भीलवाड़ा। कल 15 अगस्त हम अपना राष्ट्रीय ध्वज फहराकर ससम्मान देश की आजादी का जश्न स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास से मनाने जा रहें हैं, लेकिन उसकी पुर्व संध्या पर शहर के व्यस्ततम चौराहे से कैद की गई ये तस्वीर सोचने पर मजबुर कर रही है की आखिर "सम्मान का इतना अपमान क्यों" आखिर उन हाथों में अपना राष्ट्रीय ध्वज क्यों, जिनको इसके सम्मान और अपमान की समझ नहीं। क्या इस बैकदरी को रोकने वाला कोई नहीं है। क्या आजादी के यही मायने रह गए हैं, या आजादी दिलाने वाले वीर शहीदों का बलिदान और इस तिरंगे की आन बान और शान में सीमा पर तैनात जवानों यही सम्मान है। स्थानीय प्रशासन को इसे गंभीरता से लेते चौराहे पर बेच रहे राष्ट्रीय ध्वज की किमत को बताना चाहिए और उन्हें पाबंद करना चाहिए ताकी राष्ट्रीय ध्वज का युं सार्वजनिक अपमान नहीं हो।
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