जयपुर। कांग्रेस की सियासत, सत्ता और संगठन में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व पूर्व डिप्टी चीफ मिनिस्ट सचिन पायलट के बीच तल्खी जारी है। एक बार फिर कयास का दौर शुरू हुआ है। इसमें कहा जा रहा है कि शुक्रवार को दिल्ली में होने वाली कांग्रेस की बैठक में आलाकमान सचिन पायलट पर नरम रुख अपना सकता है। दरअसल राजस्थान कांग्रेस प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बयानों का मूल्यांकन के आधार पर यह कयास लगाए जा रहे हैं।

हालांकि पायलट ने राज्य सरकार को उनकी तीन मांगें पूरी करने के लिए 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया है। ये मांगें हैं : राजस्थान लोक सेवा आयोग को भंग कर उसका पुनर्गठन करना, पेपर लीक के कारण आर्थिक रूप से पीड़ित लाखों छात्रों को मुआवजा देना और वसुंधरा राजे के नेतृत्व वाली पिछली भाजपा सरकार के दौरान हुए कथित भ्रष्टाचार के मामलों की उच्चस्तरीय जांच कराना। उनका 15 दिन का अल्टीमेटम मई के अंत तक का है। गहलोत सरकार फिलहाल इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुई है।

रंधावा ने गुरुवार को चुनावी साल में कांग्रेस में अंदरूनी कलह को खत्म करने की बात कही। उन्होंने कहा, "जिस पार्टी में एक्शन होगा, वहां लड़ाई-झगड़े होंगे। वह पार्टी या घर ही क्या, जहां कुछ नहीं होता।" जयपुर सर्किट हाउस में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, "हम लड़ाई को नियंत्रित करेंगे।"

चुनावी रणनीति तय करने के लिए दिल्ली में शुक्रवार को होने वाली कांग्रेस की बैठक में सचिन पायलट के शामिल होने के सवाल पर रंधावा ने कहा, "क्या आपको इसमें कोई शक है? क्या ये कांग्रेस पार्टी के नेता नहीं हैं? कल की बैठक में आपको इसका जवाब मिल जाएगा।"

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