जयपुर रियासत की संपत्तियों की जांच अंतिम चरण में, 101 बीघा जमीन के दस्तावेज ADA में मिले
आगरा। जयपुर रियासत की आगरा स्थित संपत्तियों को लेकर चल रही जांच अब अंतिम चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। जयपुर हाउस की करीब 101 बीघा भूमि से जुड़े दस्तावेज शुक्रवार को आगरा विकास प्राधिकरण (ADA) कार्यालय में मिल गए। दस्तावेजों की जांच के बाद इसकी रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेज दी गई है। वहीं नगर निगम कार्यालय में रियासत की संपत्तियों से संबंधित कोई दस्तावेज नहीं मिलने की बात सामने आई है। तहसील सदर में अभी संबंधित अभिलेखों की जांच जारी है।
जयपुर रियासत की संपत्तियों के स्वामित्व और पुराने दस्तावेजों को लेकर प्रशासन की ओर से रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। शुक्रवार को ADA, नगर निगम और तहसील सदर कार्यालय में अधिकारियों ने सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे तक उपलब्ध अभिलेखों की जांच की। इस दौरान अलग-अलग विभागों में रखे पुराने दस्तावेजों और रिकॉर्ड को देखा गया।
101 बीघा जमीन की बिक्री का रिकॉर्ड मिला
जांच के दौरान जयपुर हाउस से संबंधित करीब 101 बीघा भूमि के दस्तावेज ADA कार्यालय में उपलब्ध मिले। बताया गया है कि इस भूमि की बिक्री लोक निर्माण विभाग राजस्थान की ओर से की गई थी। इसके बाद वर्ष 1969 में नगर महापालिका परिषद के मुख्य नगर अधिकारी ने 6.90 लाख रुपये में जमीन खरीदी थी।
यह भूमि मौजा खतैना के दो खसरा नंबरों से संबंधित बताई गई है। रिकॉर्ड मिलने के बाद अधिकारियों ने दस्तावेजों की जांच की और संबंधित जानकारी को रिपोर्ट में शामिल किया। रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेज दी गई है।
हालांकि, जमीन के दस्तावेज मिलने मात्र से संपत्ति के वर्तमान स्वामित्व या उससे जुड़े सभी कानूनी पहलुओं का अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इसके लिए पुराने राजस्व रिकॉर्ड, बिक्री दस्तावेज, स्वामित्व से जुड़े अभिलेख और वर्तमान रिकॉर्ड का आपस में मिलान किया जाना जरूरी है।
नगर निगम में नहीं मिला रिकॉर्ड
जांच के दौरान नगर निगम कार्यालय में जयपुर रियासत की संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज नहीं मिले। अधिकारियों ने उपलब्ध रिकॉर्ड को खंगाला, लेकिन फिलहाल ऐसा कोई दस्तावेज सामने नहीं आया जिससे इन संपत्तियों के संबंध में नगर निगम के पास मौजूद पुराने रिकॉर्ड की पूरी जानकारी मिल सके।
नगर निगम कार्यालय में दस्तावेज नहीं मिलने के बाद अब यह भी देखा जा रहा है कि पुराने अभिलेख किसी अन्य विभाग, कार्यालय या रिकॉर्ड रूम में स्थानांतरित तो नहीं किए गए हैं। हालांकि, इस संबंध में अंतिम स्थिति विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
तहसील सदर में जारी है जांच
जयपुर रियासत की संपत्तियों से जुड़े राजस्व अभिलेखों की जांच तहसील सदर में भी की जा रही है। यहां पुराने खसरा, खतौनी और अन्य राजस्व दस्तावेजों को देखा जा रहा है। खास तौर पर उन रिकॉर्ड की जांच की जा रही है जिनसे जमीन के स्वामित्व और हस्तांतरण की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
प्रशासनिक जांच में पुराने दस्तावेजों का मिलान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। किसी संपत्ति का वर्तमान रिकॉर्ड और पुराने राजस्व अभिलेख अलग-अलग समय की स्थिति को दर्शा सकते हैं। ऐसे में सभी संबंधित रिकॉर्ड को एक साथ देखकर ही निष्कर्ष निकाला जाएगा।
1952 में राजस्थान सरकार में हुआ था विलय
जयपुर रियासत का राजस्थान में विलय वर्ष 1952 में हुआ था। इसके बाद रियासत से संबंधित संपत्तियों और परिसंपत्तियों की स्थिति प्रशासनिक रिकॉर्ड का हिस्सा बनी। आगरा में जयपुर रियासत की दो बड़ी संपत्तियों का उल्लेख किया जा रहा है।
इनमें जयपुर हाउस कॉलोनी, मनकामेश्वर मंदिर और जयपुर हाउस से प्रतापनगर रोड तक का क्षेत्र शामिल बताया गया है। इन संपत्तियों से जुड़े पुराने रिकॉर्ड और उनके वर्तमान स्वरूप को लेकर ही जांच की जा रही है।
रियासतों के विलय के बाद संपत्तियों के हस्तांतरण, प्रबंधन और स्वामित्व से संबंधित दस्तावेज अलग-अलग सरकारी विभागों में दर्ज हो सकते हैं। इसलिए प्रशासन की ओर से कई विभागों के रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
सुबह से शाम तक खंगाले गए अभिलेख
शुक्रवार को ADA, नगर निगम और तहसील सदर में अधिकारियों की टीम ने लंबे समय तक रिकॉर्ड की जांच की। सुबह 10 बजे शुरू हुई प्रक्रिया शाम पांच बजे तक चली। इस दौरान उपलब्ध पुराने दस्तावेजों को निकालकर उनकी जानकारी दर्ज की गई।
ADA में 101 बीघा भूमि से संबंधित दस्तावेज मिलने के बाद उस रिकॉर्ड की जांच कर रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी गई। वहीं नगर निगम में रिकॉर्ड नहीं मिलने और तहसील सदर में जांच जारी रहने के कारण पूरी तस्वीर अभी सामने आना बाकी है।
संपत्तियों की स्थिति पर रिपोर्ट का इंतजार
जांच का उद्देश्य जयपुर रियासत से जुड़ी संपत्तियों के पुराने रिकॉर्ड और उनकी वर्तमान स्थिति को स्पष्ट करना है। इसके लिए अलग-अलग सरकारी विभागों में मौजूद दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है।
101 बीघा भूमि से संबंधित दस्तावेज मिलने के बाद जांच में एक महत्वपूर्ण रिकॉर्ड सामने आया है। रिकॉर्ड के अनुसार, भूमि की बिक्री लोक निर्माण विभाग राजस्थान द्वारा की गई थी और 1969 में नगर महापालिका परिषद के मुख्य नगर अधिकारी द्वारा 6.90 लाख रुपये में इसे खरीदे जाने की जानकारी है।
अब तहसील सदर में चल रही जांच और अन्य पुराने अभिलेखों के मिलान के बाद यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि जयपुर रियासत की आगरा स्थित संपत्तियों से संबंधित स्वामित्व और हस्तांतरण का पूरा रिकॉर्ड क्या रहा है।
फिलहाल ADA से मिली जानकारी की रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी जा चुकी है। नगर निगम से संबंधित रिकॉर्ड नहीं मिलने और तहसील सदर की जांच जारी रहने के कारण प्रशासनिक स्तर पर दस्तावेज जुटाने की प्रक्रिया अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले रिकॉर्ड और उनके सत्यापन के आधार पर तय की जाएगी।