
अमृतसर: केंद्रीय मंत्री और पंजाब के कांग्रेसी नेता रवनीत बिट्टू ने हाल ही में श्री हरिमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) में माथा टेका और गुरु की दरबार में शीश झुका कर आशीर्वाद लिया। यह उनका श्रद्धा भाव से भरा यात्रा था, जिसमें उन्होंने अपनी आस्था और धर्म के प्रति अपनी निष्ठा को प्रकट किया। रवनीत बिट्टू का यह कदम सिख धर्म के प्रमुख धार्मिक स्थल पर आस्था व्यक्त करने के रूप में देखा जा रहा है, जो न केवल उनके व्यक्तिगत विश्वास को दर्शाता है, बल्कि समाज के लिए उनके सकारात्मक दृष्टिकोण का भी प्रतीक है।
स्वर्ण मंदिर में माथा टेकने के बाद, रवनीत बिट्टू ने पत्रकारों से बातचीत की और इस पवित्र स्थल पर अपनी श्रद्धा व्यक्त की। उन्होंने कहा, "श्री हरिमंदिर साहिब में आकर मुझे एक आंतरिक शांति महसूस होती है। यह मेरे लिए केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि समाज की एकता और भाईचारे का प्रतीक है। मैं गुरु के चरणों में प्रार्थना करता हूं कि वे हमारे देश को हमेशा सशक्त और समृद्ध रखें।"
केंद्रीय मंत्री ने इस अवसर पर केंद्र सरकार की योजनाओं का भी जिक्र किया और कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य देश में धर्मनिरपेक्षता को बनाए रखना और सभी धर्मों के प्रति सम्मान की भावना को बढ़ावा देना है। साथ ही उन्होंने पंजाब की विकास योजनाओं को लेकर अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की और लोगों के कल्याण के लिए केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।
स्वर्ण मंदिर में रवनीत बिट्टू के माथा टेकने के बाद सिख समुदाय के नेताओं और समर्थकों ने उनका स्वागत किया। इस मौके पर उन्होंने पंजाब और देशभर में शांति और सद्भाव की भावना को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। रवनीत बिट्टू की इस यात्रा ने सिख समाज और भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण संदेश भेजा है कि धर्म और राजनीति का संतुलन बनाए रखना समाज के लिए लाभकारी हो सकता है।
इस यात्रा के दौरान रवनीत बिट्टू के साथ उनके समर्थक और अन्य कांग्रेसी नेता भी मौजूद थे, जो इस अवसर पर उनके साथ धार्मिक उत्सव का हिस्सा बने।