कन्हैयालाल हत्याकांड में आरोपियों को बड़ा झटका
हाई कोर्ट से आरोपियों को झटका
राजस्थान: उदयपुर के बहुचर्चित कन्हैयालाल हत्याकांड में आरोपियों को हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने आतंकवाद से जुड़ी धाराओं को चुनौती देने वाली अपील खारिज कर दी है। इसके साथ ही इस मामले में आतंकवाद संबंधी धाराओं के तहत मुकदमा जारी रहने का रास्ता साफ हो गया है। हाई कोर्ट के इस फैसले को कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह मामला जून 2022 में उदयपुर में दर्जी कन्हैयालाल की निर्मम हत्या से जुड़ा है, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था। आरोपियों की ओर से मामले में लगाई गई आतंकवाद से संबंधित धाराओं को चुनौती दी गई थी। अपील के जरिए इन धाराओं से राहत पाने की कोशिश की गई, लेकिन हाई कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया। अदालत के फैसले के बाद आरोपियों को फिलहाल इन्हीं धाराओं के तहत मुकदमे का सामना करना होगा। हालांकि, फैसले के विस्तृत कानूनी आधार की पुष्टि आदेश की प्रति से ही हो सकेगी।
कन्हैयालाल हत्याकांड 28 जून 2022 को राजस्थान के उदयपुर में हुआ था। कन्हैयालाल शहर में सिलाई की दुकान चलाते थे। दो हमलावर ग्राहक बनकर उनकी दुकान पर पहुंचे थे और धारदार हथियार से उनकी हत्या कर दी थी। घटना का वीडियो भी सामने आया था, जिसके बाद देशभर में आक्रोश फैल गया था। इस वारदात ने कानून-व्यवस्था और कट्टरपंथी हिंसा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
घटना के बाद पुलिस ने मुख्य आरोपियों गौस मोहम्मद और मोहम्मद रियाज अत्तारी को गिरफ्तार किया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए को सौंपी गई थी। जांच एजेंसी ने हत्या की परिस्थितियों, आरोपियों की कथित साजिश और घटना के पीछे संभावित आतंकी उद्देश्य की जांच की।
एनआईए ने इस मामले में आतंकवाद से जुड़े कानूनी प्रावधानों के तहत भी आरोप लगाए थे। अभियोजन पक्ष का मामला रहा है कि यह केवल हत्या की सामान्य वारदात नहीं थी, बल्कि इसके पीछे भय पैदा करने और व्यापक स्तर पर दहशत फैलाने का उद्देश्य था। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम न्यायिक पुष्टि मुकदमे में साक्ष्यों और अदालत के फैसले के आधार पर ही होगी। हाई कोर्ट में आरोपियों की अपील का मुख्य मुद्दा आतंकवाद से जुड़ी धाराओं की वैधता था। आरोपियों ने इन प्रावधानों के तहत मुकदमा चलाए जाने को चुनौती दी थी। अपील खारिज होने का अर्थ है कि इस चरण पर अदालत ने उन्हें इन धाराओं से राहत नहीं दी है।
कानूनी दृष्टि से यह समझना भी जरूरी है कि किसी आरोपी की अपील खारिज होना उसे दोषी ठहराए जाने के समान नहीं है। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय संबंधित ट्रायल कोर्ट में प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर होगा। कन्हैयालाल हत्याकांड ने देशभर में व्यापक प्रतिक्रिया पैदा की थी। घटना के बाद विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने हत्या की निंदा करते हुए दोषियों को कठोर सजा देने की मांग की थी। पीड़ित परिवार भी लंबे समय से न्याय की उम्मीद लगाए हुए है।
इस मामले में आतंकवाद की धाराओं का बने रहना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इन प्रावधानों के तहत आरोपों की प्रकृति और कानूनी प्रक्रिया सामान्य हत्या के मुकदमे से अलग हो सकती है। अभियोजन पक्ष को अदालत में अपने आरोप साबित करने होंगे, जबकि बचाव पक्ष को आरोपों का खंडन करने और अपनी दलीलें रखने का अवसर मिलेगा। अब हाई कोर्ट द्वारा अपील खारिज किए जाने के बाद मामले की आगे की सुनवाई पर नजर रहेगी। कन्हैयालाल हत्याकांड देश के चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल है और इस पर आने वाले अंतिम न्यायिक फैसले का विशेष महत्व होगा।