जीवन को पवित्र और आत्मा को शुध्द बनाने वाली साधना है तपस्या: महासती प्रितीसुधा
भीलवाड़ा। साधना जीवन का उत्कृष्ट मार्ग है जिससे मनुष्य अपनी आत्मा को संसार से मुक्ति दिला सकता है। यह बात शुक्रवार को शास्त्रीनगर अहिंसा भवन मे साध्वी प्रितीसुधा ने संयम सुधा के तप की अनूमोदना करते हुए श्रद्धालूओ से कही। उन्होने कहा कि तपस्या जीवन को पवित्र और आत्मा को शुध्द बनाने वाली साधना है। इससे इंसान अपने अशुभ कर्मो का क्षय करके मोक्ष प्राप्त कर सकता है। जो इंसान निस्वार्थ भाव और श्रध्दा से साधना करता है वह व्यक्ति अपने पुण्य तो बांधता ही संसार के आवागमन से भी छुटकारा प्राप्त कर लेता है। अहिंसा भवन के अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह बाबेल ने बताया इस दौरान कर्नाटक से अखिल भारतीय राष्ट्रीय महिला जैन कॉन्फ्रेंस पूर्व अध्यक्षा रतनीबाई मेहता एवं बबिता श्रीश्रीमाल का हेमन्त आंचलिया, सरदारसिंह कावड़िया, लक्ष्मण सिंह पोखरना, कूशलसिंह बूलिया, सुशील चपलोत जतन जैन,अमर सिंह संचेती, हिम्मतसिंह बापना तथा महिला मंडल की अध्यक्षा नीता बाबेल, रजनी सिंघवी, कमला चैधरी, मंजू बापना, सुशीला छाजेड़, उमा आंचलिया, लाड़ मेहता, सुनिता झामड़, आशा संचेती, निर्मला बूलिया, शकुंतला खमेसरा आदि सभी ने स्वागत और अभिनन्दन किया। निलिष्का जैन जानकारी देते हुए बताया साध्वी संयमसुधा ने धर्मसभा मे 14 उपवास के महासती प्रितीसुधा से प्रत्याख्यान लिए।
प्रदेश के टोंक जिले में स्थित बीसलपुर एवं बांसवाड़ा के माही बांध के आयलैंड को सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों की धज्जियां उड़ाते हुए लीज पर देने के सरकार के कृत्य को गैर कानूनी बताते हुए पीपल फॉर एनिमल्स के प्रदेश प्रभारी पर्यावरणविद् बाबूलाल जाजू ने कहा कि सरकार में बैठे भ्रष्टाचारी अफसरों की नियत प्रकृति को बर्बाद करने की है। जाजू ने कहा कि बीसलपुर बांध का हिस्सा घोषित कंजर्वेशन रिजर्व है उसके बावजूद टापू को कमर्शियल गतिविधियों के लिए लीज पर देने की जल संसाधन विभाग की प्रक्रिया अवैधानिक है। जाजू ने बताया कि बीसलपुर एवं माही बांध में लाखों की संख्या में प्रवासी और स्थानीय पक्षियों एवं जीव जंतुओं का बसेरा होता है तथा बीसलपुर बांध का पानी टोंक, अजमेर, जयपुर जिलों के हजारों गांवों में पेयजल के रूप में सप्लाई होता है। जाजू ने कहा कि बांधों के टापू पर यदि होटल, रिसॉर्ट खोले जाएंगे तो उसका सीवरेज वाला पानी प्रदूषण फैलाएगा तथा वॉटर स्पोर्ट्स एक्टिविटी से जल प्रदूषित होगा जिसे बाद में सप्लाई के लिए दिया जाएगा जो स्वच्छ पेयजल के संवैधानिक अधिकार का अतिक्रमण होने के साथ ही यह लाखों जलीय जीवों की मौत का कारण बनेगा। जाजू ने सरकार को चेताते हुए कहा कि यदि बांधों को लीज पर देने की प्रक्रिया नही रोकी तो पर्यावरण और पानी के संरक्षण के लिए इस पर रोक लगाने हेतु उच्च न्यायालय में गुहार करेंगे।