Jaipurजयपुर। गोपालपुरा बाईपास पर स्थित एक कोचिंग संस्थान को जयपुर ग्रेटर नगर निगम ने सोमवार को सील कर दिया। एक दिन पहले कुछ छात्र पढ़ाई के दौरान बेहोश हो गए थे। राजस्थान मानवाधिकार आयोग ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने और पीड़ितों को मुफ्त इलाज और मुआवजा देने की सिफारिश की है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी राज्य सरकार से कोचिंग संस्थानों को प्रताप नगर स्थित 'कोचिंग हब' में स्थानांतरित करने की मांग की है। रविवार को कक्षा के दौरान सात छात्र बेहोश हो गए और कुछ अन्य बीमार हो गए। उन्हें सांस लेने में तकलीफ और तेज सिरदर्द की शिकायत थी। स्थिति के कारण अफरातफरी मच गई और छात्र आनन-फानन में इमारत से बाहर निकल गए। बेहोश हुए छात्रों को पास के अस्पताल ले जाया गया।
जयपुर ग्रेटर नगर निगम के उपायुक्त (मानसरोवर जोन) लक्ष्मीकांत कटारा ने पीटीआई-भाषा को बताया कि निगम और एफएसएल की एक टीम घटना की जांच के लिए आज कोचिंग संस्थान पहुंची। उन्होंने कहा, "हमारी टीम ने कल शाम सीवेज लाइन की जांच की, लेकिन यह सही पाई गई और प्रथम दृष्टया वहां से कोई जहरीली गैस नहीं निकली। आज इमारत को अस्थायी रूप से सील कर दिया गया है, ताकि विस्तृत जांच की जा सके।" उपायुक्त ने जांच के लिए छह सदस्यीय कमेटी गठित की है। पुलिस के अनुसार यह हादसा संभवत: गटर से निकलने वाली गैस या संस्थान की छत पर बने किचन से निकलने वाले धुएं के कारण हुआ है। राजस्थान मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस जीआर मूलचंदानी ने मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से प्रभावित छात्रों को उचित निशुल्क चिकित्सा सुविधा और मुआवजा सुनिश्चित करने तथा जिम्मेदार कोचिंग संस्थान के प्रबंधन के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने को कहा है। अध्यक्ष ने मामले की विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी है। पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि यह घटना चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि कोचिंग संस्थानों में इस तरह की दुर्घटनाएं कभी भी बड़ा रूप ले सकती हैं, क्योंकि यहां क्षमता से अधिक छात्रों को पढ़ाया जाता है, जो उचित नहीं है।