जयपुर: राजस्थान एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने मंगलवार को अलवर और करौली जिलों में रिश्वतखोरी के दो अलग-अलग मामलों में कार्रवाई करते हुए तीन सरकारी कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। अलवर में पंचायत समिति से जुड़े दो इंजीनियरों पर एक फर्म के 2.52 लाख रुपये के लंबित बिल का भुगतान कराने के बदले रिश्वत मांगने और लेने का आरोप है। वहीं करौली में भी एक सरकारी कर्मचारी को अलग रिश्वत मामले में पकड़ा गया है।

ACB के अनुसार शिकायतों के सत्यापन के बाद अलग-अलग टीमें गठित कर ट्रैप की कार्रवाई की गई। अलवर के मामले में कठूमर पंचायत समिति के असिस्टेंट इंजीनियर शिवराम और जूनियर इंजीनियर मिन्ना खान को रिश्वत की रकम लेते हुए पकड़े जाने का दावा किया गया है।

2.52 लाख रुपये का बिल था लंबित

अलवर में सामने आया मामला एक फर्म के करीब 2.52 लाख रुपये के लंबित बिल से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का आरोप था कि बिल का भुगतान प्रोसेस करने के लिए पंचायत समिति के अधिकारियों की ओर से रिश्वत मांगी जा रही थी।

ACB के मुताबिक कठूमर पंचायत समिति में तैनात असिस्टेंट इंजीनियर शिवराम और जूनियर इंजीनियर मिन्ना खान पर रिश्वत मांगने का आरोप लगा।

शिकायत मिलने के बाद ब्यूरो ने सीधे कार्रवाई करने के बजाय पहले रिश्वत मांगने के आरोप का सत्यापन कराया।

40 हजार और 15 हजार मांगने का आरोप

शिकायत में आरोप लगाया गया कि असिस्टेंट इंजीनियर और जूनियर इंजीनियर ने लंबित बिल का भुगतान कराने के एवज में क्रमशः 40 हजार रुपये और 15 हजार रुपये की मांग की थी।

ACB ने 18 सितंबर को शिकायत का सत्यापन कराया। सत्यापन के दौरान रिश्वत मांगने संबंधी आरोप की पुष्टि होने का दावा किया गया। इसके बाद अधिकारियों ने आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ने के लिए ट्रैप की योजना तैयार की।

ब्यूरो की टीम ने शिकायतकर्ता को पूरी प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी और मंगलवार को कार्रवाई की।

25 हजार और 10 हजार लेते पकड़े गए

ACB के अनुसार ट्रैप के दौरान असिस्टेंट इंजीनियर शिवराम को 25 हजार रुपये और जूनियर इंजीनियर मिन्ना खान को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया।

आरोप है कि दोनों ने शिकायतकर्ता की फर्म के लंबित बिल का भुगतान आगे बढ़ाने के बदले यह रकम ली थी।

ACB की टीम ने रिश्वत की रकम बरामद करने के बाद दोनों कर्मचारियों को हिरासत में लिया और बाद में गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद उनसे पूछताछ शुरू की गई।

ट्रैप के बाद कार्यालय में भी जांच

ऐसे मामलों में ACB की ओर से ट्रैप कार्रवाई के बाद संबंधित कार्यालय और आरोपी कर्मचारियों से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाती है। इस मामले में भी लंबित बिल और उसके भुगतान की प्रक्रिया से संबंधित रिकॉर्ड महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि 2.52 लाख रुपये का बिल कितने समय से लंबित था और उसके भुगतान की प्रक्रिया किस स्तर पर रुकी हुई थी।

इसके साथ ही अधिकारियों की भूमिका और फाइल पर किए गए नोटिंग तथा अन्य संबंधित रिकॉर्ड की भी जांच की जा सकती है।

करौली में भी ACB की कार्रवाई

अलवर के साथ राजस्थान ACB ने करौली जिले में भी रिश्वतखोरी के एक अलग मामले में कार्रवाई की। इस मामले में एक अन्य सरकारी कर्मचारी को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।

इस तरह मंगलवार को दोनों जिलों में हुई अलग-अलग कार्रवाई में कुल तीन सरकारी कर्मचारी ACB के शिकंजे में आए।

दोनों मामले अलग-अलग शिकायतों और विभागीय काम के बदले कथित रिश्वत मांगने से जुड़े हैं। करौली मामले की विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद रिश्वत की रकम और संबंधित सरकारी काम की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

शिकायत के बाद शुरू हुई कार्रवाई

ACB की ट्रैप कार्रवाई में शिकायतकर्ता की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। रिश्वत मांगे जाने की शिकायत मिलने के बाद ब्यूरो पहले आरोप का सत्यापन करता है। यदि सत्यापन में शिकायत प्रथम दृष्टया सही पाई जाती है तो ट्रैप की योजना बनाई जाती है।

अलवर मामले में भी 18 सितंबर को सत्यापन किए जाने के बाद मंगलवार को ट्रैप कार्रवाई की गई।

ACB का दावा है कि दोनों इंजीनियरों को तय रकम लेते हुए पकड़ा गया। अब आगे की जांच में यह देखा जाएगा कि रिश्वत की मांग और भुगतान से जुड़े अन्य लोग भी मामले में शामिल थे या नहीं।

भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत कार्रवाई

गिरफ्तार सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

जांच एजेंसी को रिश्वत की कथित मांग, उसके सत्यापन और ट्रैप के दौरान हुई कार्रवाई से संबंधित साक्ष्यों को अदालत के सामने प्रस्तुत करना होगा।

आरोपियों से पूछताछ के दौरान उनके मोबाइल फोन, सरकारी फाइलों और अन्य दस्तावेजों की भी जांच की जा सकती है। इससे यह पता लगाने की कोशिश होगी कि संबंधित सरकारी काम को लेकर शिकायतकर्ता और आरोपियों के बीच पहले क्या बातचीत हुई थी।

बिल भुगतान की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में

अलवर मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू शिकायतकर्ता की फर्म का 2.52 लाख रुपये का लंबित बिल है। ACB जांच में इस बिल से संबंधित पूरी प्रक्रिया को खंगाल सकती है।

इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि बिल का भुगतान सामान्य प्रक्रिया के तहत होना था या उसमें कोई दस्तावेजी कमी थी। साथ ही यह भी जांच का विषय होगा कि कथित रिश्वत की मांग किस आधार पर की गई।

अगर जांच में अन्य कर्मचारियों या अधिकारियों की भूमिका सामने आती है तो कार्रवाई का दायरा बढ़ सकता है।

तीन कर्मचारियों की गिरफ्तारी से मचा हड़कंप

एक ही दिन अलवर और करौली में ACB की कार्रवाई के बाद संबंधित सरकारी विभागों में हलचल बढ़ गई। अलवर में एक साथ असिस्टेंट इंजीनियर और जूनियर इंजीनियर की गिरफ्तारी के कारण मामला खास तौर पर चर्चा में आ गया।

हालांकि गिरफ्तारी और ACB के आरोप अपने आप में दोषसिद्धि नहीं हैं। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

फिलहाल ACB दोनों मामलों में आगे की जांच कर रही है। अधिकारियों से पूछताछ और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद रिश्वत के कथित लेनदेन और इसमें शामिल लोगों की भूमिका को लेकर अधिक जानकारी सामने आ सकती है।

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