत्र को पश्चिम बंगाल से अलग कर एक स्वतंत्र राज्य का दर्जा दिया जाए। 'गोरखालैंड संकल्प रैली' के जरिए इसी मांग को राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर फिर चर्चा में लाने की कोशिश की गई।
दार्जिलिंग में जुटे समर्थक
रैली के लिए दार्जिलिंग में बड़ी संख्या में समर्थकों के जुटने की अपील की गई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार मार्च दार्जिलिंग रेलवे स्टेशन से चौरास्ता तक निकाला गया। रैली के दौरान गोरखालैंड के समर्थन में नारे लगाए गए और अलग राज्य की मांग को लेकर लोगों ने अपनी आवाज बुलंद की।
नई राजनीतिक हलचल के बीच रैली
दार्जिलिंग की राजनीति में नए राजनीतिक संगठन और क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर गतिविधियां बढ़ रही हैं। ऐसे माहौल में गोरखालैंड की मांग पर आयोजित यह रैली पहाड़ी राजनीति के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आयोजकों की कोशिश है कि अलग राज्य की मांग को केवल राजनीतिक मुद्दा न रखते हुए व्यापक जनसमर्थन के साथ आगे बढ़ाया जाए।
युवाओं की भागीदारी पर जोर
रैली से जुड़े प्रचार में युवा वर्ग, खासकर नई पीढ़ी की भागीदारी पर भी जोर दिया गया। सोशल मीडिया पर युवाओं और Gen-Z से रैली में शामिल होने की अपील की गई थी। इससे संकेत मिलता है कि गोरखालैंड आंदोलन से जुड़े संगठन अब युवा पीढ़ी को भी इस मुद्दे से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
गोरखालैंड आंदोलन का पुराना इतिहास
गोरखालैंड की मांग कोई नई नहीं है। दार्जिलिंग और आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों में अलग प्रशासनिक पहचान और बाद में अलग राज्य की मांग को लेकर कई दशकों से आंदोलन होते रहे हैं। समय-समय पर इस मांग ने आंदोलन और राजनीतिक संघर्ष का रूप लिया है। अब 'गोरखालैंड संकल्प रैली' के जरिए इसे एक बार फिर सार्वजनिक विमर्श के केंद्र में लाने का प्रयास हुआ है।
आगे क्या होगी रणनीति?
रैली के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि गोरखालैंड समर्थक संगठन अपनी मांग को आगे किस रणनीति के साथ बढ़ाएंगे। क्या आंदोलन को व्यापक राजनीतिक समर्थन मिलेगा और केंद्र व राज्य सरकार इस मांग पर किस तरह प्रतिक्रिया देती हैं, यह आने वाले समय में महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल दार्जिलिंग में हुई रैली ने अलग गोरखालैंड राज्य की मांग को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।
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