सिक्किम: 2022 में उत्तराखंड के एक रिसॉर्ट में हुई अंकिता भंडारी (19 वर्ष) की हत्या के मामले में, उसके माता-पिता ने 14 अक्टूबर को इंडिया गेट के पास विरोध प्रदर्शन किया। उनकी मांग है कि जब तक इस मामले की CBI जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक सिक्किम के राज्यपाल के रूप में दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति पर रोक लगाई जाए।
भाजपा के वरिष्ठ नेता दुष्यंत गौतम को 12 अक्टूबर को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। अंकिता के परिवार और कार्यकर्ताओं का आरोप है कि इस मामले से जुड़ा 'VIP' व्यक्ति वही है। हालांकि, उनके खिलाफ लगाए गए आरोप अभी साबित नहीं हुए हैं। गौतम ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है और आरोप लगाने वालों के खिलाफ मानहानि की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
आज हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान, इंडिया गेट के पास फुटपाथ पर बैठी अंकिता की मां भावुक हो गईं और मांग की कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक गौतम को राज्यपाल का पद नहीं संभालना चाहिए।
उन्होंने कहा, "जब तक CBI जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक दुष्यंत गौतम को राज्यपाल नियुक्त नहीं किया जाना चाहिए।"
अंकिता के पिता ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी की हत्या में एक 'VIP' की अहम भूमिका थी और उनका दावा है कि वह व्यक्ति गौतम ही हैं। उन्होंने केंद्र सरकार और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से अपील की है कि जब तक इस 'VIP' एंगल की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस नियुक्ति पर पुनर्विचार किया जाए।
उन्होंने कहा, "हमने सुना है कि मेरी बेटी की हत्या में उस 'VIP' की बड़ी भूमिका थी। अब केंद्र और उत्तराखंड सरकार ने गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त कर दिया है।"
उन्होंने आगे कहा, "हम सरकार और भारत के राष्ट्रपति से विनम्र अनुरोध करते हैं कि जब तक इस मामले की CBI जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक उन्हें सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त न किया जाए।"
परिवार ने बताया कि उन्होंने अपनी चिंताएं राष्ट्रपति मुर्मू के सामने रखने के लिए उनसे मिलने का समय मांगा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांग पूरी नहीं हुई, तो वे देहरादून में सचिवालय स्थित उत्तराखंड के मुख्यमंत्री कार्यालय के बाहर भूख हड़ताल करेंगे।
क्या है अंकिता भंडारी हत्याकांड?
ऋषिकेश के वनंत्रा रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करने वाली अंकिता की 18 सितंबर 2022 को हत्या कर दी गई थी। चार दिन बाद उसका शव चिल्ला नहर से बरामद किया गया था। इस मामले में रिसॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य (जो पूर्व भाजपा नेता विनोद आर्य के बेटे हैं) और उनके दो साथियों को दोषी ठहराया गया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
इस मामले ने भारी जन आक्रोश और राजनीतिक विवाद को जन्म दिया, क्योंकि ऐसे आरोप लगे थे कि इस अपराध से कोई अज्ञात VIP जुड़ा हुआ है। अंकिता के परिवार और कार्यकर्ताओं ने इस कथित VIP एंगल की गहन जांच की मांग की है, और इन आरोपों के सिलसिले में गौतम का नाम भी सामने आया है।
गौतम ने इन आरोपों से इनकार किया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, न तो जांच में और न ही अदालत के किसी फैसले में ये आरोप साबित हुए हैं।
कांग्रेस ने गौतम की नियुक्ति पर सवाल उठाए
उत्तराखंड कांग्रेस ने सिक्किम के राज्यपाल के रूप में गौतम की नियुक्ति का विरोध किया है। पार्टी का आरोप है कि अंकिता भंडारी मामले में उनका नाम सामने आया था, और उनका दावा है कि यह नियुक्ति उन्हें बचाने के लिए की गई है।
कांग्रेस का यह भी तर्क है कि पद पर रहते हुए किसी राज्यपाल के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही नहीं चलाई जा सकती।
भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव रहे गौतम, उत्तराखंड में पार्टी के प्रभारी भी रह चुके हैं।
उनकी नियुक्ति को रोकने की मांग ने इस मामले से जुड़े उस कथित VIP एंगल की ओर फिर से ध्यान खींचा है, जो अभी तक अनसुलझा है। यह स्थिति तब है जब अंकिता की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए तीनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है।
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