Rajasthan राजस्थान: हालिया भारी बारिश से किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ा है। राज्य के ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने कहा कि धान की फसल को सबसे अधिक क्षति हुई है, कई इलाकों में खड़ी और कटी फसल पूरी तरह से नष्ट हो चुकी है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के साथ खड़ी है और जितना संभव होगा, उतना मुआवजा दिलाया जाएगा। कोटा में आयोजित समीक्षा बैठक के बाद मंत्री नागर ने बताया कि जिला प्रशासन और कृषि विभाग को तत्काल नुकसान का आंकलन करने के निर्देश दिए गए हैं। “अगले कुछ दिनों में जिला स्तरीय समिति की बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें उपग्रह चित्रों (satellite images) के आधार पर फसल क्षति का सटीक आकलन किया जाएगा। उसी रिपोर्ट के आधार पर किसानों को बीमा योजना के तहत अधिकतम मुआवजा दिया जाएगा,” उन्होंने कहा।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार केंद्र की प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के साथ-साथ अपनी राज्य स्तरीय राहत योजनाओं के जरिए किसानों को आर्थिक सहायता देगी। नागर ने कहा, “मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर प्रभावित किसानों के लिए विशेष राहत पैकेज तैयार किया जा रहा है। किसानों को न केवल बीमा का लाभ मिलेगा, बल्कि जिनके पास बीमा नहीं है, उन्हें भी सहायता दी जाएगी। मंत्री ने बताया कि कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ जिलों में लगातार बारिश और जलभराव से खेतों में खड़ी फसलें सड़ गई हैं। कई इलाकों में कटाई की गई धान की फसल खेतों में ही खराब हो गई, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि किसान फसल का नुकसान साबित करने के लिए ज्यादा कागजी प्रक्रिया में न उलझें, बल्कि ग्राम स्तर पर रिपोर्ट तैयार कर तुरंत राहत पहुंचाई जाए।
नागर ने यह भी कहा कि सरकार मौसम के बदलते पैटर्न को देखते हुए किसानों को फसल विविधीकरण (crop diversification) के लिए भी प्रोत्साहित करेगी। “हम चाहते हैं कि किसान ऐसी फसलें अपनाएं जो जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को झेल सकें। साथ ही, सिंचाई और जल प्रबंधन के आधुनिक तरीके अपनाने के लिए भी प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे,” उन्होंने कहा। मंत्री ने केंद्र सरकार की भूमिका की भी सराहना की और कहा कि कृषि मंत्रालय से राहत पैकेज के लिए जल्द प्रस्ताव भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य और केंद्र मिलकर सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी किसान मुआवजे से वंचित न रहे। किसानों से अपील करते हुए नागर ने कहा कि वे स्थानीय प्रशासन के साथ सहयोग करें और अपने नुकसान का सही आकलन करवाएं, ताकि जल्द से जल्द सहायता राशि उनके खातों में पहुंचाई जा सके।