शहीद का दर्जा देने की मांग पर हंगामा, पुलिस ने बलपूर्वक कराया अंतिम संस्कार
CRPF सब इंस्पेक्टर की मौत पर बवाल
जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर के ग्रामीण क्षेत्र में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के सब इंस्पेक्टर सुधीर स्वामी के अंतिम संस्कार को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। मिजोरम में ड्यूटी के दौरान गोली लगने से उनकी मौत के बाद परिजन और ग्रामीण उन्हें शहीद का दर्जा देने की मांग पर अड़ गए। करीब 15 घंटे तक चले धरना-प्रदर्शन के बाद शनिवार को पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए बल प्रयोग किया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। इसके बाद पुलिस और सीआरपीएफ जवानों की मौजूदगी में सुधीर स्वामी का अंतिम संस्कार कराया गया।
30 वर्षीय सुधीर स्वामी मिजोरम की राजधानी आइजोल स्थित राजभवन की सुरक्षा में तैनात थे। पांच नवंबर की रात करीब दस बजे उनके केबिन से गोली चलने की आवाज सुनाई दी। मौके पर पहुंचे अन्य जवानों ने उन्हें गंभीर हालत में पाया। शुरुआती जानकारी में सर्विस राइफल से गोली लगने की बात सामने आई है। हालांकि, गोली चलने की वास्तविक परिस्थितियों और मौत के कारणों की आधिकारिक जांच जारी है।
शुक्रवार रात सुधीर स्वामी का पार्थिव शरीर जयपुर जिले के रेनवाल क्षेत्र स्थित उनके पैतृक गांव मूंडियागढ़ (चारणवास) लाया गया। पार्थिव शरीर पहुंचने के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने शहीद का दर्जा देने की मांग शुरू कर दी। ग्रामीणों का कहना था कि सुधीर स्वामी की मौत ड्यूटी के दौरान हुई है, इसलिए उन्हें शहीद का दर्जा और परिवार को निर्धारित सुविधाएं मिलनी चाहिए।
इसी मांग को लेकर परिजन और ग्रामीण रेनवाल थाने के बाहर धरने पर बैठ गए। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं और स्थानीय लोग भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने अंतिम संस्कार से पहले अपनी मांगों पर प्रशासन से स्पष्ट निर्णय लेने की बात कही। इसके चलते शुक्रवार रात से शनिवार तक तनाव की स्थिति बनी रही। परिजनों और ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने सात सूत्रीय मांगें रखीं। इनमें सुधीर स्वामी को शहीद का दर्जा देने, परिवार के एक सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति देने और उचित मुआवजा उपलब्ध कराने जैसी मांगें शामिल थीं। इस संबंध में जिला कलेक्टर, मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार के नाम ज्ञापन भी सौंपा गया।
धरने के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच कई दौर की बातचीत हुई। उपखंड अधिकारी सर्वेश शर्मा और तहसीलदार गंगाबिशन गुर्जर ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया। अधिकारियों ने बताया कि मौजूदा परिस्थितियों और निर्धारित नियमों के आधार पर शहीद का दर्जा तथा अनुकंपा नियुक्ति देने का निर्णय तत्काल संभव नहीं है। हालांकि, प्रशासन ने अन्य मांगों को राज्य और केंद्र सरकार तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।
बातचीत के बावजूद सहमति नहीं बनने पर शनिवार को पुलिस ने धरनास्थल खाली कराने की कार्रवाई शुरू की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के बीच धक्का-मुक्की और झड़प की स्थिति बन गई। पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए बल प्रयोग किया। प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किए जाने की भी खबर सामने आई है। इस कार्रवाई के दौरान कुछ महिलाएं पार्थिव शरीर ले जा रहे वाहन के सामने बैठ गईं। उनका कहना था कि जब तक परिवार की मांगों पर सहमति नहीं बनती, तब तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाना चाहिए। पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को हटाए जाने के बाद पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया।
इसके बाद सुधीर स्वामी का उनके पैतृक गांव में सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। सीआरपीएफ जवानों और स्थानीय पुलिस की मौजूदगी में उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। सुधीर स्वामी के भतीजे मोनू ने उन्हें मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार के बाद भी ग्रामीणों में नाराजगी बनी रही। परिजनों ने सुधीर स्वामी की मौत की परिस्थितियों को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि घटना की वास्तविक वजह स्पष्ट की जानी चाहिए। परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच और अपनी मांगों पर उचित कार्रवाई की अपेक्षा जताई है।