डिस्पोजल बर्तनों ने चौपट किया कुम्हारों का पैतृक धंधा

कुम्हार सालभर दिवाली का इंतजार करते हैं. ताकि उनके मिट्टी के दीपक और बर्तनों की अच्छी बिक्री हो जाए और उनके घर में भी खुशियां आएं. पूरे साल कुम्हार समाज के लोगों के मिट्टी के दीपक और बर्तन नाममात्र के बिक पाते हैं. ऐसे में ये लोग सालभर खुशियों के इंतजार में बैठे रहते हैं.

Update: 2021-10-27 12:05 GMT

जनता से रिश्ता। कुम्हार सालभर दिवाली का इंतजार करते हैं. ताकि उनके मिट्टी के दीपक और बर्तनों की अच्छी बिक्री हो जाए और उनके घर में भी खुशियां आएं. पूरे साल कुम्हार समाज के लोगों के मिट्टी के दीपक और बर्तन नाममात्र के बिक पाते हैं. ऐसे में ये लोग सालभर खुशियों के इंतजार में बैठे रहते हैं.

लक्ष्मण प्रसाद प्रजापत ने बताया कि एक वक्त था जब सभी लोग त्योहारों और सामाजिक आयोजनों के दौरान मिट्टी के बर्तनों और दीपकों का ही इस्तेमाल करते थे. लेकिन समय के साथ प्लास्टिक और डिस्पोजल कप, प्लेट, दीपक आदि का चलन बढ़ गया है, इससे कुम्हारों का धंधा चौपट हो गया है. अब सालभर थोड़ी बहुत मिट्टी के दीपक और बर्तनों की बिक्री होती है, नहीं तो हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते हैं.
लक्ष्मण प्रसाद ने बताया कि समाज के सभी लोगों को दिवाली का बेसब्री से इंतजार रहता है क्योंकि साल भर में यही एक अवसर ऐसा होता है जब मिट्टी के दीपकों और अन्य बर्तनों की बिक्री काफी अच्छी हो जाती है. इसी से साल भर गुजर-बसर चलती है.


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